प्रधानमंत्री मोदी ने जैसे ही इजरायल की संसद को संबोधित किया, वह प्रथम भारतीय प्रधानमंत्री बन गए, लेकिन 18 देशों की संसद को संबोधित करने वाले वह एकमात्र प्रधानमंत्री हैं। यह किसी की व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की ताकत है। प्रधानमंत्री के जरिए भारत का सम्मान और कीर्तिमान सामने आया है। भारत विश्व की एक महाशक्ति है, सबसे तेज विकसित होती अर्थव्यवस्था है और सबसे विशाल, सशक्त लोकतंत्र है। यह इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने भी माना और ज्ञापित किया है। प्रधानमंत्री मोदी ऐसे देश में दोबारा गए, जिसे 10 अरब देश मान्यता ही नहीं देते, लेकिन किसी भी मुस्लिम देश ने प्रधानमंत्री मोदी के दौरे का घोषित विरोध नहीं किया। वैसे भारत में भी वामपंथी किस्म की ताकतें चिलचिलाती रही हैं कि इजरायल की मान्यता रद्द करें। इजरायल को भारत ने मान्यता 1992 में तब दी थी, जब केंद्र में कांग्रेस की पीवी नरसिम्हा राव सरकार थी और कुछ वामपंथी सांसद भी उस अल्पमत सरकार को समर्थन दे रहे थे। बहरहाल महत्वपूर्ण सवाल यह है कि करीब 1.20 करोड़ की आबादी वाला इजरायल, मेघालय राज्य के लगभग बराबर, 147 करोड़ से अधिक की सर्वाधिक आबादी वाले भारत के लिए इतना जरूरी और रणनीतिक साझेदार क्यों है? क्योंकि नवाचार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, एआई, साइबर सुरक्षा, हाईटेक विनिर्माण, सेवाओं, रेगिस्तान में खेती, पानी प्रौद्योगिकी और रक्षा सहयोग के संदर्भ में इजरायल भी भारत का आजमाया हुआ मित्र-देश है। वह भारत को ‘हैरोन ड्रोन’ देगा, जो 35,000 फुट की ऊंचाई पर लगातार 45 घंटे तक और 470 किग्रा सामान लेकर उडऩे में सक्षम है। इजरायल ड्रोन प्रौद्योगिकी का ‘मास्टर देश’ है। वह नवाचार का भी ‘पॉवरहाउस’ है। उसने कृषि में क्रांति की है और वह ‘आयरन डोम’ वायु रक्षा प्रणाली वाला देश है, जिसकी सफलता-दर 90 फीसदी के करीब है।

खुफियागीरी में ‘मोसाद’ के कारनामे अद्वितीय हैं। राजधानी दिल्ली से आधे से भी छोटा देश और भारत का तीसरा सबसे बड़ा रक्षा-सहयोगी और रणनीतिकार देश..! सबसे अधिक 36 फीसदी रक्षा उत्पाद और हथियार आदि रूस और 33 फीसदी फ्रांस हमें सप्लाई करते हैं, लेकिन 13 फीसदी का योगदान इजरायल का भी है। ‘आयरन डोम’ ऐसा सिस्टम है, जो इजरायल ने सिर्फ अमरीका को ही दिया है और अब भारत को मुहैया करा सकता है। दोनों देशों के बीच रक्षा और व्यापार समझौतों की घोषणा में स्पष्ट हो जाएगा कि इजरायल हमें किन आधारों पर ‘आयरन डोम’ देगा। वाकई यह भारत-इजरायल की ‘आयरन डोम’ दोस्ती और भाईचारे का नया अध्याय है। दोनों देशों के संबंध 2000 साल पुराने हैं। इसका प्रधानमंत्री मोदी ने उल्लेख किया है और इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने भी कहा है कि दोनों प्राचीन सभ्यताओं वाले देश हैं। भारत यहूदियों का अपना ‘घर’ है। भारत के प्रमुख शहरों में यहूदी बसे हुए हैं। प्रताडऩा या शोषण अथवा हिंसा का कोई भी प्रमुख मामला सामने नहीं है। बल्कि भारत में इजरायल के सबसे अधिक स्टार्टअप सक्रिय हैं और भारत सरकार भी उनकी मदद कर रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देशों को आतंकवाद से पीडि़त माना और मुंबई के 26/11 आतंकी हमले और इजरायल में 7 अक्तूबर, 2023 को हमास के नरसंहार को एकसमान करार दिया। हमास नरसंहार की निंदा की। प्रधानमंत्री ने इजरायली संसद के मंच से कहा कि नागरिकों की हत्या किसी भी तरह न्यायसंगत नहीं है। बहरहाल भारत-इजरायल की ‘आयरन डोम’ दोस्ती और साझेदारी परवान चढ़ रही है।

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