हाल ही में निजी चार्टर विमानन कंपनियों से जुड़ी विमान दुर्घटनाओं ने पूरे देश को झकझोर दिया है। महाराष्ट्र के बारामती में 28 जनवरी, 2026 को एक निजी चार्टर कंपनी के लीअरजैट क्रैश में 5 लोगों की मौत, जिसमें उप-मुख्यमंत्री अजित पवार शामिल थे, ने निजी चार्टर क्षेत्र की कमियों को उजागर कर दिया है। इसी तरह कुछ दिन पहले झारखंड में एयर एम्बुलैंस क्रैश और अंडेमान में हैलीकॉप्टर हादसे ने भी कई सवाल खड़े किए हैं कि आखिर नॉन-शैड्यूल्ड ऑप्रेटर्स परमिट (एन.एस.ओ.पी.) धारक कंपनियां सुरक्षा मानकों की अनदेखी क्यों कर रही हैं?
डी.जी.सी.ए. के ऑडिट में पाया गया कि एक निजी चार्टर कंपनी में एयरवर्दिनैस, फ्लाइट ऑप्रेशंस और मैंटेनैंस में गंभीर उल्लंघन थे, जिसके चलते 4 विमान ग्राऊंड कर दिए गए। गौरतलब है कि पिछले एक दशक में 20 से अधिक दुर्घटनाएं एन.एस.ओ.पी. ऑपरेटर्स से जुड़ी पाई गईं, जिनकी मुख्य वजहें स्टैंडर्ड ऑप्रेटिंग प्रोसीजर्स का पालन न करना, अपर्याप्त फ्लाइट प्लानिंग और ट्रेनिंग की कमी रही हैं। उल्लेखनीय है कि प्राइवेट चार्टर कंपनियों द्वारा पुराने विमानों का रखरखाव न करना, फ्यूल लॉग्स में हेरफेर और अनधिकृत उड़ानें आम हैं। जाहिर सी बात है कि ऐसी खामियां व्यावसायिक दबाव के कारण ही होती हैं।
अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (आई.सी.ए.ओ.) संयुक्त राष्ट्र की एक एजैंसी है, जो 193 देशों को आपसी सहयोग और सांझे हवाई परिवहन के माध्यम से पारस्परिक लाभ प्राप्त करने में मदद करती है। भारत में भी निजी चार्टर कंपनियां आई.सी.ए.ओ. और डी.जी.सी.ए. दिशा-निर्देशों पर आधारित हैं। लेकिन अफसोस की बात है कि इनका पूर्ण अनुपालन नहीं होता, क्योंकि इस क्षेत्र में काफी विविधता है, कॉर्पोरेट ट्रैवल से लेकर पर्यटन तक। ऑप्रेटर्स न्यूनतम अनुपालन पर ही टिके रहते हैं, जबकि इन कंपनियों से भी शैड्यूल्ड एयरलाइंस जैसे उच्च मानक अपेक्षित हैं। देखा गया है कि डी.जी.सी.ए. की कमजोर निगरानी के कारण निजी चार्टर ऑप्रेटर्स स्टैंडर्ड ऑप्रेटिंग प्रोसीजर्स को बड़े आराम से नजरअंदाज कर देते हैं, खासकर घने कोहरे या खराब मौसम में।
जानकारों की मानें तो डी.जी.सी.ए. में बढ़ता हुआ भ्रष्टाचार सुरक्षा मानदंडों को कमजोर कर रहा है। हाल ही में कैप्टन अनिल गिल जैसे वरिष्ठ अधिकारी पर उड़ान प्रशिक्षण संगठनों (एफ.टी.ओका) से रिश्वत लेने के आरोप लगे, जिसमें विमान सस्ते में लेना और ऑडिट में छूट देना शामिल था। पुराने मामलों में भी ज्वायंट डायरैक्टर जनरल के पदों पर तैनात अधिकारियों पर फ्लाइंग स्कूलों को अनियमित एक्सटैंशन देने के आरोप सिद्ध हुए। यह भ्रष्टाचार सुरक्षा उल्लंघनों को बढ़ावा देता है, क्योंकि ऑप्रेटर्स रिश्वत देकर मानक टाल देते हैं, जिससे विमान यात्रा और यात्रियों की सुरक्षा खतरे में पड़ जाती है।
