अहमदाबाद: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इजरायल दौरे से लौटने के बाद गुजरात के साणंद में सेमीकंडक्टर प्लांट का उद्घाटन करेंगे। अहमदाबाद में आने वाले साणंद में माइक्रोन टेक्नोलॉजी के अत्याधुनिक एटीएमपी (असेम्बली, टेस्टिंग, मार्किंग एवं पैकेजिंग) प्लांट बनकर तैयार हो चुका है। पीएम मोदी अपने दौरे में माइक्रोन सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी इंडिया प्रा. लिमिटेड के प्लांट को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। इस प्रोजेक्ट के लिए 22,516 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। गुजरात में माइक्रोन की एटीएमपी सुविधा के शुरू होने से भारत में सेमीकंडक्टर क्षेत्र में नई क्रांति का शुभारंभ होगा। माइक्रोन के साणंद स्थित प्लांट में 2000 लोगों की टीम काम करेगी। इसमें दिव्यांग भी शामिल हैं। साणंद के इस प्लांट में साणंद के प्लांट में एसएसडी तथा रैम प्रकार के स्टोरेज और मेमोरी उपकरण बनेंगे।

साणंद प्लांट की क्या है अहमियत

माइक्रोन टेक्नोलॉजी के अध्यक्ष तथा सीईओ संजय मेहरोत्रा ने कहा कि वर्तमान टेक्नोलॉजी और खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) में मेमोरी एवं स्टोरेज बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि मजबूत मेमोरी तथा स्टोरेज सपोर्ट के बिना एआई प्रणालियां उचित ढंग से कार्य नहीं कर पाती हैं। जैसे-जैसे एआई अधिक तेज एवं रियल-टाइम रिस्पॉन्स देना शुरू करता है, वैसे-वैसे उसे अधिक तथा और अत्याधुनिक मेमोरी की जरूरत पड़ती है। ऐसे में साणंद प्लांट गेमचेंजर साबित होगा।

एटीएमपी प्लांट में कैसे होता है काम?

एटीएमपी प्लांट का कार्य वेफर चिप्स से शुरू होता है। सबसे पहले हम ये समझें कि एटीएमपी सविधा तक पहुंचने से पहले ये चिप्स किस तरह बनती हैं। सेमीकंडक्टर चिप बनाने की प्रक्रिया रेत (सैंड) से शुरू होती है। सबसे पहले रेत से प्योर सिलिकॉन को अलग किया जाता है। इस सिलिकॉन को पिघलाकर उसका सिलेंडर बनाया जाता है, जिसे इनगोट कहा जाता है। इस सिलेंडर को काटकर उसमें से सूक्ष्म प्लेट्स बनाई जाती हैं, जिसे वेफर्स कहा जाता है। इसके बाद फैब्रिकेशन प्लांट में इन वेफर्स पर इलेक्ट्रिक पैटर्न प्रिंट किया जाता है और कई आवरण (लेयर्स) उस पर चढ़ाए जाते हैं। इन आवरणों को फोटोलिथोग्राफी द्वारा उचित ढंग से नियोजित करने से वेफर्स पर ट्रांजिस्टर्स बनते हैं। इसके द्वारा वेफर्स पर मेमोरी बनती है और इन वेफर्स में मेमोरी चिप लगाई जाती है। इसके बाद वेफर्स के छोटे चौकोर टुकड़े किए जाते हैं, जिसे चिप कहा जाता है।

MTMP प्लांट में ही होती है टेस्टिंग

यह चिप इसके बाद एटीएमपी प्लांट में पहुंचती है। यहां पहले उसे असेंबल किया जाता है। इसके बाद टेस्टिंग के चरण में उसकी स्पीड, मेमोरी तथा कार्य की संपूर्ण टेस्टिंग की जाती है। इसके बाद उसकी विवरणबद्ध मार्किंग कर अंत में उसकी पैकेजिंग की जाती है, जिससे वह मार्केट में पहुंच सके। साणंद प्लांट में विश्वभर के मार्केट के अनुरूप इंटीग्रेटेड सर्किट पैकेज, मॉड्यूल तथा सॉलिड स्टेट ड्राइव्स का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए माइक्रोन की वैश्विक फैक्ट्रियों में निर्मित अत्याधुनिक डीआरएएम तथा एनएनडी वेफर्स मिलाकर उन्हें फाइनल मेमोरी उत्पादों में परिवर्तित किया जाएगा। साणंद प्लांट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के मिशन को और आगे लेकर जाएगा।

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