भिवंडी महानगरपालिका में मेयर पद के चुनाव में कांग्रेस और बीजेपी, दो विरोधी दल, साथ आ गए हैं. कांग्रेस ने बीजेपी उम्मीदवार स्नेहा पाटील को समर्थन देने की घोषणा की है.
महाराष्ट्र की भिवंडी में अलग ही सियासत शुरू हो गई है. भिवंडी महानगरपालिका में कुछ ऐसा हुआ है जो महाराष्ट्र की राजनीति में पहले कभी नहीं हुआ था. यहां पर मेयर पद का चयन करने के लिए दो बड़े विरोधी दल कांग्रेस और बीजेपी साथ आ गए हैं.
दरअसल, भिवंडी मेयर पद के बीजेपी उम्मीदवार को कांग्रेस ने समर्थन दिया है. इसके लिए पार्टी ने पत्र लिखकर बाकायदा आधिकारिक रूप से अपने समर्थन का ऐलान किया. बीजेपी ने फैसला लिया है कि वह मेयर के लिए सेक्युलर उम्मीदवार के साथ जाएगी. इसलिए पद के लिए स्नेहा पाटील का नाम दिया गया है.
बता दें, पहले बीजेपी के उम्मीदवार नारायण चौधरी थे, लेकिन अब नया नाम स्नेहा पाटील का है. कांग्रेस ने बीजेपी के उम्मीदवार को समर्थन दिया है. लोकसभा सांसद अनिल देसाई ने एबीपी न्यूज से बात करते हुए इस सियासी घटनाक्रम को आश्चर्यजनक बताया था.
एकनाथ शिंदे के खिलाफ BJP की साजिश?
अब सवाल उठता है कि क्या भिवंडी की सत्ता से एकनाथ शिंदे को दूर करने के लिए बीजेपी ने कोई नई चाल चली है? दरअसल, एकनाथ शिंदे की शिवसेना महायुति का सहयोगी दल है और बीजेपी के साथ महाराष्ट्र की सत्ता पर काबिज है. हालांकि, लोकल चुनाव में कहीं सहयोगी दुश्मन तो कहीं दुश्मन भी दोस्त हो जाते हैं. भिवंडी में भी कुछ ऐसा ही होता दिख रहा है.
भिवंडी महानगरपालिका चुनाव के नतीजे
महाराष्ट्र में 29 महानगरपालिका के चुनाव 15 जनवरी को हुए थे, जबकि नतीजे 16 जनवरी को घोषित किए गए थे. भिवंडी-निजामपुर महानगरपालिका के चुनाव में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था. कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और इस पार्टी को सबसे अधिक 30 सीटें मिली थीं. उसके बाद बीजेपी को 22 सीटें मिलीं.
एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना को 12, शरद पवार गुट की एनसीपी-एसपी 12, समाजवादी पार्टी को 6, कोनार्क विकास अघाड़ी को 4 और भिवंडी विकास अघाड़ी को 3 सीटों पर जीत मिली थी. यहां एक निर्दलीय उम्मीदवार को भी जीत हासिल हुई थी.

