मनरेगा ने महात्मा गांधी का नाम हटा तो विपक्ष ने खूब हंगामा किया. लेकिन अब बजट में सरकार ने ‘महात्मा गांधी ग्राम स्वराज योजना’ लॉन्च करके विपक्ष के उस दांव की हवा निकाल दी. ये मैसेज भी दे दिया कि महात्मा गांधी का ग्राम स्वराज का नारा आज भी उतना ही प्रासंगिक है.
जब सरकार ने मनरेगा का नाम बदलकर ‘विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन'(वीबी-जी रामजी) रखा, तो विपक्ष को लगा कि उन्हें बैठे-बिठाए एक बड़ा मुद्दा मिल गया है. राहुल गांधी ने हर मंच से हुंकार भरी कि ये गांधी का अपमान है, ये इतिहास मिटाने की साजिश है. उन्होंने तो चिढ़ के मारे ‘जी राम जी’ नाम तक नहीं लिया. सरकार ने बजट में ‘महात्मा गांधी ग्राम स्वराज योजना’ लॉन्च करके विपक्ष के उस गुब्बारे की हवा ही निकाल दी, जिसे कांग्रेस बड़ी मेहनत से फुला रही थी.
जब सरकार ने मनरेगा को ‘जी राम जी’ का चोला पहनाया, तो इसके पीछे केवल एक योजना का नाम बदलना नहीं था. यह सीधे तौर पर ग्रामीण भारत को राम नाम की सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने की कोशिश थी. सरकार का तर्क यह था कि योजना को केवल ‘काम’ तक सीमित न रखकर ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य से जोड़ा जाए. लेकिन कांग्रेस ने इसे इतिहास मिटाने की कोशिश बताया. राहुल गांधी ने कहा- बीजेपी गांधी के नाम को हाशिए पर धकेल रही है. लेकिन सरकार ने ‘महात्मा गांधी ग्राम स्वराज योजना’ को एक बिल्कुल नए और बड़े विजन के साथ लॉन्च करके विपक्ष के उस हथियार को ही छीन लिया, जिसे वे ढाल बना रहे थे. सरकार ने मैसेज दिया कि हम गांधी के नाम को हटा नहीं रहे, बल्कि उसे डिजिटल इंडिया और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ नए रूप में पेश कर रहे हैं.
विपक्ष के नहले पर सरकार का दहला
राहुल गांधी का पूरा नैरेटिव इस बात पर टिका था कि बीजेपी गांधी को खत्म कर रही है. लेकिन सरकार ने पलटवार ऐसा किया कि विपक्ष देखता रह गया. ‘महात्मा गांधी ग्राम स्वराज योजना’ को लाकर सरकार ने यह संदेश दे दिया कि गांधी उनके लिए केवल नाम नहीं, बल्कि ‘ग्राम स्वराज’ का संकल्प हैं. यह एक तरह का पॉलिटिकल ट्रैप है. सरकार ने गांधी के नाम पर एक नई और बड़ी योजना शुरू कर दी और उधर ‘जी राम जी’ का बजट भी बढ़ा दिया. यानी विपक्ष का वह आरोप भी फुस्स हो गया कि नाम बदलकर योजना को कमजोर किया जा रहा है.
बजट का बूस्टर डोज़ और विपक्ष की बेबसी
अक्सर होता यह है कि जब किसी योजना की री-ब्रांडिंग होती है, तो फंड में कटौती की आशंका रहती है. लेकिन यहां तो गंगा उल्टी बह गई. ‘जी राम जी’ का बजट बढ़ाकर सरकार ने यह जता दिया कि यह सिर्फ नाम का बदलाव नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में जान फूंकने का नया इरादा है. कांग्रेस जिस मनरेगा को अपना सबसे बड़ा हथियार मानती थी, उसे अब एक ऐसे नाम से पुकारना पड़ रहा है जो सरकार के एजेंडे को सूट करता है. राहुल गांधी की ‘गांधीवादी राजनीति’ को सरकार ने उन्हीं के नाम की एक और बड़ी योजना लाकर चेक-मेट कर दिया है.
नैरेटिव बदल रही सरकार
सरकार ने यह साफ कर दिया है कि वह केवल नाम नहीं बदल रही, बल्कि नैरेटिव बदल रही है. जी राम जी के जरिए ग्रामीण वोट बैंक को साधना और ‘ग्राम स्वराज’ के जरिए गांधी के नाम पर विपक्ष की दावेदारी खत्म करना. यह मोदी सरकार का वो मास्टरस्ट्रोक है जिसने 2029 की चुनावी बिसात अभी से बिछा दी है. विपक्ष अब भी नाम के फेर में उलझा है, जबकि सरकार ने ‘काम और नाम’ के कॉकटेल से ग्रामीण मतदाताओं के मन में अपनी जगह पक्की कर ली है. अब देखना यह है कि राहुल गांधी इस ‘गांधी बनाम गांधी’ और ‘राम बनाम काम’ की लड़ाई में नया क्या लेकर आते हैं.

