Religion: स्वर्ग आखिर कहां स्थित है? यह सवाल सदियों से लोगों के मन में उठता रहा है. अब हार्वर्ड के एक पूर्व प्रोफेसर ने इस विषय पर विज्ञान और धर्म को जोड़ते हुए एक अलग नजरिया पेश किया है. डॉ. माइकल गिलेन, जिन्होंने भौतिकी, गणित और खगोल विज्ञान में डॉक्टरेट की हैं, उन्होंने हाल ही में फॉक्स न्यूज में लिखे अपने लेख में स्वर्ग की संभावित जगह को लेकर अपनी थ्योरी साझा की है. उन्होंने आधुनिक ब्रह्मांड विज्ञान, भौतिकी और धार्मिक मान्यताओं को साथ जोड़कर यह विचार सामने रखा है.

वैज्ञानिक एडविन हबल की खोज का उल्लेख

डॉ. गिलेन ने अपनी व्याख्या में वैज्ञानिक एडविन हबल की खोज का उल्लेख किया है. हबल ने साल 1929 में बताया था कि ब्रह्मांड लगातार फैल रहा है और दूर मौजूद आकाशगंगाएं हमसे तेज गति से दूर होती जा रही हैं. गिलेन के अनुसार, जितनी अधिक दूरी पर कोई आकाशगंगा होती है, वह उतनी ही तेजी से दूर जाती दिखाई देती है. डॉ. गिलेन ने कहा कि ब्रह्मांड में एक सीमा होती है, जिसे कॉस्मिक होराइजन कहा जाता है. यह दूरी इतनी विशाल है कि कोई भी भौतिक वस्तु या इंसान वहां तक नहीं पहुंच सकता. आइंस्टीन के सापेक्षता सिद्धांत के मुताबिक केवल प्रकाश ही प्रकाश की गति तक पहुंच सकता है, इसलिए मनुष्य के लिए इस सीमा को पार करना असंभव माना जाता है.

क्या कॉस्मिक होराइजन के पार हो सकता है स्वर्ग?

डॉ. गिलेन का मानना है कि धार्मिक ग्रंथों में स्वर्ग को ऊपर और इंसानों की पहुंच से बहुत दूर बताया गया है. उन्होंने बाइबिल के वर्णन का उदाहरण देते हुए कहा कि स्वर्ग को अलग-अलग स्तरों में बताया गया है, पृथ्वी का आकाश, अंतरिक्ष और उससे भी ऊपर परम स्थान. डॉ. गिलेन अनुसार कॉस्मिक होराइजन ब्रह्मांड की वह अंतिम सीमा है, जिसके आगे की दुनिया को हम न देख सकते हैं और न ही माप सकते हैं. गिलेन का मानना है कि संभव है स्वर्ग इसी सीमा के पार हो—एक ऐसी जगह जो समय और भौतिक नियमों से परे हो. हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं, बल्कि विज्ञान और आस्था को जोड़ने की एक वैचारिक कोशिश है.

विज्ञान और आस्था के बीच जारी बहस

डॉ. गिलेन का कहना है कि ब्रह्मांड का बहुत बड़ा हिस्सा हमारी नजरों से हमेशा छिपा रहेगा. इस अनदेखे क्षेत्र को लेकर अलग-अलग मान्यताएं हो सकती हैं. उनकी इस थ्योरी ने एक बार फिर विज्ञान और धर्म के बीच चल रही बहस को तेज कर दिया है. हालांकि उन्होंने साफ कहा कि उनका उद्देश्य अंतिम सत्य बताना नहीं है, बल्कि लोगों को सोचने और जिज्ञासा बढ़ाने के लिए प्रेरित करना है. स्वर्ग की वास्तविक जगह आज भी एक रहस्य बनी हुई है, लेकिन इस तरह की चर्चाएं लोगों की दिलचस्पी जरूर बढ़ाती हैं.

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