बाड़मेर. रेगिस्तान की सादगी और परंपराओं की गहराई के बीच एक ऐसी रस्म सामने आई है जिसने हर किसी को भावुक भी किया और हैरान भी. शादी से ठीक पहले IPS अधिकारी केके विश्नोई ने अपनी मां का दूध पीकर आशीर्वाद लिया और फिर बारात लेकर रवाना हुए है.केके विश्नोई की शादी से जुड़ा एक भावुक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. इस वीडियो में दूल्हे केके विश्नोई बारात से पहले अपनी मां के हाथों से दूध पीते नजर आ रहे हैं, जो एक पारंपरिक और भावनात्मक रस्म का हिस्सा माना जा रहा है. इस पल ने मां-बेटे के गहरे रिश्ते को दर्शाया और देखने वालों की आंखें नम कर दीं. शादी की इस अनोखी रस्म को लोग खूब पसंद कर रहे हैं और इसे भारतीय परंपराओं की खूबसूरती से जोड़कर देख रहे हैं.
राजस्थान में इन दिनों यूपी कैडर के दो आईपीएस अधिकारियों की शादी जमकर सुर्खिया बटौर रही है. यूपी कैडर के IPS केके विश्नोई और अंशिका वर्मा 29 मार्च को जोधपुर में शादी के बंधन में बंधेंगे. जोधपुर में होने वाली इस हाई-प्रोफाइल शादी से पहले केके बिश्नोई के पैतृक गांव धोरीमन्ना में शादी की रस्में पूरे पारंपरिक तरीके से निभाई जा रही हैं. बारात रवानगी से पहले एक खास रस्म देखने को मिली जहां मां ने अपने बेटे को दूध पिलाकर उसे नई जिंदगी की शुरुआत के लिए आशीर्वाद दिया है.
क्या है ‘आंचल पीना’ या स्तनपान की रस्म?
राजस्थान के बिश्नोई समाज और कुछ ग्रामीण समुदायों में यह परंपरा सदियों पुरानी है। इसे स्थानीय भाषा में ‘आंचल पीना’ कहा जाता है। परंपरा के अनुसार, जब दूल्हा पूरी तरह सज-धज कर बारात लेकर घर से निकलने वाला होता है, तब वह अपनी मां के पास बैठता है। मां अपने आंचल से प्रतीकात्मक रूप से बेटे को दूध पिलाती है या थाली में दूध निकालकर उसे ग्रहण करवाती है। इसके बाद मां अपने लाल के सिर पर हाथ रखकर उसे गृहस्थ जीवन में प्रवेश का आशीर्वाद देती है।
महिलाएं हिरण के बच्चों को भी पिलाती हैं दूध
बिश्नोई समाज में ‘ममता’ का स्थान ईश्वर से भी ऊंचा माना गया है। इस समाज की करुणा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां की महिलाएं न केवल अपने बच्चों को, बल्कि अनाथ हिरण के बच्चों को भी अपना दूध पिलाकर पालती हैं। बिश्नोई समाज की महिलाओं की ओर से हिरण के बच्चों को स्तनपान कराने की तस्वीरें दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं।
बेटा अपनी मां के दूध का कर्ज कभी नहीं चुका सकता
यही कारण है कि जब एक बेटा शादी जैसे बड़े पड़ाव पर खड़ा होता है, तो वह ‘मातृ ऋण’ को स्वीकार करता है। यह रस्म याद दिलाती है कि बेटा चाहे कितना भी बड़ा अधिकारी बन जाए, वह अपनी मां के दूध का कर्ज कभी नहीं चुका सकता। यह परंपरा उस अटूट विश्वास का प्रतीक है कि मां के संस्कारों की लाज बेटा उम्र भर रखेगा।
इस परंपरा का इतिहास और सामाजिक संदेश
इतिहासकारों की मानें तो इस रस्म का संबंध शौर्य और मर्यादा से है। मध्यकाल में जब योद्धा युद्ध के मैदान में जाते थे, तब वे मां का दूध पीकर निकलते थे। इसका अर्थ यह था कि वे युद्ध में ऐसा कोई भी अनैतिक कार्य नहीं करेंगे जिससे मां के दूध को लज्जा आए।
शादी के संदर्भ में इसके पीछे तीन मुख्य संदेश
- ऋण की स्वीकृति: जीवन के नए सफर की शुरुआत मां के प्रति कृतज्ञता के साथ करना।
- संस्कारों का स्मरण: समाज और परिवार की मर्यादा को कभी न भूलना।
- अधिकार का हस्तांतरण: यह रस्म मां को यह विश्वास दिलाती है कि पत्नी के आने के बाद भी मां का स्थान सर्वोच्च रहेगा।
आईपीएस की सादगी ने जीता दिल
आज के दौर में जब लोग अपनी जड़ों से कटते जा रहे हैं, तब आईपीएस केके बिश्नोई ने की ओर से पूरी सादगी से इस परंपरा को निभाना समाज को एक बड़ा संदेश देता है। यह वीडियो हमें सिखाता है कि सफलता के आसमान में आप चाहे जितनी ऊंची उड़ान भर लें, लेकिन अपनी संस्कृति और जमीन से जुड़े रहना ही आपकी असली ताकत है। सोशल मीडिया यूजर्स इस वीडियो को संस्कारों का सबसे सुंदर उदाहरण बता रहे हैं।
कौन है आईपीएस कृष्ण कुमार विश्नोई..?
आईपीएस कृष्ण कुमार विश्नोई बाड़मेर जिले के धोरीमन्ना के रहने वाले हैं..2018 बैच के आईपीएस कृष्ण कुमार विश्नोईउत्तर प्रदेश कैडर के अधिकारी हैं. वर्तमान में संभल जिले के पुलिस अधीक्षक के रूप में काम कर रहे हैं. दिल्ली के सेंट स्टीफन कॉलेज से ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होंने UN में नौकरी की लेकिन सिविल सर्विसेज में जाने के लिए उन्होंने 30 लाख के सालाना पैकेज वाली नौकरी छोड़कर अपना सपना पूरा किया है.आईपीएस कृष्ण कुमार बिश्नोई की शादी आईपीएस अंशिका वर्मा के साथ हो रही है जो प्रयागराज की रहने वाली हैं. दोनों ही अधिकारी अपनी सेवाओं में बेहतर कार्य के लिए पहचाने जाते हैं. इस शादी को लेकर गांव से लेकर शहर तक उत्साह का माहौल है. परंपरा और आधुनिकता का यह संगम इस शादी को और भी खास बना रहा है.

