आज की दुनिया एक ऐसे दोराहे पर खड़ी है, जहाँ युद्ध और शांति के बीच का फासला निरंतर सिमटता जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बढ़ती सैन्य प्रतिस्पर्धा, विस्तारवादी नीतियाँ और क्षेत्रीय संघर्षों ने वैश्विक व्यवस्था को गहरे अस्थिरता के भंवर में धकेल दिया है। ऐसे में यह यक्ष प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि क्या मानव सभ्यता पुनः उसी आत्मघाती मार्ग पर अग्रसर है, जिसने पिछली शताब्दी में दो भयावह विश्व-युद्धों का दंश झेला था?

युद्ध का विद्रूप चेहरा और नैतिक उत्तरदायित्व

कोई भी संवेदनशील व्यक्ति युद्ध का समर्थक नहीं हो सकता। मानवता और प्रकृति से अनुराग रखने वाला मन भली-भांति जानता है कि युद्ध अंततः केवल विनाश का ही पर्याय है। युद्ध की विभीषिका में सबसे पहले और सबसे अधिक आहुति निर्दोष नागरिकों, महिलाओं और बच्चों की चढ़ती है। इस दृष्टि से युद्ध का विरोध करना केवल एक वैचारिक स्टैंड नहीं, बल्कि मानवता के प्रति एक सर्वोच्च नैतिक जिम्मेदारी है।

विडंबना यह है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति की यथार्थपरक धरातल (Realpolitik) अक्सर इन नैतिक मूल्यों से कोसों दूर होती है। इतिहास साक्षी है कि शक्तिशाली राष्ट्रों ने अपने राजनीतिक प्रभुत्व, आर्थिक साम्राज्य और सामरिक स्वार्थों की पूर्ति के लिए कमजोर देशों पर युद्ध थोपे हैं। जब-जब ऐसा हुआ है और वैश्विक समुदाय मौन रहा है, तब-तब उस चुप्पी ने अन्याय को न केवल वैधता प्रदान की है, बल्कि हमलावर को और अधिक आक्रामक होने का अवसर भी दिया है।

सैन्य हस्तक्षेपों का लंबा इतिहास और मानवीय त्रासदियां

पिछले तीन दशकों के वैश्विक मानचित्र पर दृष्टि डालें तो हस्तक्षेप की यह प्रवृत्ति स्पष्ट दिखाई देती है। यूगोस्लाविया से लेकर इराक, अफ़ग़ानिस्तान, लीबिया, सीरिया और वर्तमान में यूक्रेन व सूडान तक—सैन्य हस्तक्षेपों ने समूचे भूगोल को हिंसा और असुरक्षा की स्थायी स्थिति में झोंक दिया है। लाखों का विस्थापन, हजारों निर्दोषों का संहार और सामाजिक ढांचों का पूर्ण विध्वंस इन युद्धों की वास्तविक ‘उपलब्धि’ रही है।

पश्चिम एशिया का वर्तमान संकट: एक जलता हुआ प्रश्न

इसी पृष्ठभूमि में पश्चिम एशिया का वर्तमान संकट वैश्विक नैतिकता की सबसे बड़ी परीक्षा है। फ़लस्तीन का प्रश्न पिछले सात दशकों से अंतरराष्ट्रीय राजनीति का सबसे संवेदनशील और अनसुलझा घाव बना हुआ है। ग़ाज़ा और पश्चिमी तट पर जारी निरंतर हिंसा ने मानवाधिकारों के दावों और अंतरराष्ट्रीय कानून की प्रासंगिकता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।

पश्चिम एशिया में बढ़ता यह तनाव अब एक व्यापक क्षेत्रीय युद्ध (Regional War) की आशंका को जन्म दे रहा है। यदि यह दावानल फैला, तो इसका प्रभाव भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं रहेगा। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और आर्थिक स्थिरता पर इसके विनाशकारी प्रभाव पड़ेंगे, जिससे पूरी दुनिया एक साथ प्रभावित होगी।

वैश्विक संस्थाओं की साख और परमाणु भय

यही वह क्षण है जब विश्व समुदाय, विशेषकर संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाओं की भूमिका संदिग्ध हो जाती है। क्या वैश्विक शक्तियाँ केवल अपने सामरिक हितों के चश्मे से दुनिया को देखेंगी, या वे शांति और न्याय को प्राथमिकता देंगी? यदि अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं केवल शक्तिशाली देशों की राजनीतिक सुविधा का साधन बनी रहीं, तो उनकी विश्वसनीयता का अंत निश्चित है।

आज परमाणु हथियारों की मौजूदगी इस संकट को ‘कयामत’ के करीब ले जाती है। शीत युद्ध का अनुभव हमें चेतावनी देता है कि सैन्य उन्माद का मार्ग अंततः पूरी सभ्यता को श्मशान में बदल सकता है।

निष्कर्ष: युद्ध की राख या शांति का भविष्य?

अंततः, इतिहास के इस निर्णायक मोड़ पर खड़े होकर विश्व समुदाय को यह आत्मचिंतन करना होगा कि क्या हम आने वाली पीढ़ियों को केवल युद्धों की राख और खंडहर सौंपना चाहते हैं? आज मानवता के सामने जो वास्तविक चुनौतियाँ हैं—जैसे कि गहराता जलवायु संकट, भयावह आर्थिक असमानता और वैश्विक स्वास्थ्य असुरक्षा—उनका समाधान मिसाइलों या टैंकों के पास नहीं है। ये समस्याएँ साझा सहयोग और सामूहिक चेतना की मांग करती हैं।

सैन्य शक्ति से अर्जित की गई शांति केवल ‘युद्ध विराम’ होती है, वास्तविक शांति नहीं। स्थायी शांति की स्थापना केवल तभी संभव है जब संवाद, कूटनीति और न्यायसंगत सहअस्तित्व को अंतरराष्ट्रीय राजनीति का मूल मंत्र बनाया जाए। यदि वैश्विक शक्तियाँ अपने संकुचित सामरिक हितों के मोहपाश से मुक्त नहीं हुईं, तो यह ‘चुप्पी’ अंततः पूरी सभ्यता के पतन का कारण बनेगी। हमें यह याद रखना होगा कि युद्ध में कोई पक्ष ‘विजेता’ नहीं होता; हार अंततः पूरी मानवता की ही होती है। अब समय आ गया है कि हम संघर्ष की पुरानी राजनीति को तिलांजलि दें और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के उस आदर्श की ओर बढ़ें जहाँ शांति केवल एक शब्द नहीं, बल्कि वैश्विक जीवन का आधार हो।-डॉ. ए.सी. प्रभाकर

Share.

Comments are closed.

chhattisgarhrajya.com

ADDRESS : GAYTRI NAGAR, NEAR ASHIRWAD HOSPITAL, DANGANIYA, RAIPUR (CG)
 
MOBILE : +91-9826237000
EMAIL : info@chhattisgarhrajya.com
March 2026
M T W T F S S
 1
2345678
9101112131415
16171819202122
23242526272829
3031  
Exit mobile version