उम्र बढ़ने के साथ आंखों की रोशनी कम होना आम बात मानी जाती है, लेकिन कई बुजुर्गों में नजर कमजोर होने की शुरुआत अंधेरा छाने से नहीं, बल्कि कन्फ्यूजन से होती है। सामने खड़ा इंसान दिखता है, रंग और हलचल भी नजर आती है, लेकिन पहचान नहीं पाते कि वह कौन है। किताब सामने होती है, पर शब्द टूटे-फूटे या टेढ़े-मेढ़े दिखते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक यह समस्या अक्सर Age-related Macular Degeneration (AMD) यानी उम्र से जुड़ी मैक्युला की बीमारी का शुरुआती संकेत हो सकती है।

आंखों के विशेषज्ञ Dr Chilukuri Sharat Babu बताते हैं कि यह बीमारी 50 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में स्थायी अंधेपन का बड़ा कारण बन रही है। खास बात यह है कि इसमें साइड की नजर ठीक रहती है, लेकिन बीच का हिस्सा धीरे-धीरे धुंधला होने लगता है। इसी वजह से कई लोग समझ ही नहीं पाते कि आंखों में समस्या शुरू हो चुकी है।

क्यों होता है ऐसा?

हमारी आंख के रेटिना के बीच में एक छोटा हिस्सा होता है, जिसे मैक्युला कहते हैं। यही हिस्सा हमें चेहरे पहचानने, पढ़ने, गाड़ी चलाने और छोटी-छोटी चीजें साफ देखने में मदद करता है। जब मैक्युला खराब होने लगता है, तो बीच की नजर धुंधली या टेढ़ी दिखाई देने लगती है। कभी-कभी बीच में काला धब्बा भी नजर आ सकता है। लेकिन साइड की नजर ठीक रहती है, इसलिए लोगों को लगता है कि सब सामान्य है।

चेहरे पहचानने और पढ़ने में परेशानी

इस बीमारी में चेहरे के बारीक फीचर साफ नहीं दिखते। कई बार मरीज अपने जानने वालों को पहचान नहीं पाते, जब तक वे बोल न दें। पढ़ने में भी दिक्कत होती है, अक्षर गायब लगते हैं, लाइनें टेढ़ी दिखती हैं या शब्द टूटे हुए नजर आते हैं। कई लोग बार-बार चश्मा बदलते रहते हैं, जबकि असली समस्या आंख के अंदर होती है।

शुरुआत में क्यों नहीं पकड़ में आती?

AMD दर्द नहीं देती और धीरे-धीरे बढ़ती है। क्योंकि साइड की नजर ठीक रहती है, लोग सोचते हैं कि यह सिर्फ उम्र या थकान का असर है। इसी वजह से इलाज में देरी हो जाती है।

रोजमर्रा की जिंदगी पर असर

बीमारी बढ़ने पर पढ़ना, बिल देखना, साइन करना या गाड़ी चलाना मुश्किल हो सकता है। लोगों से मिलना-जुलना भी कम हो जाता है क्योंकि चेहरे पहचानना कठिन हो जाता है। इससे आत्मविश्वास और स्वतंत्रता दोनों प्रभावित होते हैं।

बचाव और जांच क्यों जरूरी?

50 साल के बाद आंखों की नियमित जांच बेहद जरूरी है। खास टेस्ट से बीमारी जल्दी पकड़ी जा सकती है। समय रहते इलाज और इंजेक्शन से बीमारी की रफ्तार धीमी की जा सकती है। इसके अलावा धूम्रपान से बचना, ब्लड प्रेशर और शुगर कंट्रोल रखना, पौष्टिक खाना और नियमित जांच कराना बहुत जरूरी है। अगर आपको दिखता सब है, लेकिन पहचानने में दिक्कत हो रही है, तो इसे नजरअंदाज न करें। समय पर जांच आपकी नजर बचा सकती है।

Disclaimer: इस खबर में दी गई स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं.

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