भोपाल : मध्य प्रदेश बजट में इस बार किसानों को केंद्र में रखकर कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गईं। वित्त मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार का लक्ष्य खेती को घाटे का सौदा नहीं, बल्कि लाभ का धंधा बनाना है। इसी सोच के साथ किसानों को सीधी आर्थिक सहायता और आधुनिक संसाधनों से जोड़ने पर जोर दिया गया है।
12 हजार रुपए सालाना की सीधी मदद
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना और मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के संयुक्त लाभ से प्रदेश के किसान परिवारों को प्रति वर्ष कुल 12 हजार रुपए की नकद सहायता मिल रही है। इस राशि में केंद्र सरकार की ओर से 6 हजार रुपए और राज्य सरकार की ओर से 6 हजार रुपए दिए जाते हैं। पैसा सीधे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर होता है, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है और बिचौलियों की भूमिका समाप्त होती है। छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह सहायता खाद, बीज और कृषि आदानों की खरीद में बड़ी राहत साबित हो रही है। समय पर नकद राशि मिलने से खेती की तैयारी सुचारू रूप से हो पा रही है और कर्ज का बोझ भी कम हो रहा है।
3000 करोड़ से 1 लाख सोलर पंप
किसानों को सिंचाई सुविधा सुलभ कराने और बिजली खर्च कम करने के लिए सरकार ने 3000 करोड़ रुपए की लागत से 1 लाख सोलर पंप उपलब्ध कराने का ऐलान किया है। सोलर पंप के जरिए किसान दिन के समय निर्बाध सिंचाई कर सकेंगे। इससे डीजल और बिजली पर निर्भरता कम होगी, लागत घटेगी और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। लंबे समय में यह कदम किसानों की आय बढ़ाने में सहायक माना जा रहा है।
खेती को लाभकारी बनाने की दिशा में कदम
सरकार का फोकस स्पष्ट है—किसानों की आय में स्थायी वृद्धि। प्रत्यक्ष नकद सहायता, आधुनिक सिंचाई संसाधन और ऊर्जा बचत जैसे कदम कृषि क्षेत्र को आत्मनिर्भर और मजबूत बनाने की दिशा में अहम साबित होंगे। मध्य प्रदेश बजट में किए गए ये ऐलान ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देने और किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
मत्स्य पालन क्षेत्र के लिए 412 करोड़ का फंड
बजट में नीली क्रांति को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में 412 करोड़ के निवेश का प्रावधान किया है। वित्त मंत्री ने कहा कि इससे न सिर्फ मत्स्य पालकों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था में भी इस सेक्टर की हिस्सेदारी बढ़ेगी।