गौरतलब है कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अधीन डी.जी.सी.ए. में 50 प्रतिशत से अधिक स्टाफ की कमी है। डी.जी.सी.ए. में 1630 पदों में से केवल 829 ही भरे हैं। इनमें एयरवॢदनैस विंग में 44 और एयर सेफ्टी विंग में 30 वैकेंसी हैं। इन सबका कारण स्पष्ट है, स्वायत्तता की कमी, जो निर्णय लेने में देरी करती है। वहीं संघ लोक सेवा आयोग व स्टाफ सिलैक्शन कमीशन द्वारा भर्ती में देरी, आकर्षक वेतन का न होना और विशेषज्ञ पायलट/इंस्पैक्टर्स का न मिलना भी एक अहम कारण है। दूसरी ओर कॉन्ट्रैक्ट स्टाफ पर निर्भरता जवाबदेही को घटाती है, जिससे निगरानी कमजोर पड़ती है।
विदेशों की तरह भारत में भी निजी चार्टर क्षेत्र को सुरक्षित बनाने के लिए ‘जीरो टॉलरैंस’ नीति अपनानी होगी। हाल ही के हादसों के बाद डी.जी.सी.ए. ने कमर कसी और एन.एस.ओ.पी. ऑप्रेटर्स के लिए नई गाइडलाइंस जारी की हैं। जैसे कि वैबसाइट पर विमान, पायलट डिटेल्स और सेफ्टी रैंकिंग अनिवार्य करना, कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर/फ्लाइट डाटा का ऑडिट बढ़ाना, पायलटों को सुरक्षा आधार पर फ्लाइट कैंसल करने का पूर्ण अधिकार देना। पुराने विमानों पर सख्त जांच करना, मैनेजमैंट की व्यक्तिगत जिम्मेदारी और लाइसैंस सस्पैंशन जैसे कदम उठाना। मानकीकृत नियमों को एयरलाइंस स्तर का बनाना, फ्लाइट डाटा मॉनीटरिंग अनिवार्य करना। यह ‘कड़े’ नियम यदि सख्ती से लागू किए जाएं तो शायद ही कोई निजी चार्टर कंपनी इस क्षेत्र में बनी रह पाएगी।
सोचें, यदि किसी विमान हादसे या विमान कंपनी द्वारा की गई अनियमितता की जांच डी.जी.सी.ए. का कोई ऐसा अधिकारी करे, जिसे प्रशासन चलाने का अनुभव तो हो, परंतु एविएशन उद्योग का अनुभव न के बराबर हो। जो व्यक्ति किसी अन्य मंत्रालय से स्थानांतरण हो कर आया हो वह इस संवेदनशील क्षेत्र के बारे में क्या ही जानता होगा? नतीजतन योग्यता के ऊपर भ्रष्टाचार हावी हो जाएगा। इसलिए सरकार को इस बात पर विचार करना चाहिए कि डी.जी.सी.ए. को स्वायत्त भर्ती अधिकार दिए जाएं। विशेषज्ञों के लिए बाजार-आधारित वेतन और ट्रेङ्क्षनग प्रदान की जाए। भ्रष्टाचार रोकने के लिए सी.बी.आई. जैसी एजैंसियों से सतत जांच और व्हिसलब्लोअर की सुरक्षा सुनिश्चित करें। सरकार, डी.जी.सी.ए. और ऑप्रेटर्स मिलकर सुधार करें तो ही यात्रियों का भरोसा बहाल हो सकेगा। भ्रष्टाचार मुक्त, विशेषज्ञों से लैस डी.जी.सी.ए. और कड़े अनुपालन से नागरिक उड्डयन क्षेत्र सुरक्षित बनेगा। समय रहते कदम उठाएं, वरना और हादसे होंगे और पूरी दुनिया के आगे भारत शर्मसार होता रहेगा।-रजनीश कपूर

