अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रही जंग का प्रभाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर देखने को मिल रहा है। कई दिनों से चल रही यह जंग सैंकड़ों मौतों और अरबों के नुकसान के बावजूद भी रुकने का नाम नहीं ले रही है। इसी बीच पाकिस्तान ने ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता कराने का प्रस्ताव भी पेश किया था। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पोस्ट शेयर कर दोनों देशों के बीच वार्ता कराने की बात कही थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने भी शरीफ के इस पोस्ट को रिशेयर किया था जिसे उनकी सहमती माना जा रहा था। लेकिन अब ईरान की इस मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरान ने पाकिस्तान का प्रस्ताव ठुकराते हुए यह साफ कर दिया है कि उसे पाकिस्तान की मध्यस्थता मंजूर नहीं है।
हमें ट्रंप पर विश्वास नहीं – ईरान
ट्रंप जहां बार-बार युद्ध जीतने की घोषणा कर रहे है वहीं ईरान हर बार उनके दावों को खारिज कर दे रहा है। हाल ही में एक बार फिर ट्रंप ने ईरान से वार्ता की बात कही थी, लेकिन इन बातों को भी ईरान ने झूठा बताया है। ईरानी सेना ने इस मामले पर बयान देते हुए कहा कि अमेरिका अपने आप से ही बात कर रहा है। साथ ही ईरान ने यह भी साफ किया कि ट्रंप उन्हें दो बार धोखा दे चुके है और अब वह ऐसा नहीं होने देंगे। उन्हें ट्रंप पर विश्वास नहीं है।
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने शेयर किया था पोस्ट
अमेरिका की कूटनीति पर अविश्वास जताते हुए ईरान ने पाकिस्तान का प्रस्ताव भी अस्वीकार कर दिया है। बता दें कि हाल ही में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने मध्य पूर्व (Middle East) में चल रहे युद्ध को खत्म करने की बात कहते हुए ईरान और अमेरिका के बीच शांति स्थापित करने की बात कही थी। शरीफ ने एक्स पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा था कि पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच अर्थपूर्ण और निर्णायक वार्ता कराने के लिए तैयार है और ऐसा करने पर वह सम्मानित महसूस करेगा। शरीफ के इस पोस्ट को ट्रंप ने भी अपने आधिकारिक अकाउंट से रिशेयर किया था।
इजरायल पहले ही कर चुका पाकिस्तान के दावों से इनकार
ट्रंप के इस पोस्ट के बाद इजरायल की भी इस मामले पर प्रतिक्रिया सामने आई थी। इजराइल के भारत स्थित राजदूत रूवेन अजार ने पाकिस्तान के मध्यस्थता कराने की बात पर बयान देते हुए कहा था कि उनका देश उन देशों पर भरोसा नहीं करता जिनके साथ उसके औपचारिक कूटनीतिक संबंध नहीं हैं। अजार ने यह भी साफ किया कि इजराइल अपनी विदेश नीति अपने आकलन और अपने प्रमुख सहयोगियों के दृष्टिकोण के आधार पर तय करता है। इजराइल ने इस दौरान भारत के साथ अपने मजबूत संबंधों को भी दोहराया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दोनों देश मिलकर काम कर रहे हैं और भविष्य में यह साझेदारी और मजबूत होगी।

