नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली स्थित मशहूर टूरिस्ट प्लेस इंडिया गेट आज रात एक घंटे तक अंधेरे में डूबा रहेगा. शनिवार 28 मार्च को रात 8:30 बजे से 9:30 बजे के बीच इंडिया गेट के आस-पास मौजूद सभी लाइट बंद कर दी जाएगी. जिससे इंडिया गेट पर एक अलग तरह का ही नजारा बनेगा. आम तौर पर इंडिया गेट पर पूरी रात लाइट जलती रहती है. लेकिन आज रात एक घंटे के लिए एक खास मकसद से इंडिया गेट के पास मौजूद लाइटों को बंद करने का फैसला लिया गया है. दरअसल यह अर्थ आवर 2026 का हिस्सा है. यह हमारे पर्यावरण के लिए शुरू की गई एक पहल है. इसके तहत जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण स्थिरता के बारे में लोगों और संस्थाओं की जागरूकता बढ़ाने के लिए एक घंटे तक गैरजरूरी लाइटें बंद कर दी जाती हैं.
इस साल अर्थ आवर ग्लोबल मूवमेंट की 20वीं सालगिरह है, जिसे “पृथ्वी के लिए एक घंटा दें” थीम के तहत मनाया गया. यह हमारे ग्रह के लिए मिलकर किए जाने वाले कामों पर जोर देता है.
पर्यावरण बचाने का एक प्रयास है अर्थ आवर
वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) द्वारा हर साल आयोजित किया जाने वाला अर्थ आवर 2007 में सिडनी में एक सिंबॉलिक “लाइट्स-ऑफ” इवेंट के तौर पर शुरू हुआ था. तब से यह पूरी दुनिया में जमीनी स्तर के पर्यावरण प्रयासों में से एक बन गया है. यह 190 से ज्यादा देशों और इलाकों में लाखों लोगों, बिजनेस और स्मारकों को एक साथ लाता है.
हैदराबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने भी लोगों से की है अपील
इस इवेंट की उम्मीद में पूरे भारत में अधिकारियों ने लोगों से एक घंटे के इस कार्यक्रम के दौरान गैर-जरूरी लाइटें और बिजली के उपकरण बंद करने की अपील की है. हैदराबाद में ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (जीएचएमसी) ने लोगों से अपील की है कि वे शनिवार को रात 8:30 बजे से 9:30 बजे तक गैर-जरूरी लाइटें बंद करके अर्थ आवर 2026 में सक्रिय रूप से हिस्सा लें ताकि पर्यावरण की देखभाल के संदेश को मजबूत किया जा सके.
धरती को सिर्फ एक घंटा देकर हम अच्छे बदलाव ला सकते हैं
जीएचएमसी कमिश्नर आर.वी. कर्णन ने लोगों से इस सिंबॉलिक काम को सिर्फ ऊर्जा बचाने के तरीके से ज्यादा मानने की अपील की. उन्होंने कहा, “हर छोटा काम मायने रखता है. धरती को सिर्फ एक घंटा देकर, हम अच्छे बदलाव ला सकते हैं और एक दीर्घकालिक भविष्य की दिशा में योगदान दे सकते हैं.” उनकी अपील अर्थ आवर के बड़े मकसद को दिखाती है, जो लोगों, समुदायों और संगठनों को उनके पर्यावरण पर पड़ने वाले असर के बारे में सोचने और सतत उद्देश्य के लिए बढ़ावा देती है.
पूरे भारत और दुनियाभर में मशहूर जगहें, सार्वजनिक स्थान और घर इस सिंबॉलिक स्विच-ऑफ में शामिल होंगे, जिससे क्लाइमेट एक्शन की जरूरत और प्राकृतिक संसाधनों के बचाव की ओर ध्यान जाएगा.
पिछले साल भी इंडिया गेट पर बंद हुईं थी लाइटें
पिछले साल इंडिया गेट, राष्ट्रपति भवन और दूसरे नेशनल मॉन्यूमेंट्स जैसी मशहूर इमारतों ने भी इसी तरह अर्थ आवर में हिस्सा लिया था, जिससे देश में इस अभियान की अहमियत और मजबूत हुई.
पर्यावरण विशषज्ञों का कहना है कि अर्थ आवर न सिर्फ एक सिंबॉलिक इशारा है बल्कि जलवायु परिवर्तन से निपटने की मिली-जुली जिम्मेदारी की याद भी दिलाता है. इसमें ऊर्जा की खपत कम करने से लेकर इकोसिस्टम की रक्षा करने और कार्बन एमिशन कम करने वाली नीति और तरीकों को सपोर्ट करना शामिल है.

