किडनी हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण ऑर्गन्स में शुमार है. किडनी दिन-रात खून को शुद्ध करने और वेस्ट प्रोडक्ट को बाहर निकालने का काम करती है. कई बार हमारी किडनी में दिक्कतें शुरू हो जाती हैं, लेकिन लोगों को इसका पता नहीं चलता है. जब परेशानी गंभीर हो जाती है, तब जांच में इसका पता लगता है. किडनी डिजीज के शुरुआती लक्षणों को अधिकतर लोग सामान्य थकान या कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो हमारा चेहरा और शरीर के अन्य हिस्से समय-समय पर छोटे बदलावों के जरिए किडनी की खराबी का संकेत देने लगते हैं. अगर इन वॉर्निंग साइन्स को समय रहते पहचान लिया जाए, तो किडनी फेलियर जैसी जानलेवा स्थितियों से बचा जा सकता है.

किडनी का सबसे सीधा संबंध हमारे पेशाब से होता है. सामान्य तौर पर पेशाब का रंग हल्का पीला होता है, लेकिन अगर इसका रंग ब्राउन दिखने लगे, तो यह एक गंभीर चेतावनी है. यह रंग परिवर्तन मांसपेशियों में क्षति या मूत्र मार्ग में खून आने के कारण हो सकता है, जो दर्शाता है कि किडनी पर अत्यधिक दबाव है. अगर पेशाब करते समय बहुत अधिक झाग दिखाई दे, तो इसका मतलब है कि किडनी के फिल्टर खराब हो गए हैं और शरीर के लिए जरूरी प्रोटीन पेशाब के रास्ते बाहर निकल रहा है.

किडनी खराब होने का असर अक्सर सबसे पहले चेहरे पर दिखाई देता है. सुबह सोकर उठने पर यदि आंखों के नीचे सूजन या पूरे चेहरे पर भारीपन महसूस होता है, तो इसे हल्के में न लें. जब किडनी खून से अतिरिक्त सोडियम और तरल पदार्थों को बाहर नहीं निकाल पाती, तो वे शरीर के ऊतकों में जमा होने लगते हैं. पलकों के आसपास की त्वचा बहुत पतली और संवेदनशील होती है, इसलिए वहां पानी का जमाव सबसे पहले और स्पष्ट रूप से दिखाई देता है. यह स्थिति शरीर में प्रोटीन के कम होने का भी संकेत हो सकती है. इसके अलावा जब किडनी की कार्यक्षमता कम हो जाती है, तो शरीर में यूरिया और क्रिएटिनिन जैसे टॉक्सिन्स का स्तर बढ़ने लगता है. इस स्थिति को यूरेमिया कहा जाता है. इसके कारण व्यक्ति को भूख लगना बंद हो जाती है, खाने का स्वाद बदल जाता है और बार-बार मतली या उल्टी जैसा महसूस होता है.

एक्सपर्ट की मानें तो खून में गंदगी के जमा होने से मस्तिष्क और पाचन तंत्र पर भी बुरा असर पड़ता है, जिससे व्यक्ति हमेशा बीमार और कमजोर महसूस करने लगता है. अगर आप बिना किसी भारी काम के भी हर समय थका हुआ महसूस करते हैं, तो यह भी किडनी डिजीज का संकेत हो सकता है. किडनी शरीर का केवल कचरा ही साफ नहीं करतीं, बल्कि वे एरिथ्रोपोइटिन नामक हार्मोन भी बनाती हैं, जो लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन के लिए जिम्मेदार है. किडनी में समस्या होने पर इस हार्मोन की कमी हो जाती है, जिससे शरीर में खून की कमी यानी एनीमिया हो जाता है. किडनी की बीमारी से जूझ रहे लगभग 70 प्रतिशत मरीजों में यह पुरानी थकान और कमजोरी देखी जाती है, क्योंकि अंगों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती.

डॉक्टर के मुताबिक किडनी फेलियर का एक और प्रमुख लक्षण पैरों और टखनों में होने वाली सूजन है, जिसे एडिमा कहा जाता है. जब किडनी शरीर से अतिरिक्त नमक और पानी को निकालने में फेल रहती है, तो गुरुत्वाकर्षण के कारण यह तरल पदार्थ पैरों के निचले हिस्सों में जमा हो जाता है. अगर आप अपनी उंगली से पैरों की सूजन वाली जगह को दबाते हैं और वहां गड्ढा बन जाता है, तो यह स्पष्ट रूप से शरीर में पानी के जमाव को दर्शाता है. इसके साथ ही रात में बार-बार पेशाब आना और मांसपेशियों में खिंचाव महसूस होना भी किडनी की बीमारी के लक्षण हैं. एक्सपर्ट की मानें तो किडनी के इन लक्षणों को समय पर पहचानकर तुरंत नेफ्रोलॉजिस्ट या यूरोलॉजिस्ट से मिलकर जांच करानी चाहिए.

(Disclaimer : इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, सामान्य जानकारियों पर आधारित है.)

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