नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी कांग्रेस इन दिनों चुनाव प्रकिया पर लगातार सवाल उठा रही है. कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी लगातार चुनाव आयोग (EC) पर सवाल उठा रहे हैं. उन्होंने तो ‘वोट चोरी’ का कैंपेन ही अलग से चला रखा है. कांग्रेस के कई नेता फिर से बैलट पेपर से चुनाव कराने की मांग रखते रहे हैं. हालांकि टेकनोलॉजी की इस नई दौड़ में बैलट पेपर से चुनाव कराने को लेकर कई राजनेताओं ने कांग्रेस की आलोचना भी की है. इस बीच अब कांग्रेस के भीतर ही बैलट पेपर से चुनाव कराने को लेकर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं. देशभर में ईवीएम को लेकर सवाल उठाने वाली कांग्रेस अब अपने ही फैसले से घिरती नजर आ रही है. कर्नाटक में स्थानीय निकाय चुनाव बैलट पेपर से कराने के फैसले ने पार्टी के अंदर नई दरार पैदा कर दी है.
एक तरफ पार्टी नेतृत्व वोटिंग सिस्टम की विश्वसनीयता बढ़ाने का दावा कर रहा है, तो दूसरी ओर पार्टी के ही नेता इसे पीछे की ओर बढ़ने वाला कदम बता रहे हैं. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार सिद्धारमैया सरकार के फैसले से कांग्रेस दो खेमों में बंटती दिख रही है. इससे विपक्ष को भी हमला करने का मौका मिल गया है और चुनावी राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है.

