गुजरात सरकार ने मंगलवार को विधानसभा में गुजरात समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक, 2026 पेश किया, जिसमें धर्म से परे हटकर विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और सह-जीवन संबंध को विनियमित करने के लिए एक समान कानूनी ढांचे का प्रस्ताव है.

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने यह विधेयक विधानसभा में पेश किया. राज्य सरकार द्वारा नियुक्त एक विशेषज्ञ समिति ने यूसीसी के क्रियान्वयन के विषय पर एक सप्ताह पहले अपनी रिपोर्ट सौंपी थी.

यदि यह विधेयक विधानसभा में पारित हो जाता है, तो गुजरात, उत्तराखंड के बाद समान नागरिक संहिता विधेयक पारित करने वाला देश का दूसरा राज्य बन जाएगा. उत्तराखंड ने फरवरी 2024 में यूसीसी विधेयक पारित किया था.

‘गुजरात समान नागरिक संहिता, 2026’ नामक यह प्रस्तावित कानून पूरे राज्य में लागू होगा और गुजरात की सीमा से बाहर रहने वाले राज्य के निवासियों पर भी प्रभावी होगा.

द्विविवाह पर भी रोक लगाई गई

लेकिन यह प्रस्तावित कानून अनुसूचित जनजातियों और कुछ ऐसे समूहों पर लागू नहीं होगा, जिनके पारंपरिक अधिकार संविधान के तहत संरक्षित हैं. विधेयक के ‘उद्देश्य और कारण’ के अनुसार, इसका लक्ष्य समान कानूनी ढांचा तैयार करना है. अन्य बातों के अलावा, विधेयक में सह-जीवन संबंध के पंजीकरण और औपचारिक घोषणा के माध्यम से उनके समापन का प्रावधान है.

विधेयक में द्विविवाह पर भी रोक लगाई गई है. इसमें कहा गया है कि किसी विवाह को संहिता के तहत तभी वैध माना जाएगा, जब विवाह के समय किसी भी पक्ष का जीवनसाथी जीवित न हो.

इससे पहले विधानसभा में विधेयक पेश होने के बीच मंगलवार को सड़कों पर इसका जमकर विरोध हुआ.  अहमदाबाद में गुजरात विधानसभा के बाहर यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल के विरोध में प्रदर्शन कर रहे सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ़ इंडिया के कार्यकर्ताओं को पुलिसकर्मियों ने हिरासत में ले लिया.

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