मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में साफ किया है कि किसी कर्मचारी के खिलाफ सिर्फ चार्जशीट दाखिल होने भर से उसकी नौकरी नहीं जा सकती। कोर्ट ने दहेज प्रताड़ना के मामले में फंसे एक होमगार्ड सैनिक को बड़ी राहत देते हुए उसे सेवा से हटाने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा है कि जब तक किसी व्यक्ति को न्यायालय दोषी नहीं करार दे देता, तब तक सिर्फ FIR या चार्जशीट के आधार पर उसे नौकरी से हटाना उचित नहीं माना जा सकता।

यहां पढ़ें पूरा मामला

यह मामला मध्यप्रदेश के गुना जिले में तैनात एक होमगार्ड सैनिक से जुड़ा है। सैनिक की पत्नी ने उसके खिलाफ दहेज के साथ ही क्रूरता का मामला दर्ज कराया था। पुलिस ने जांच के बाद इस मामले में चार्जशीट कोर्ट में पेश की। इसके बाद विभाग ने जनवरी 2026 में सैनिक को सेवा से हटाने का आदेश जारी कर दिया। सैनिक ने इसी आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। सैनिक ने कोर्ट में यह भी कहा था कि इस मामले में उचित प्रक्रिया और उच्च अधिकारियों की मंजूरी नहीं ली गई थी।

शादी के विवाद चलते दर्ज कराया दहेज और प्रताड़ना का केस

कोर्ट में बताया गया कि पति-पत्नी के बीच वैवाहिक विवाद के चलते पत्नी ने हदेज प्रताड़ना की शिकायत दर्ज कराई थी। इस मामले में अक्टूबर 2024 में FIR दर्ज की गई थी। मामले में पुलिस ने जांच के बाद चार्जशीट कोर्ट में पेश की। मामला अभी ट्रायल कोर्ट में लंबित ही था कि विभाग ने सैनिक को नौकरी से हटा दिया। विभाग के इस कृत्य को कोर्ट ने गलत माना।

कोर्ट का साफ संकेत, जब तक दोषी करार नहीं तब तक सजा नहीं

एमपी हाईकोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए इस मामले को गलत करार दिया। कोर्ट के फैसले से साफ संकेत आया कि जब तक आरोपित व्यक्ति पर अपराध साबित नहीं हो जाता, तब तक उसे सजा नहीं दी जा सकती। इस आधार पर कोर्ट ने सेवा से हटाने के फैसले को रद्द कर दिया। वहीं मामले को दोबारा विचार के लिए भेज दिया। बता दें कि इस माले की सुनवाई एमपी हाईकोर्ट ग्वालियर बेंच में चली। न्यायाधीश आशीष श्रोती ने सिंगल जज बेंच के रूप में आदेश जारी किया।

जानें क्यों महत्वपूर्ण है हाईकोर्ट का ये फैसला?

मामले में राजधानी भोपाल की महिला वकील मीना अश्वाल का कहना है कि यह फैसला कई सरकारी कर्मचारियों के लिए मिसाल बन सकता है। कई बार वैवाहिक विवाद या अन्य मामलों में भी FIR दर्ज होते ही नौकरी पर असर पड़ जाता है। यह फैसला दर्शाता है कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने से पहले सजा नहीं दी जा सकती। इससे सरकारी विभागों में अनुशास्नात्मक कार्रवाई के नियमों पर भी स्पष्टता बनी रहेगी।

Share.

Comments are closed.

chhattisgarhrajya.com

ADDRESS : GAYTRI NAGAR, NEAR ASHIRWAD HOSPITAL, DANGANIYA, RAIPUR (CG)
 
MOBILE : +91-9826237000
EMAIL : info@chhattisgarhrajya.com
August 2026
M T W T F S S
 12
3456789
10111213141516
17181920212223
24252627282930
31  
Exit mobile version