Vaishakh Month 2026: 3 अप्रैल 2026 हिंदू नववर्ष का दूसरा महीना ‘वैशाख’ शुरू होने जा रहा है. शास्त्रों में इसे पुण्य अर्जित करने और जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति दिलाने वाला महीना बताया गया है. स्कंद पुराण के अनुसार, जिस प्रकार विद्याओं में वेद, मंत्रों में प्रणव (ॐ) और वृक्षों में कल्पवृक्ष श्रेष्ठ है, उसी प्रकार मासों में वैशाख मास को सर्वोत्तम माना गया है.
माधव मास: नाम में ही छिपी है महिमा
वैशाख को ‘माधव मास’ कहा जाता है. ‘माधव’ भगवान विष्णु के अनेक नामों में से एक है. मान्यता है कि इस पूरे महीने में श्री हरि जल में निवास करते हैं. यही कारण है कि वैशाख में सूर्योदय से पूर्व पवित्र नदियों में स्नान करने का विशेष महत्व है. स्कंद पुराण के अनुसार, जो व्यक्ति इस महीने में नियमपूर्वक भगवान विष्णु की आराधना करता है, उसे अश्वमेध यज्ञ के समान फल प्राप्त होता है.
वैशाख में भगवान विष्णु ने लिए ये अवतार
भगवान विष्णु के कई महत्वपूर्ण अवतार इसी महीने में हुए थे.
- परशुराम अवतार: वैशाख शुक्ल तृतीया (अक्षय तृतीया) को भगवान परशुराम का प्राकट्य हुआ.
- नृसिंह अवतार: वैशाख चतुर्दशी को भगवान ने भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए नृसिंह रूप धारण किया.
- कूर्म अवतार: इसी महीने में श्री हरि ने कछुए का रूप धारण कर समुद्र मंथन में मंदराचल पर्वत को सहारा दिया था.
इतने पावन अवतारों का साक्षी होने के कारण यह महीना विष्णु भक्तों के लिए उत्सव के समान होता है.
लोक कल्याण और दान की परंपरा
वैशाख के महीने में गर्मी अपने चरम की ओर बढ़ रही होती है. भगवान विष्णु ‘करुणा’ के सागर माने जाते हैं. शास्त्रों में कहा गया है कि इस महीने में प्यासों को पानी पिलाना, प्याऊ लगवाना, छायादार वृक्ष लगाना और पंखे व सत्तू का दान करना सीधे भगवान विष्णु की सेवा के बराबर है.
नारद पुराण के अनुसार, “न वैशाख समो मासो, न सत्येन समं तपः.”अर्थात् वैशाख के समान कोई मास नहीं है और सत्य के समान कोई तप नहीं है.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है.)

