यदि घोषित लक्ष्यों को समयबद्ध और पारदर्शी ढंग से लागू किया जाता है, तो 50 अरब डॉलर का व्यापारिक लक्ष्य और ऊर्जा, रणनीतिक साझेदारी ठोस उपलब्धियों में परिवर्तित हो सकती है…

पिछले वर्ष 2025 के आखिर तक कनाडा में लगभग 20 लाख (2 मिलियन) से अधिक भारतीय मूल के निवासियों के होने का अनुमान था। कनाडा में भारतीयों का इतिहास 19वीं सदी के अंत में शुरू हुआ, जब मुख्य रूप से पंजाब से सिख अप्रवासी ब्रिटिश कोलंबिया में काम करने आए। नस्लीय भेदभाव जैसे कामागाटा मारू कांड 1914 का सामना करने के बावजूद, भारतीय समुदाय ने खुद को वहां स्थापित किया और आज भारतीय मूल के नागरिक कनाडा की आबादी का एक प्रमुख, शिक्षित और प्रभावशाली हिस्सा बन गए हैं। पिछले कुछ वर्षों में भारत और कनाडा के संबंध उथल-पुथल के दौर से गुजरे हैं। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में यह असाधारण नहीं है कि राष्ट्रों के बीच मतभेद उत्पन्न न हों, परंतु परिपक्व नेतृत्व की कसौटी इस बात से तय होती है कि वे मतभेदों को स्थायी दरार बनने से कैसे रोकते हैं। हाल के घटनाक्रमों ने संकेत दिया है कि दोनों देश अब अतीत की कटुता से आगे बढक़र एक संतुलित, व्यावहारिक और परिणामोन्मुख साझेदारी की दिशा में कदम बढ़ाना चाहते हैं। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की भारत यात्रा और नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी विस्तृत वार्ता ने संबंधों में सुधारों का संदेश दिया है।

यदि थोड़ा पीछे की ओर जाएं तो वर्ष 2023 में उपजे विवादों ने द्विपक्षीय संबंधों को स्पष्ट रूप से प्रभावित किया था। सार्वजनिक आरोप-प्रत्यारोप, राजनयिक स्तर पर सख्ती और वीजा प्रक्रियाओं में आई जटिलताओं ने दोनों देशों के बीच विश्वास की लय को बाधित किया था। इसका प्रत्यक्ष प्रभाव उन लाखों भारतीय मूल के लोगों, विद्यार्थियों, पर्यटकों और पेशेवरों पर पड़ा, जिनके लिए कनाडा शिक्षा, रोजगार और उद्यमिता के अवसरों की भूमि रहा है। पिछले तीन वर्षों में पर्यटन वीजा के आवेदनों पर अस्वीकृतियों और प्रशासनिक विलंब ने भारत के हजारों कनाडा जाने वाले भारतीयों की उम्मीदों पर पानी फेरा है। हालांकि 2024 में, 3.74 लाख व्यक्तियों को कनाडाई नागरिकता प्रदान की गई, जिनमें से 23 फीसदी भारतीय नागरिक थे, जिनकी कुल संख्या 87812 थी। ऐसे परिदृश्य में उच्चस्तरीय संवाद की शुरुआत केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि विश्वास-निर्माण की आवश्यकता बन गई थी। इसी पृष्ठभूमि में दोनों प्रधानमंत्रियों की वार्ता ने यह स्पष्ट किया कि अतीत की असहमतियों को भविष्य की संभावनाओं पर हावी नहीं होने दिया जाएगा। 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य इसी नई सोच का द्योतक है।

