नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील उन लोगों को भी फायदा पहुंचाएगी जो महंगी गाड़ियों के शौकीन हैं। इस ट्रेड डील से भारत के प्रीमियम गाड़ियों के बाजार में कुछ बदलाव आने की उम्मीद है। खास तौर पर, कुछ महंगी मोटरसाइकिलें और बड़ी इंजन वाली गाड़ियां अब भारत में सस्ती हो सकती हैं। इससे ग्राहकों को ज्यादा विकल्प मिलेंगे, लेकिन भारतीय कंपनियों को ज्यादा नुकसान नहीं होगा।
टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक हार्ले-डेविडसन, जीप और टेस्ला जैसी अमेरिकी कंपनियों को इस समझौते का फायदा मिल सकता है। साथ ही, कुछ सुरक्षा उपाय भी किए गए हैं ताकि भारतीय निर्माताओं को सीधी टक्कर न मिले। सरकार का यह कदम ऐसे खास बाजारों को ध्यान में रखकर उठाया गया है जहां घरेलू कंपनियों की हिस्सेदारी और बिक्री कम है।
महंगी गाड़ियों पर कितनी छूट?
- हार्ले-डेविडसन की 800cc से 1600cc तक की पूरी तरह से बनी हुई मोटरसाइकिलें अब बिना किसी ड्यूटी के भारत में आ सकेंगी। यह एक ऐसी छूट है जिसकी मांग अमेरिका पहले भी कर चुका है, लेकिन तब उसे सफलता नहीं मिली थी।
- 800cc से ज्यादा इंजन वाली महंगी हार्ले-डेविडसन मोटरसाइकिलों पर जो अभी करीब 44% इंपोर्ट ड्यूटी लगती है, वह इस अंतरिम समझौते के तहत खत्म हो जाएगी।
- 3000cc से ज्यादा इंजन वाली गाड़ियों पर लगने वाली 110% की इंपोर्ट ड्यूटी को कुछ निश्चित संख्या में गाड़ियों के लिए घटाकर 50% किया जा सकता है। अगले दस सालों में यह ड्यूटी भी खत्म हो जाएगी।
- इससे टेस्ला और जीप जैसी कंपनियों को फायदा हो सकता है, खासकर तब जब फोर्ड और जनरल मोटर्स जैसी कंपनियां भारत से जा चुकी हैं।
भारतीय कंपनियों पर क्या असर?
इंडस्ट्री से जुड़े के कुछ बड़े लोगों का कहना है कि भारतीय निर्माताओं पर इसका ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि भारतीय कंपनियां इन बड़ी इंजन वाली गाड़ियों के बाजार में ज्यादा सक्रिय नहीं हैं और इनकी बिक्री भी बहुत कम होती है।
भारत में महंगी गाड़ियों की कितनी हिस्सेदारी?
इकनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में हर साल करीब 2 करोड़ दोपहिया वाहन बिकते हैं। इनमें से महंगी मोटरसाइकिलें बहुत कम हैं। ज्यादातर लोग 110cc से 250cc इंजन वाली आम मोटरसाइकिलें खरीदते हैं। हार्ले-डेविडसन ने खुद पिछले वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में 800cc से 1600cc रेंज की सिर्फ 187 पूरी तरह से इंपोर्ट की हुई मोटरसाइकिलें बेचीं। इससे पता चलता है कि यह बाजार कितना छोटा है।

