Rajya Sabha Election: हिमाचल प्रदेश में राज्यसभा की एक सीट के लिए सियासी बिसात बिछ चुकी है। कांग्रेस पार्टी के भीतर उम्मीदवारों के चयन को लेकर मन्थन अपने चरम पर है। सूत्रों के अनुसार, हाईकमान के पास पहुंची संभावित नामों की सूची में अब राष्ट्रीय प्रवक्ताओं की एंट्री ने मुकाबला ‘हिमाचली बनाम बाहरी’ बना दिया है। पार्टी के भीतर इस बात को लेकर खासी चर्चा है कि क्या कांग्रेस किसी स्थानीय चेहरे पर दांव खेलेगी या दिल्ली से किसी दिग्गज को शिमला के रास्ते संसद भेजेगी।
कौन है रेस में सबसे आगे?
कांग्रेस के गलियारों में चर्चा है कि दिल्ली से दो तेज-तर्रार प्रवक्ताओं के नाम पैनल में जुड़ गए हैं:
- सुप्रिया श्रीनेत: अपनी प्रखर बयानबाजी के लिए चर्चित राष्ट्रीय प्रवक्ता।
- पवन खेड़ा: पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ता, जिनकी राष्ट्रीय राजनीति में मजबूत पकड़ है।
- रजनी पाटिल: हिमाचल कांग्रेस की प्रभारी, जिनका नाम पहले से ही चर्चाओं में बना हुआ है।
वहीं, प्रदेश कांग्रेस के अधिकांश विधायकों और नेताओं का मानना है कि राज्यसभा के लिए किसी स्थानीय (हिमाचली) नेता को ही प्राथमिकता दी जानी चाहिए। स्थानीय दावेदारों में ये नाम प्रमुख हैं:
- पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा और प्रदेशाध्यक्ष प्रतिभा सिंह।
- स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल और पूर्व मंत्री आशा कुमारी।
- सीएम के आईटी सलाहकार गोकुल बुटेल और एडवोकेट जनरल अनूप रत्न।
5 मार्च का दिन है ‘सुपर थर्सडे’
संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने 5 मार्च को कांग्रेस विधायक दल की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। इसी दिन राज्यसभा प्रत्याशी के नाम पर अंतिम मुहर लगेगी और नामांकन पत्र दाखिल किया जाएगा। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने गेंद हाईकमान के पाले में डाल दी है, हालांकि उन्होंने विधायकों की ‘लोकल उम्मीदवार’ वाली भावना से शीर्ष नेतृत्व को अवगत करा दिया है।

