शारीरिक या मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति इस उम्मीद के साथ डाक्टर और कैमिस्ट के पास जाता है कि यहां मिलने वाली दवा उसके लिए राहत का काम करेगी। लेकिन कुछ लोग चंद रुपयों के लालच में नकली दवाओं का काला कारोबार कर रहे हैं जिससे मरीजों को राहत मिलने की बजाय उनकी समस्या लगातार बढ़ रही है। इसी वर्ष सामने आए नकली दवाओं के निर्माण और बिक्री के मामले निम्न में दर्ज हैं :

* 8 फरवरी को ‘गाजियाबाद’ (उत्तर प्रदेश) पुलिस ने लिवर की नकली दवा बनाने और सप्लाई करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ कर ‘मुरादनगर’ में 5 लोगों को गिरफ्तार करके उनसे लिवर की 50,000 नकली गोलियां बरामद कीं। 
* 24 फरवरी को ‘दिल्ली’ पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 9 करोड़ रुपए मूल्य की ‘साइक्टोपिक’ की 18.47 लाख गोलियों के साथ 5 लोगों को गिरफ्तार किया। आरोपी इन दवाओं की आपूर्ति देश के अलग-अलग राज्यों के अलावा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी कर रहे थे।
* 28 फरवरी को मध्य प्रदेश में ‘सीधी’ पुलिस ने 251 शीशी कफ सिरप के साथ ‘जगदीश’ नामक एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया।

* 4 अप्रैल को ‘सीधी’ (मध्य प्रदेश) पुलिस ने ‘ओरनैक्स कफ सिरप’ की करीब 89,000 रुपए कीमत की 443 बोतलों के साथ ‘अशीष सिंह’ नामक आरोपी को गिरफ्तार किया। आरोपी के विरुद्ध एन.डी.पी.एस. के तहत मामला दर्ज किया गया है। 
* 5 अप्रैल को नई दिल्ली में क्राइम ब्रांच के साइबर सैल ने शूगर, बी.पी., संक्रमण और अन्य गंभीर बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली नामी कम्पनियों की नकली दवाइयां बनाने, उनकी आपूर्ति करने वाले एक यूनिट का भंडाफोड़ किया। पुलिस ने इस मामले में 6 लोगों को गिरफ्तार करके उनके कब्जे से 2 करोड़ रुपए मूल्य की 1.2 लाख से ज्यादा गोलियां और कैप्सूल बरामद किए हैं। 
* 5 अप्रैल को ही ‘कानपुर’ पुलिस ने ‘कोडाइन कफ सिरप’ की आपूॢत के मामले में ‘शिवम अग्रवाल’ को गिरफ्तार किया। ‘शिवम’ पर 25,000 रुपए का ईनाम था। आरोपी इस सिरप को उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, हरियाणा, झारखंड और पश्चिम बंगाल के अलावा बंगलादेश में भी भेज रहा था। इस मामले में पुलिस को 6 अन्य आरोपियों की भी तलाश है।

* 5 अप्रैल को ही ‘जयपुर’ में राजस्थान ड्रग कंट्रोल विभाग की जांच में वी.ए.डी.एस.पी. फार्मास्युटिकल्स द्वारा राजस्थान में भेजे गए एंटीबायोटिक दवा ‘क्यूसिपोड 200’ के 3100 पत्ते लैबोरेटरी की जांच में नकली पाए गए। विभाग ने इस दवा के 2186 पत्तों को कब्जे में ले लिया है और स्वास्थ्य विभाग ने शेष दवा जल्द से जल्द बाजार से हटाने के आदेश दिए हैं।  
* 6 अप्रैल को ‘वाराणसी’ (उत्तर प्रदेश) की स्थानीय अदालत ने नकली कफ सिरप ‘कोडाइन’ को देश के अलावा बंगलादेश में बेचने के मामले में फरार मुख्यारोपी ‘शुभम जायसवाल’ को भगौड़ा करार दे दिया। इस मामले में ‘शुभम’ सहित कुल 27 आरोपियों के विरुद्ध वाराणसी में मामला दर्ज किया गया था। 

नकली दवाओं को रोकने के लिए ड्रग्स एंड कास्मैटिक एक्ट (1940), फार्मेसी एक्ट (1948) सहित कुल 7 कानून हैं लेकिन इन कानूनों का सख्ती से पालन न होने के कारण नकली दवाओं का कारोबार लगातार बढ़ रहा है। राज्यसभा में पेश की गई जानकारी के अनुसार 2021 में जांच के दौरान 2652 दवाओं के नमूने जांच में फेल पाए गए थे। 2023 में यह संख्या बढ़कर 3053 और 2025 में बढ़कर 3104 हो गई है। ऐसे में नकली दवाओं का कारोबार रोकने के लिए मौजूदा कानूनों का सख्ती से पालन करने और ऐसे मामले में आरोपियों को सख्त से सख्त सजा दिलाए जाने की जरूरत है ताकि नकली दवाओं के जरिए लोगों की जिंदगी के साथ हो रहे खिलवाड़ को रोका जा सके।

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