राजस्थान, एक तरफ शिक्षा मंत्री बेरोजगार युवाओं को गाय चराने की नसीहत दे रहे हैं तो, वहीं राज्य सरकार को जर्जर हो चुके सरकारी स्कूलों की हालत सुधारने के लिए बीस हजार करोड रुपए के फंड की जरूरत है. शिक्षा विभाग ने यह जानकारी राजस्थान हाईकोर्ट में दाखिल किए गए हलफनामे में दी है. शिक्षा विभाग की तरफ से अदालत को यह भी बताया गया है कि इतने पैसे इकट्ठा करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार के साथ ही पूंजीपतियों और दूसरी संस्थाओं से भी मदद मांगी गई है.
राज्य के सरकारी स्कूलों के 84 हजार से ज्यादा क्लासरूम जर्जर हालत में
गौरतलब है कि झालावाड़ में स्कूल बिल्डिंग गिरने से छह बच्चों की मौत के मामले में राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर बेंच ने सुओ मोटो लेते हुए जनहित याचिका कायम करते हुए सुनवाई शुरू की थी. इस सुनवाई के दौरान ही यह तथ्य सामने आया था कि राज्य के सरकारी स्कूलों के 84 हजार से ज्यादा क्लासरूम ऐसी जर्जर हालत में है, जिनमें बच्चों को पढ़ाया नहीं जा सकता. इस बारे में हाईकोर्ट ने समय-समय पर राजस्थान सरकार को दिशा निर्देश दिए थे. अदालत ने सरकार से यह भी कहा था कि जब तक स्कूलों की नई बिल्डिंग नहीं बन जाती या फिर उनकी मरम्मत नहीं हो जाती, तब तक बच्चों की पढ़ाई के वैकल्पिक इंतजाम किए जाने चाहिए.
हाईकोर्ट ने इस मामले में राजस्थान के शिक्षा सचिव और डायरेक्टर को कंप्लीट रोड मैप के साथ पेश होने को कहा था. अधिकारियों ने कोर्ट में बताया कि सरकारी स्कूलों का कायाकल्प करने के लिए तकरीबन बीस हजार करोड़ रूपए की जरूरत है. शिक्षा विभाग के पास इतने पैसे नहीं है. मंत्रालय के जरिए इस बारे में केंद्र और राज्य सरकार से मदद की गुहार लगाई गई है. राज्य सरकार से दूसरे फंड से भी पैसे देने की अपील की गई है. विभाग इसके अलावा भामाशाहों और संस्थाओं से भी मदद मांग रहा है.
राजस्थान बजट में स्कूलों की हालत सुधारने के लिए विशेष फंड मिलने की उम्मीद
अधिकारियों ने कोर्ट को यह भी बताया कि राजस्थान सरकार का बजट 11 फरवरी को आने वाला है. बजट में स्कूलों की हालत सुधारने के लिए विशेष फंड मिलने की उम्मीद है. हालांकि कोर्ट अधिकारियों द्वारा पेश किए गए रोड मैप और हलफनामे से संतुष्ट नहीं हुई. इस केस से जुड़े हुए राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अधिवक्ता वागीश कुमार सिंह के मुताबिक हाईकोर्ट ने इस मामले में अधिकारियों के रवैये पर नाराजगी जताई है.
अदालत ने कहा है कि शिक्षा विभाग के जिम्मेदार लोगों को प्रदेश के मुख्य सचिव और वित्त सचिव से मिलकर उनसे स्पेशल फंड दिए जाने के बारे में बात करनी चाहिए. अधिवक्ता वागीश कुमार सिंह के मुताबिक हाईकोर्ट इस मामले में 16 फरवरी को अगली सुनवाई करेगा. 16 फरवरी को होने वाली सुनवाई में अधिकारियों को नए सिरे से तैयार किए गए रोड मैप को अदालत में पेश करना होगा.
