तिरुवनंतपुरम : केरल में 9 अप्रैल को मतदान है। एक ओर 10 बरसों से सत्ता से बाहर कांग्रेस नेतृत्व वाला यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट ( UDF ) है, तो दूसरी ओर मुख्यमंत्री पिनराई विजयन का लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट ( LDF ), UDF के लिए यह चुनाव करो या मरो की लड़ाई बन गया है और विजयन के विकास और योजनाओं के बूते LDF तीसरी बार सत्ता में लौटने का दावा कर रहा है। मुकाबले को NDA ने और दिलचस्प बना दिया है। बीजेपी यहां सीमित आधार के बावजूद वोट शेयर बढ़ाकर खेल बिगाड़ने की स्थिति में दिख रही है।

अंतर्कलह बनी चुनौती

चुनाव का बड़ा मुद्दा LDF सरकार के खिलाफ संभावित एंटी-इनकम्बेंसी है। राज्य में पिछले 10 बरसों से वाम मोर्चा सत्ता में है और विपक्ष इसी को हथियार बना रहा है। UDF का दावा है कि हालिया निकाय चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में उसके बेहतर प्रदर्शन ने सत्ता में वापसी की जमीन तैयार की है। LDF के भीतर असंतोष भी इसमें भूमिका निभा सकता है।

हालांकि, UDF के लिए उसका अपना संगठन और नेतृत्व ही चुनौती बन सकता है। LDF पूरी तरह विजयन के चेहरे पर चुनाव लड़ रही है, जबकि UDF ने अब तक अपने मुख्यमंत्री उम्मीदवार का नाम नहीं बताया है। केरल चुनाव में प्रचार के दौरान राहुल गांधी ने नेताओं की आपसी कलह दूर करने की कोशिश तो की है, लेकिन यह प्रयास सफल होता है या नहीं यह चुनावी नतीजों से पता चलेगा। केरल में मुसलमान और ईसाइयों की भूमिका निर्णायक है और UDF का झुकाव इनमें ज्यादा है। UDF को उम्मीद है कि अल्पसंख्यक वोटों का मजबूत ध्रुवीकरण उसके पक्ष में हो सकता है। अगर ऐसा हुआ तो UDF को कई सीटों पर फायदा मिलेगा।

बीजेपी कमजोर नहीं

केरल में बीजेपी भले अब तक सत्ता से दूर है, लेकिन उसका वोट शेयर 12-15% हो चुका है। त्रिशूर लोकसभा और तिरुवनंतपुरम नगर निगम में उसके प्रत्याशियों की जीत ने यह बता दिया है कि पार्टी का प्रभाव बढ़ रहा है। यह UDF के लिए दोधारी तलवार की तरह है, क्योंकि यह LDF के वोट बैंक में सेंध लगाने के साथ त्रिकोणीय मुकाबले में UDF का खेल बिगाड़ सकता है।

इस बार चुनाव में सबरीमाला विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। 2019 के लोकसभा चुनाव में भी यह मुद्दा बना था। अब मंदिर से सोने की चोरी को लेकर UDF लगातार LDF सरकार पर हमलावर है। भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलता के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। हालांकि, LDF को अपनी कल्याणकारी योजनाओं पर पूरा भरोसा है

केरल के निकाय चुनावों को विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा था। इन चुनावों में UDF की बढ़त ने कार्यकर्ताओं में जोश भरा है। केरल में पिछले 15 बरसों का इतिहास है कि पंचायत और नगर निकाय चुनावों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले गठबंधन ने विधानसभा चुनाव में भी दमदार प्रदर्शन किया है।

मुकाबला आसान नहीं

भले ही इस बार के चुनाव को UDF बड़ा अवसर मान रहा हो, लेकिन मुकाबला आसान नहीं होने वाला है। एंटी-इनकम्बेंसी, हालिया प्रदर्शन और सामाजिक समीकरण उसके पक्ष में जाते दिख रहे हैं, लेकिन जीत अंतर्कलह और मतभेद दूर करने से ही मिलेगी। अगर गठबंधन ऐसा कर लेता है, तब वापसी संभव है। मगर, तालमेल में थोड़ी भी कमी दिखी तो LDF इतिहास रच देगा। 4 मई को आने वाले नतीजों से तस्वीर साफ हो जाएगी।।

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