Delhi News In Hindi: दिल्ली में कमर्शियल एलपीजी की कमी के बीच सरकार ने नया नियम लागू किया है. और मजदूरों समेत जरूरी सेवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी.
देश की राजधानी दिल्ली में कमर्शियल रसोई गैस की कमी को देखते हुए सरकार ने नई व्यवस्था लागू कर दी है. अब गैस सिलेंडर का बंटवारा औसत खपत के आधार पर किया जाएगा, ताकि जिन लोगों को इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है, उन्हें पहले गैस मिल सके. सरकार का कहना है कि इस फैसले से सप्लाई सिस्टम ज्यादा संतुलित होगा और बाजार में अचानक होने वाली कमी को भी रोका जा सकेगा.
सरकार ने गैस की उपलब्धता बढ़ाने पर भी जोर दिया है. पहले जहां बाजार में केवल करीब 20 प्रतिशत गैस ही पहुंच पा रही थी, अब इसे बढ़ाकर लगभग 50 प्रतिशत कर दिया गया है. यानी पहले के मुकाबले अब दोगुनी से ज्यादा सप्लाई हो रही है.
आंकड़ों के मुताबिक, पहले जहां करीब 1800 सिलेंडर रोजाना मिल रहे थे, अब यह संख्या बढ़कर 4500 तक पहुंच गई है. इससे होटल, रेस्टोरेंट और छोटे कारोबारियों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो पिछले कुछ समय से गैस की कमी से परेशान थे.
जरूरी सेवाओं को सबसे पहले गैस
नई व्यवस्था में सरकार ने साफ कर दिया है कि जरूरी सेवाओं को सबसे पहले गैस दी जाएगी. इसमें स्कूल, अस्पताल, बस अड्डे, रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट जैसे स्थान शामिल हैं.
सरकार का मानना है कि इन जगहों पर किसी भी तरह की रुकावट नहीं आनी चाहिए, क्योंकि इनका सीधा संबंध आम लोगों की जिंदगी से है. इसलिए इन संस्थानों की जरूरतों को प्राथमिकता में रखा गया है.
इन सेवाओं के लिए 225 सिलेंडर यानी 5 प्रतिशत हिस्सा तय किया गया है। इसी तरह सरकारी संस्थान, पीएसयू, औद्योगिक कैंटीन और कम्युनिटी किचन को भी 225 सिलेंडर (5 प्रतिशत) दिए जा रहे हैं।
होटल कारोबार भी फोकस में
गैस के बंटवारे में होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे और खाने-पीने से जुड़े कारोबार को सबसे ज्यादा हिस्सा दिया गया है. इसकी वजह यह है कि इनका सीधा संबंध लोगों के भोजन से है.
अगर इन सेक्टरों में गैस की कमी होगी तो इसका असर आम जनता पर तुरंत पड़ेगा. इसी कारण सरकार ने इनको प्राथमिकता में रखा है, ताकि शहर में खाने-पीने की व्यवस्था सुचारू बनी रहे.
इस सेक्टर में 3,375 सिलेंडर यानी कुल सप्लाई का 75 प्रतिशत दिया जा रहा है। इसके अलावा कैटरिंग और बैंक्वेट सेवाओं के लिए 225 सिलेंडर (5 प्रतिशत) तय किए गए हैं।
मजदूरों के लिए अलग व्यवस्था
नई नीति में प्रवासी मजदूरों को भी खास ध्यान में रखा गया है. उनके लिए छोटे सिलेंडर की अलग से व्यवस्था की गई है, ताकि उन्हें कम खर्च में गैस मिल सके.
सरकार का मानना है कि मजदूर वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित होता है, क्योंकि उनका रोज का काम और खाना दोनों गैस पर निर्भर करता है. इसलिए उनके लिए अलग कोटा तय किया गया है, जिससे उन्हें राहत मिल सके.
प्रवासी मजदूरों के लिए 5 किलो वाले 684 छोटे सिलेंडर, यानी कुल 4 प्रतिशत सप्लाई अलग से सुनिश्चित की गई है, ताकि उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो।
कमी के पीछे कई वजहें
दिल्ली में कमर्शियल गैस की कमी अचानक नहीं हुई है. इसके पीछे कई वजहें हैं. अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव, सप्लाई चेन में आई दिक्कतें और त्योहारों व शादी के सीजन में बढ़ी मांग ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया था. यही कारण रहा कि पिछले कुछ हफ्तों में बाजार में गैस की कमी साफ तौर पर देखने को मिली.
सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद हालात तेजी से सुधर रहे हैं. अधिकारियों के मुताबिक, सप्लाई अब पहले से बेहतर हो रही है और आने वाले दिनों में स्थिति पूरी तरह सामान्य हो सकती है.
दिल्ली सरकार में मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने भी कहा है कि बढ़ी हुई सप्लाई को तेजी से लागू किया जा रहा है, जिससे जरूरी सेवाओं और कारोबार पर कोई असर न पड़े.
कालाबाजारी पर सख्ती
गैस की कमी के बीच कालाबाजारी और जमाखोरी को रोकना भी सरकार के लिए बड़ी चुनौती थी. इसे देखते हुए करीब 70 टीमें मैदान में उतारी गई हैं, जो लगातार निगरानी कर रही हैं. सरकार ने साफ कर दिया है कि जो भी नियम तोड़ेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
केंद्र सरकार के फैसले का असर
इस पूरी व्यवस्था में केंद्र सरकार की भूमिका भी अहम बताई जा रही है. मंत्री के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लिया गया यह फैसला सही समय पर आया है, जिससे लाखों लोगों को राहत मिली है. व्यापारियों, मजदूरों और सेवा क्षेत्र से जुड़े लोगों को इससे सीधे फायदा होगा.
सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और जरूरत के हिसाब से ही गैस का इस्तेमाल करें. अगर सभी लोग समझदारी से काम लें, तो गैस की सप्लाई को संतुलित रखा जा सकता है और किसी को भी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा.
कुल मिलाकर, यह नई नीति गैस की कमी के बीच संतुलन बनाने की कोशिश है, जिससे जरूरी सेवाएं चलती रहें और हर जरूरतमंद तक समय पर गैस पहुंच सके.

