चेन्नई : इस साल तमिलनाडु में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश की राजनीति में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने अपने सहयोगियों के साथ गठबंधन को मजबूत कर लिया है, जबकि मुख्य विपक्षी दल ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) अंदरूनी संकटों से जूझ रहा है। इसी बीच, दक्षिण के अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम की सक्रियता ने चुनावी समीकरणों को और रोचक बना दिया है। इन हालातों में तमिलनाडु की द्विध्रुवीय राजनीति अब त्रिकोणीय मुकाबले की ओर बढ़ती दिख रही है।
DMK-कांग्रेस गठबंधन
चुनाव से पहले DMK ने अपने गठबंधन को मजबूत करते हुए कांग्रेस के साथ सीट बंटवारे को मूर्त रूप दिया। समझौते के तहत कांग्रेस 28 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी। इसके अलावा, कांग्रेस को राज्यसभा की भी एक सीट मिलेगी। पिछले विधानसभा चुनाव में DMK 173 सीटों पर चुनाव लड़कर 133 सीटें जीती थीं। कांग्रेस ने DMK के साथ गठबंधन में 25 सीटों पर चुनाव लड़ा और 18 पर उसके प्रत्याशी जीते। इस बार कांग्रेस को 28 सीटें देकर DMK बता रही है कि वह सहयोगियों को साथ लेकर चलने की रणनीति पर काम कर रही है।
चुनाव से पहले देसिया मुरपोक्कु द्रविड़ कड़गम (DMDK) ने भी DMK के नेतृत्व वाले सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस में शामिल होने का फैसला किया। DMDK का यह कदम विपक्षी खेमे के लिए झटका माना जा रहा है। यह पार्टी इससे पहले कई बार विपक्षी गठबंधनों के साथ रही है और कुछ क्षेत्रों में उसका सीमित लेकिन प्रभावी जनाधार माना जाता है। DMDK के साथ आने से DMK की ताकत और बढ़ सकती है।
AIADMK में असंतोष
दूसरी ओर, AIADMK लगातार राजनीतिक अस्थिरता से गुजर रही है। पार्टी के महासचिव एडप्पाडी के. पलानीस्वामी के नेतृत्व पर पार्टी के अंदरखाने में असंतोष है। पूर्व मुख्यमंत्री ओ. पन्नीरसेल्वम का DMK के साथ जाना पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। इसके अलावा दिवंगत मुख्यमंत्री जे. जयललिता की करीबी सहयोगी वी के शशिकला ने नई पार्टी बनाकर चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। ध्यान देने वाली बात है कि लगातार तीन चुनाव हारने के बाद पहले से दबाव में चल रही AIADMK के लिए यह घटनाक्रम संगठनात्मक चुनौती को और बढ़ा सकते हैं।
विजय की लोकप्रियता
तमिल फिल्मों के लोकप्रिय अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम पहली बार विधानसभा चुनाव में उतरने की तैयारी कर रही है। हालांकि, पार्टी अभी पूरी तरह मजबूत नहीं मानी जा रही, लेकिन विजय की लोकप्रियता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सोशल मीडिया, शहरी युवाओं और पहली बार वोट देने वाले मतदाताओं में उनकी अच्छी पकड़ है। हाल में उन्हें कुछ निजी विवादों और संगठनात्मक चुनौतियों का सामना भी करना पड़ा है। तमिलनाडु की राजनीति लंबे समय से DMK और AIADMK के बीच रही है। लेकिन अब स्थिति बदलती दिख रही है। विजय की नई पार्टी तीसरी ताकत बनने की कोशिश कर रही है। DMK मजबूत संगठन के साथ है, जबकि AIADMK आंतरिक विवाद से जूझ रही है। विजय की पार्टी वोटों के बंटवारे में असर डाल सकती है।

