गुवाहाटी: असम में आस्था के सबसे बड़े तीर्थ मां कामाख्या मंदिर में एक्सेस कॉरिडोर बनने का रास्ता साफ हो गया है। दो साल तक चली कानूनी सुनवाई के बाद गुवाहाटी हाई कोर्ट ने असम सरकार के बड़े प्रोजेक्ट पर लगी सभी रोक हटा दी है। चीफ़ जस्टिस आशुतोष कुमार और जस्टिस अरुण देव चौधरी की एक डिवीज़न बेंच ने सरकार को हिदायत दी है कि कॉरिडोर बनाने के दौरान मंदिर के रीति रिवाज और पारंपरिक धार्मिक कार्यों में रुकावट नहीं आनी चाहिए।क्या है मामला?देश के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों पर तीर्थयात्रियों और सैलानियों की सुविधा के लिए कॉरिडोर बनाए जा रहे हैं। असम सरकार ने भी 2024 में प्रसिद्ध कामख्या मंदिर के आसपास कॉरिडोर बनाने के प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी। टेंडर के बाद यह काम एक कंस्ट्रक्शन फर्म को सौंप दिया गया था। कई सामाजिक संगठनों ने धार्मिक परंपरा का हवाला देते हुए कॉरिडोर के निर्माण पर आपत्ति जताई थी। गीतिका भट्टाचार्य समेत अन्य लोगों ने एक पीआईएल दाखिल किया था, जिसमें आशंका जताई गई थी कंस्ट्रक्शन से पुराने मंदिर को नुकसान हो सकता है और पारंपरिक रीति-रिवाजों में रुकावट आ सकती है।

हाई कोर्ट ने दोनों याचिका पर सुनवाई
दूसरी याचिका में टेंडरिंग प्रोसेस की कानूनी मान्यता को ही चुनौती दी गई थी। पिछले दो सालों तक हाई कोर्ट ने दोनों याचिका पर सुनवाई की। इस दौरान असम सरकार ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि जब तक सभी एनवायरनमेंटल और स्ट्रक्चरल सेफ्टी शर्तें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक कोई काम शुरू नहीं होगा।

कॉरिडोर का निर्माण शुरू करने की अनुमति दी
सरकार की तरफ से बताया गया कि ज़मीन के नीचे पानी के बहाव और पवित्र झरनों से जुड़ी खास चिंताओं को दूर करने के लिए पीडब्ल्यूजी ने आईआईटी गुवाहाटी के साथ पार्टनरशिप की। साथ ही, यह स्पष्ट किया गया कि झरने की सुरक्षा के लिए प्रोजेक्ट में मामूली बदलाव भी किया गया है। राज्य सरकार के हलफनामे के बाद गुवाहाटी हाई कोर्ट की डिविजन बेंच ने कॉरिडोर का निर्माण शुरू करने की अनुमति दे दी।

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