भारत आज विश्व की तीव्र गति से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में अग्रणी है, जबकि कनाडा संसाधन-संपन्न, तकनीकी दक्ष और स्थिर संस्थागत ढांचे वाला देश है। यदि व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) को समयबद्ध रूप से अंतिम रूप दिया जाता है, तो कृषि, वस्त्र, फार्मास्यूटिकल्स, सूचना प्रौद्योगिकी और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में नए अवसरों का विस्तार संभव है। इसलिए यह आवश्यक है कि व्यापारिक अवरोधों में कमी लाकर और निवेश को बढ़ावा देकर दोनों देशों के उद्योग जगत को दीर्घकालिक भरोसा प्रदान किया जाए। इस नई साझेदारी में ऊर्जा सहयोग सबसे ठोस और दूरगामी आयाम बनकर उभरा है। ऐसे में कनाडा की अग्रणी कंपनी कैमको के साथ 2.6 अरब डॉलर का यूरेनियम आपूर्ति समझौता भारत की असैन्य परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के लिए महत्वपूर्ण आधार तैयार करेगा। 2027 से 2035 तक प्रस्तावित आपूर्ति भारत की ऊर्जा सुरक्षा को स्थिरता प्रदान करेगी और स्वच्छ ऊर्जा को गति देगी। अमरीका-इजराइल बनाम ईरान युद्ध के दृष्टिगत ऊर्जा सुरक्षा आज किसी भी राष्ट्र के विकास के लिए प्राथमिक गारंटी बन चुकी है और इस संदर्भ में यह करार दीर्घकालिक महत्व रखता है।

महत्वपूर्ण खनिजों और रेयर अर्थ तत्वों के क्षेत्र में सहयोग भी समान रूप से रणनीतिक है। सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन, ऊर्जा भंडारण और नवीकरणीय ऊर्जा उपकरणों की वैश्विक मांग से इन संसाधनों को नई ऊंचाइयां प्रदान की हैं। कनाडा के विशाल खनिज भंडार और भारत की बढ़ती विनिर्माण क्षमता एक दूसरे की पूरक बन सकते हैं। हालांकि इन सकारात्मक संकेतों के साथ कुछ यथार्थपरक चुनौतियां भी विद्यमान हैं। वीजा नीतियों में पारदर्शिता और संवेदनशीलता सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक बन चुका है। आव्रजन नीतियों में संतुलन, प्रशासनिक प्रक्रियाओं में स्पष्टता और मानवीय दृष्टिकोण इस रिश्ते की सामाजिक धुरी को सुदृढ़ करेंगे। इसी बीच कनाडा में बसने का सपना देखने वाले लोगों के लिए एक अच्छी खबर है। मार्क कार्नी की सरकार ने एक नया इमिग्रेशन का दरवाजा खोला है जिससे देश में पहले से मौजूद 33000 अस्थायी कर्मचारियों को स्थायी सदस्यता मिल सकती है। यह जानकारी इमिग्रेशन, रिफ्यूजीज एंड सिटिजनशिप कनाडा की इमिग्रेशन पर संसद को 2025 की एनुअल रिपोर्ट में दी गई है। इसी तरह कनाडा ने भारतीय छात्रों के लिए उच्च शिक्षा के मौकों को बढ़ाने के लिए 100 मिलियन डॉलर का स्कॉलरशिप प्रोग्राम शुरू किया है। इसका मकसद दोनों देशों के बीच शैक्षणिक सहयोग और रिसर्च में साझेदारी को मजबूत करना है।

आज जब वैश्विक परिदृश्य आर्थिक अनिश्चितताओं, आपूर्ति श्रृंखला व्यवधानों और भू-राजनीतिक तनावों से घिरा है, तब भारत और कनाडा जैसे लोकतांत्रिक राष्ट्रों के लिए सहयोग का मार्ग अधिक सार्थक प्रतीत होता है। व्यापार, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, शिक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के बहुआयामी आयाम इस संबंध को व्यापक आधार प्रदान करते हैं। यदि घोषित लक्ष्यों को समयबद्ध और पारदर्शी ढंग से लागू किया जाता है, तो 50 अरब डॉलर का व्यापारिक लक्ष्य और ऊर्जा, रणनीतिक साझेदारी ठोस उपलब्धियों में परिवर्तित हो सकती है। अंतत: सीईपीए जैसे समझौते भविष्य में भारत-कनाडा के मध्य स्थिर, संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी आर्थिक साझेदारी की मजबूत नींव स्थापित करेंगे। यदि दोनों नेतृत्व इस दिशा में दृढ़ रहते हैं, तो भारत-कनाडा संबंधों की यह नई पारी उम्मीदों से भरी है, पर इसकी सफलता सतत प्रयास, पारस्परिक सम्मान और व्यावहारिक प्रतिबद्धताओं पर निर्भर करेगी।-अनुज आचार्य

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