कोलकाता : पश्चिम बंगाल में एसआईआर की लड़ाई को लेकर दिल्ली पहुंच गई हैं। उन्होंने चुनाव आयोग में अपना पक्ष रखने के बाद मुख्य निर्वाचन आयोग पर हमला बोला और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग चलाने की मांग की। बुधवार को टीएमसी प्रमुख सुप्रीम कोर्ट पहुंची और टीएमसी की ओर से दायर याचिका की सुनवाई के दौरान दलील भी दी। उनके साथ एसआईआर से प्रभावित लोगों का प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद था। अपनी दलील में ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को वॉट्सऐप आयोग बताया और पश्चिम बंगाल में एसआईआर को लेकर जारी हो रहे नोटिस का जिक्र किया। उनकी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी किया। ममता बनर्जी कविताओं की एक किताब भी SIR :26 in 26 भी लिखी है, जिसमें एसआईआर के मुद्दे पर 26 कविताएं हैं।

जुझारू छवि हासिल करने की कोशिश

चुनाव आयोग ने बिहार विधानसभा चुनाव से पहले स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की शुरुआत की। इसके बाद से ही विपक्षी दलों ने एसआईआर को विरोध शुरू किया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी रैलियों और जनसभाओं में इस मुद्दे को उठाया। फिर देश के 12 राज्यों में एसआईआर की प्रक्रिया शुरू हुई और वोटर लिस्ट ड्राफ्ट में हजारों लोगों के नाम काटे गए। पश्चिम बंगाल में भी 58 लाख वोटरों के नाम हटाए गए और विसंगतियों के कारण 1.6 करोड़ लोग जांच के दायरे में आए। इसके बाद टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने निर्वाचन आयोग से सीधी टक्कर ली और मार्च-अप्रैल में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए अपना एजेंडा साफ कर दिया। उन्होंने एसआईआर के विरोध को जो अंदाज दिखाया, वैसा अभी तक किसी राजनेता ने नहीं किया। अपने तेवर से एक बार फिर फाइटर छवि के साथ जनता के बीच जाने की तैयारी कर ली।

एंटी इम्कबेंसी का जवाब में संघर्ष का रास्ता

2026 के विधानसभा चुनाव में उन्हें एंटी इम्कबेंसी से मुकाबला करना होगा। मां, माटी और मानूस के दम पर ममता बनर्जी पिछले तीन चुनावों में जनता का समर्थन हासिल किया था। 15 साल में वह शासक की भूमिका में रहीं, जिसके खिलाफ विपक्षी बीजेपी ने करप्शन, संदेशखाली, कोलकाता रेप केस जैसे लॉ एंड ऑर्डर के मुद्दे को उठा रखा है। बीजेपी भी बंगाल में पूरी ताकत झोंक रही है। इससे मुकाबले के लिए ममता बनर्जी ने एसआईआर के जरिये अपनी संघर्षशील नेता की छवि को हासिल करने की कोशिश की है। ईडी के खिलाफ उन्होंने पहले ही मोर्चा खोल रखा है। ममता बनर्जी का यह दांव कारगर साबित हो सकता है क्योंकि अगर वह एसआईआर के मुद्दे को चुनाव तक खींचकर ले जाने में सफल रहीं तो एंटी इम्कबेंसी पीछे छूट जाएगी।

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