अयोध्या की रामनगरी में एक बार फिर बड़ा धार्मिक आयोजन होने जा रहा है. इस कार्यक्रम में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगी. यह आयोजन चैत्र नवरात्र के पहले दिन यानी वर्ष प्रतिपदा के मौके पर होगा, जिसे हिंदू नववर्ष की शुरुआत माना जाता है. कार्यक्रम को खास और भव्य बनाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पूरी तैयारी कर ली है.
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चम्पत राय ने बताया कि श्रीराम यंत्र दो साल पहले जगद्गुरु शंकराचार्य विजयेंद्र सरस्वती महाराज द्वारा शोभायात्रा के माध्यम से अयोध्या भेजा गया था. वैदिक गणित और ज्यामितीय आकृतियों पर आधारित यह यंत्र देवताओं का निवास माना जाता है, जो सकारात्मक ऊर्जा (पॉजिटिव एनर्जी) आकर्षित करने की क्षमता रखता है. वर्तमान में इस यंत्र की राजा राम के समक्ष नियमित पूजा-अर्चना चल रही है. 19 मार्च तक यह यंत्र श्रीराम मंदिर के दूसरे तल पर पहुंच जाएगा. नौ दिवसीय वैदिक अनुष्ठान पहले से ही शुरू हो चुके हैं. इनमें दक्षिण भारत, काशी और अयोध्या के विद्वान आचार्य शामिल हैं.
सुबह 11 बजे के बाद पहुंचेगी राष्ट्रपति
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 19 मार्च को सुबह करीब 11 बजे अयोध्या पहुंचेंगी. राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उनका स्वागत करेंगे. राष्ट्रपति श्रीराम मंदिर परिसर में प्रवेश कर श्रीराम यंत्र की पूजा-अर्चना करेंगी. अभिजित मुहूर्त में ठीक 11:55 बजे यंत्र की स्थापना का मुख्य अनुष्ठान संपन्न होगा. राष्ट्रपति मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच इस पवित्र कार्य में भाग लेंगी. पूजन के बाद राष्ट्रपति प्रसाद ग्रहण करेंगी और भोजन के पश्चात वापस रवाना होंगी.
योगी आदित्यनाथ की सरकार इस कार्यक्रम को भव्य बनाने की पूरी तैयारी कर रही है. अयोध्या में मंदिर परिसर की साफ-सफाई, सजावट और सुरक्षा व्यवस्था पर खास ध्यान दिया जा रहा है. यह आयोजन सिर्फ धार्मिक कार्यक्रम नहीं होगा, बल्कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण में योगदान देने वाले हजारों कार्यकर्ताओं को सम्मान देने का भी मौका होगा. माना जा रहा है कि अयोध्या में होने वाला यह कार्यक्रम पूरे देश के लिए आस्था और गर्व का पल बनेगा.

