नई दिल्ली – उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने नई दिल्ली में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (आईजीएनओयू-इग्नू) के 39वें दीक्षांत समारोह में भाग लिया, जहां 32 लाख से अधिक छात्रों ने अपनी डिग्री, डिप्लोमा और प्रमाण पत्र प्राप्त किए।

उपराष्ट्रपति ने इग्नू की परिवर्तनकारी भूमिका पर प्रकाश डालते हुए इसे देश की खुली और दूरस्थ शिक्षा प्रणाली का स्तंभ बताया, जिसने देश भर में उच्च शिक्षा को सबके लिए महत्वपूर्ण रूप से सुलभ बनाया है। इसके समावेशी विस्तार पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि इग्नू में 14 लाख से अधिक छात्र हैं, जिनमें 56 प्रतिशत महिलाएं और 58 प्रतिशत ग्रामीण तथा वंचित समुदायों से आते हैं। 

उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय के छात्रों की संख्या कई देशों की जनसंख्या से अधिक है, जो शैक्षिक समानता, सामाजिक गतिशीलता और राष्ट्रीय विकास में इसके महत्वपूर्ण योगदान को दर्शाती है। उन्होंने छात्रों को आजीवन सीखते रहने, मूल्यों को बनाए रखने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया।

कोविड-19 महामारी का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि इग्नू अपने स्थापित दूरस्थ शिक्षा मॉडल के कारण सुदृढ़ बना रहा। उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय ने निर्बाध शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्वयं और ई-ज्ञानकोष जैसे डिजिटल प्लेटफार्मों का प्रभावी ढंग से उपयोग किया और यह प्रौद्योगिकी-आधारित शिक्षा में अग्रणी बनकर उभरा।

उपराष्ट्रपति ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) को अपनाए जाने का स्वागत करते हुए कहा कि इग्नू ने कई निकास विकल्पों (स्नातक कार्यक्रम के दौरान बीच में प्रमाण-पत्र के साथ पाठ्यक्रम छोड़ना) के साथ चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम शुरू किए हैं, जिससे उच्च शिक्षा अधिक लचीली और छात्र-केंद्रित हो गई है। उन्होंने आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय ज्ञान प्रणालियों के एकीकरण की भी सराहना की।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे उभरते उपकरण सीखने के अनुभवों को बेहतर बना सकते हैं, छात्रों को बेहतर सहायता प्रदान कर सकते हैं और व्यक्तिगत शिक्षा को सक्षम कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक विकास से डरने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि जब देश में कंप्यूटर आए थे, तब आशंकाएं थीं कि कंप्यूटर नौकरियां छीन लेंगे; हालांकि, अंततः कंप्यूटर आने से अधिक रोजगार सृजित हुए और राष्ट्रीय विकास में योगदान बढ़ा।

उपराष्ट्रपति ने आगे कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीकों को भी इसी तरह से अपनाया जाना चाहिए। हालांकि, उन्होंने ऐसी तकनीकों के जिम्मेदार और जवाबदेह उपयोग की जरूरत पर बल दिया।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत नैतिक मूल्यों में उसका विश्वास है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आधुनिक विकास हमारी परंपराओं के साथ-साथ चलना चाहिए और वैज्ञानिक प्रगति नैतिक मूल्यों से निर्देशित होनी चाहिए।

उन्होंने अपने संबोधन के समापन में सामूहिक जिम्मेदारी पर जोर दिया और कहा कि व्यक्तिगत प्रयास, जब संयुक्त रूप से किए जाएंगे, तो वर्ष 2047 तक एक विकसित भारत के निर्माण में इससे काफी मदद मिलेगी।

उपराष्ट्रपति ने देश भर के छात्रों की सुगमता सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय शैक्षणिक भंडार (एनएडी) के तहत डिजिलॉकर पर प्रमाण पत्र जारी किए। उन्होंने इग्नू पूर्व छात्र पोर्टल का भी शुभारम्भ किया, जिसमें 50 लाख से अधिक पंजीकरण हो चुके हैं।

इस अवसर पर दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू; इग्नू की कुलपति प्रो. उमा कांजीलाल; और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। उपराष्ट्रपति ने देश भर के क्षेत्रीय इग्नू केंद्रों में स्वयं प्रभा स्टूडियो का भी शुभारम्भ किया। त्रिपुरा के राज्यपाल इंद्र सेना रेड्डी नल्लू, गोवा के राज्यपाल पुसापति अशोक गजपति राजू, राजस्थान के उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेम चंद बैरवा और अन्य गणमान्य व्यक्ति अपने-अपने राज्य के क्षेत्रीय इग्नू केंद्रों से आभासी माध्यम से इस कार्यक्रम में शामिल हुए।

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