इंफाल: पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में राष्ट्रपति शासन को हटा लिया गया है। केंद्र सरकार ने यह निर्णय राज्य में नई सरकार के दावा पेश किए जाने के बाद उठाया। मणिपुर में पिछले साले तत्कालीन सीएम एन बीरेन सिंह के 9 फरवरी को इस्तीफा देने के बाद 13 फरवरी को राष्ट्रपति शासन लागू किया गया था। बुधवार को जब बीजेपी और एनडीए के नेता वाई खेमचंद सिंह की अगुवाई में नई सरकार बनाने का दावा पेश किया गया तो पूर्वोत्तर राज्य में राष्ट्रपति शासन को हटा लिया गया। गौरतलब हो कि इंफाल में मंगलवार को बीजेपी विधायक दल की बैठक में वाई खेमचंद सिंह को नेता चुना गया था। राज्य में बीजेपी ने एक सीएम और दो डिप्टी सीएम के फॉर्मूले के साथ नई सरकार का रास्ता निकाला है।
नई सरकार का शपथ ग्रहण जल्द
मणिपुर से राष्ट्रपति शासन हटने के बाद अब जल्द ही नए मुख्यमंत्री के तौर पर वाई खेमचंद सिंह और उनके मंत्रिमंडल के सहयोगी शपथ ग्रहण करेंगे। मैतेई और कुकी जातीय हिंसा में झुलसे मणिपुर में सरकार की ताजपोशी को राज्य में शांति बहाली की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। बुधवार को वाई खेमचंद सिंह की अगुवाई में बीजेपी और एडीए के घटक दलों के नेता राज्यपाल अजय भल्ला से मिले। उन्होंने इस दौरान सरकार बनाने का दावा पेश किया। उनके साथ बीजेपी नेता संबित पात्रा और तरुण चुग भी मौजूद रहे। राज्य विधानसभा के स्पीकर और पिछली सरकार में मंत्री रहे वाई खेमचंद सिंह मणिपुर के 13वें मुख्यमंत्री होंगे। वह मैतेई समुदाय से आते हैं। उनकी छवि एक उदारवादी नेता की है। मणिपुर में 13 फरवरी 2025 से राष्ट्रपति शासन लागू है।
मणिपुर विधानसभा की स्थिति
राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद 60 सदस्यीय विधानसभा को निलंबित कर दिया गया था। विधानसभा का कार्यकाल 2027 तक है। मौजूदा सदन में बीजेपी के 37 विधायक हैं। 2022 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी के 32 उम्मीदवारों ने जीत हासिल की थी। जनता दल (यूनाइटेड) ने छह सीटें जीती थीं, जिनमें से पांच विधायक बाद में बीजेपी में शामिल हो गए। अन्य विधायकों में से छह नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) से, पांच नगा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) से, पांच कांग्रेस से, दो कुकी पीपुल्स अलायंस से, एक जद (यू) से और तीन निर्दलीय हैं। मौजूदा विधायक का निधन हो जाने के कारण वर्तमान में एक सीट रिक्त है।

