भारतीय सेना का सबसे एलीट यूनिट होती है पैरा स्पेशल फोर्सेस। इस पैरा स्पेशल फोर्स में बलिदान बैज पाना सेना के हर एक अफसर का सपना होता है। मेजर दीक्षा सी मुदादेवन्नावर ऐसी ही महिला अफसर बनी हैं। उन्हें स्पेशल फोर्सेज का बलिदान बैज मिला है। यह इतिहास में पहली बार है, जब किसी महिला ऑफिसर को यह बलिदान बैज मिला है। यह बैज अटूट देशभक्ति और त्याग का टैग माना जाता है।
मेजर दीक्षा सी मूलता कर्नाटक के दावणगेरे की रहने वाली हैं। सेना में उनके सफर का जुनून स्कूल के दिनों से ही शुरू हो गया था। दीक्षा ने स्कूल में एनसीसी जॉइन की। इस दौरान उन्होंने एनसीसी के अलग-अलग लेवल में हिस्सा लिया। ड्रिल, कैंप और कम्युनिटी सर्विस के जरिए उन्होंने टीम वर्क, सहनशक्ति और स्ट्रेटजिक सोच में स्किल को बेहतर बनाया।
मेजर दीक्षा सी. मुदादेवन्नावर ने JJMMC दावणगेरे से एमबीबीएस की पढ़ाई की है। उन्हें भारतीय सेना में शॉर्ट सर्विस कमीशन मिला। वह भारतीय सेना में मेडिकल ऑफिसर बनीं। CET-K 2012 में उनकी ऑल इंडिया 596वीं रैंक थी। सेना जॉइन करने से पहले उन्होंने संथेबेन्नूर के स्वास्थ्य केंद्र में कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर के तौर पर ग्रामीण इलाके में मरीजों का इलाज किया। यहां से एमडी में सलेक्शन हुआ और गडग इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में जनरल सर्जरी डिपार्टमेंट में जूनियर रेजिडेंट के तौर पर काम किया
पैरा स्पेशल फोर्सेज की मेजर दीक्षा सी आर्मी मेडिकल कोर में डॉक्टर हैं। सेना में शॉर्ट सर्विस कमीशन के बाद दीक्षा ने लखनऊ के आर्मी मेडिकल कोर में कठिन ट्रेनिंग ली। यहां उन्होंने मेडिकल ऑफिसर्स बेसिक कोर्स (MOBC) भी पूरा किया। दीक्षा को मिले बलिदान बैज का सम्मान न केवल उनके असाधारण समर्पण और दृढ़ता का प्रतीक है।
मेजर दीक्षा का रास्ता बाधाओं से भरा था। प्रारंभिक प्रशिक्षण के बाद उन्हें लेह के तांगत्से में स्थित 303 फील्ड अस्पताल में तैनात किया गया। हालांकि, विशिष्ट पैराशूट रेजिमेंट में शामिल होने की उनकी महत्वाकांक्षा को कई झटके लगे। शारीरिक अक्षमताओं के कारण वह दो बार रिजेक्ट हो गईं लेकिन उनके अटूट हौसले और दृढ़ संकल्प ने उन्हें चयन प्रक्रिया में पुनः प्रयास करने के लिए प्रेरित किया। उनके कमांडिंग ऑफिसर कर्नल शिवेश सिंह ने उन्हें दृढ़ रहने के लिए प्रेरित किया। उनकी लगन रंग लाई जब उन्होंने कठिन चयन प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की। दिसंबर 2022 में स्पेशल फोर्सेज में शामिल हुईं।
मेडिकल ऑफिसर के रूप में, मेजर दीक्षा की जिम्मेदारियों में विशेष अभियानों के दौरान महत्वपूर्ण चिकित्सा सहायता प्रदान करना शामिल था। उनके प्रशिक्षण ने उन्हें विशेष बलों के सैनिकों के साथ मिलकर काम करने का अवसर दिया, जिससे वे जोखिम भरे वातावरण में चिकित्सा आपात स्थितियों को संभालने के लिए तैयार हुईं। यह भूमिका महत्वपूर्ण है, क्योंकि अभियानों की सफलता अक्सर तत्काल चिकित्सा देखभाल की उपलब्धता पर निर्भर करती है।
मेजर दीक्षा को ऑपरेशन दोस्त के तहत तुर्की में तैनात किया गया। वहां उन्होंने विनाशकारी भूकंप के बाद राहत कार्य में सहायता प्रदान की। संकट की स्थितियों में चिकित्सा सहायता प्रदान की। मेजर दीक्षा सी सेना में अफसर के साथ एक भरतनाट्यम डांसर भी हैं। वह कराटे में एक्सपर्ट हैं और बाइक राइडर भी हैं। वह एक एनजीओ निर्भया में वॉलंटियर भी हैं।

