नई दिल्ली – फिल्म अभिनेता मनोज बाजपेयी की प्रस्तावित फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ को लेकर चल रहे विवाद के बीच निर्माता नीरज पांडे ने सुप्रीम कोर्ट में अपना हलफनामा दाखिल किया है। उन्होंने अदालत को बताया कि फिल्म का विवादित शीर्षक और उससे जुड़ी प्रचार सामग्री वापस ले ली गई है तथा नया शीर्षक अभी तय नहीं किया गया है।
निर्माता की ओर से दायर हलफनामे को रिकॉर्ड में लेते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने फिल्म के खिलाफ दायर याचिका का निपटारा कर दिया।
धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोपों का खंडन
हलफनामे में नीरज पांडे ने स्पष्ट किया कि फिल्म किसी भी धर्म, समुदाय या नागरिक की धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाती। उन्होंने कहा कि न तो उनका और न ही उनके प्रोडक्शन हाउस का किसी भी समुदाय का अपमान करने का कोई दुर्भावनापूर्ण इरादा था। फिल्म को एक काल्पनिक पुलिस ड्रामा बताया गया है, जो एक आपराधिक जांच पर आधारित है और किसी जाति या धर्म को भ्रष्ट के रूप में प्रस्तुत नहीं करती।
प्रचार सामग्री पहले ही वापस
निर्माता ने बताया कि 6 फरवरी को ही जनता की आपत्तियों को ध्यान में रखते हुए फिल्म से संबंधित सभी प्रचार सामग्री वापस ले ली गई थी। साथ ही यह भी आश्वासन दिया गया कि भविष्य में रखा जाने वाला नया शीर्षक पुराने शीर्षक से मिलता-जुलता नहीं होगा।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद कदम
गौरतलब है कि 12 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुयान शामिल थे, ने शीर्षक को लेकर निर्माताओं को कड़ी फटकार लगाई थी। अदालत ने कहा था कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उपयोग किसी वर्ग को बदनाम करने के लाइसेंस के रूप में नहीं किया जा सकता और शीर्षक बदले बिना फिल्म की रिलीज की अनुमति नहीं दी जाएगी।
याचिका में क्या था आरोप
यह याचिका ब्राह्मण समाज ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय संगठन सचिव अतुल मिश्रा द्वारा दायर की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि फिल्म का शीर्षक और कथानक जाति एवं धर्म आधारित रूढ़ियों को बढ़ावा देता है तथा ब्राह्मण समुदाय की गरिमा को ठेस पहुंचाता है।
अब शीर्षक वापस लिए जाने के बाद मामले का पटाक्षेप हो गया है, जबकि फिल्म का नया नाम जल्द घोषित किए जाने की संभावना है।

