देश के कई राज्यों में निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों को महंगी किताबें और यूनिफॉर्म खरीदने के लिए मजबूर करने के मामले सामने आ रहे हैं। कई बार स्कूल किसी खास दुकान या कंपनी, कभी-कभी तो खुद स्कूल ही अपना सामान खरीदने का दबाव अभिभावकों पर बनाता हैं। हालांकि यह नियमों के खिलाफ है। प्रशासन ने स्कूलों की इस ‘लूट’ को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। केंद्र हो या राज्य शिक्षा विभाग का साफ कहना है कि स्कूलों की मनमानी नहीं चलेगी और अभिभावक सीधे शिकायत दर्ज कर सकते है। यदि कोई स्कूल नियमों का उल्लंघन करता पाया गया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

शिकायतों के लिए चरणबद्ध प्रक्रिया

अभिभावकों के पास भी अब अपनी आवाज उठाने के कई कानूनी रास्ते उपलब्ध हैं। अगर कोई स्कूल आपको किसी विशेष स्थान से महंगी किताबें या ड्रेस लेने के लिए बाध्य करता है, तो आप इस तरह से उसकी शिकायत कर सकते हैं।

स्कूल मैनेजमेंट को लिखित शिकायत: सबसे पहले स्कूल के प्रिंसिपल या मैनेजमेंट को लिखित में अपनी आपत्ति जताएं। ध्यान रखें कि अपनी शिकायत की ‘रिसीविंग’ जरूर लें।

जिला शिक्षा अधिकारी (DEO): यदि स्कूल स्तर पर सुनवाई नहीं होती है, तो आप अपने जिले के शिक्षा अधिकारी या ब्लॉक शिक्षा अधिकारी से संपर्क करें। उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में इसके लिए ‘डिस्ट्रिक्ट फी रेगुलेटरी कमेटी’ भी बनाई गई है। दिल्ली में निजी या सरकारी स्कूलों से संबंधित किसी भी शिकायत के लिए शिक्षा निदेशालय के हेल्पलाइन नंबर 1800116888 पर कॉल किया जा सकता है। महाराष्ट्र में अभिभावक शिक्षा विभाग की हेल्पलाइन 18002337955 पर कॉल कर स्कूलों के खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

बाल अधिकार संरक्षण आयोग: अभिभावक अपनी शिकायत राज्य या राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) में भी दर्ज करा सकते हैं।

ऑनलाइन पोर्टल: केंद्र सरकार के ‘PM Grievance Portal’ पर भी इस तरह की मनमानी की शिकायत ऑनलाइन की जा सकती है।

CBSE से सीधी शिकायत: यदि स्कूल सीबीएसई से जुड़ा है, तो आप बोर्ड के क्षेत्रीय या केंद्रीय कार्यालय में सीधे शिकायत भेज सकते हैं।

कानूनी विकल्प और कोर्ट का रुख

स्कूलों की इस मनमानी के खिलाफ अभिभावकों के पास कानूनी अधिकार भी हैं। यदि विभाग स्तर पर समाधान नहीं मिलता है, तो कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दाखिल की जा सकती है। हाल ही में दिल्ली हाईकोर्ट ने इसी तरह की एक याचिका पर संज्ञान लेते हुए प्रशासन को नोटिस जारी किया था।

मिलकर आवाज उठाना जरूरी

अक्सर अभिभावक अपने बच्चे के भविष्य और स्कूल की नाराजगी के डर से इस खुलेआम लूट को चुप होकर सहते हैं। लेकिन विशेषज्ञों का मानना ​​है कि यह समस्या किसी एक अभिभावक की नहीं, बल्कि उक्त विद्यालय के सभी बच्चों के अभिभावकों की होती है। जब तक सभी अभिभावक संगठित होकर आवाज नहीं उठाएंगे, तब तक स्कूलों के इस ‘लूट तंत्र’ पर पूरी तरह लगाम लगाना मुश्किल होगा। जितने ज्यादा अभिभावक मिलकर शिकायत करेंगे, समाधान भी उतना ही तेज और संतोषजनक होगा।

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