गुवाहाटी: पांच राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनावों में से तीन राज्य असम, केरल और पुडुचेरी में वोटिंग हो गई। असम और पुडुचेरी में वोटरों ने पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए। असम में 2021 से 3.31 प्रतिशत ज्यादा 85.73 प्रतिशत वोटिंग हुई। केरल में भी 2.27 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 78.27 फीसदी मतदान हुआ। पुडुचेरी पिछले चुनाव से करीब सात फीसदी ज्यादा 91.23 प्रतिशत वोटरों ने मतदान किया। असम में भारी मतदान को हिमंत बिस्व सरमा ने प्रो-इम्कबेंसी बताते हुए सत्ता में वापसी दावा किया है। कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने इसे केरल में यूडीएफ की वापसी के संकेत माना है। कांग्रेस पुडुचेरी में वापसी को लेकर उत्साहित है।

असम भारी मतदान की परंपरा, बदलाव के आसार कम

पहले बात असम की, जहां 2021 में 82.42 और 2016 में 84.72 प्रतिशत मतदान हुआ था। 15 साल पहले मतदान में करीब सात फीसदी का इजाफा हुआ था और सरकार बदल गई थी। 15 साल से चल रही कांग्रेस विपक्ष में चली गई। असम में गुरुवार को इतिहास बना मगर वोटिंग में मामूली बढ़त के साथ। असम के पारंपरिक वोटिंग पैटर्न को देखते हुए इसे बदलाव की आहट नहीं माना जा सकता है। चार दशक से असम में 75 फीसदी से ज्यादा वोटिंग और दो बार सरकार रिपीट होने की परंपरा रही है।

पिछले मुकाबलों को कितना रहा वोटिंग प्रतिशत

2011 में पूर्वोत्तर के राज्य असम में 76.04 और 2006 में 75.77 फीसदी मतदान हुआ। दोनों चुनावों में कांग्रेस की गौरव गोगोई सरकार रिपीट करने में सफल रहे। 2001 के असम विधानसभा चुनाव में 1996 के मुकाबले तीन प्रतिशत कम 75.1 प्रतिशत मतदान हुआ था। तब असम गण परिषद की सरकार चली गई थी और कांग्रेस को सत्ता मिली थी। इस चुनाव में कांग्रेस, एआईयूडीएफ, बीजेपी ने पूरी ताकत झोंकी थी।

केरल में मामूली बदलाव से बदल जाती है सरकार

विधानसभा चुनाव से ही केरल के वोटर मतदान में अव्वल रहे हैं। 1957 के विधानसभा चुनाव में 85.72 प्रतिशत वोटिंग हुई थी, जो आज तक राज्य के चुनावी इतिहास रिकॉर्ड है। 75 फीसदी मतदान केरल का औसत वोटिंग प्रतिशत रहा है। पिछले चुनावों में केरल में 1.31 से 3 फीसदी तक वोट प्रतिशत बदला और सरकार बदल गई। 2021 में 1.53 प्रतिशत कम वोटिंग हुई थी और एलडीएफ की सरकार दोबारा बनी थी। केरल विधानसभा चुनाव 2026 में 2.27 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। यहां वोटिंग के पहले प्रचार के दौरान बीजेपी की बढ़ती ताकत और एंटी इम्कबेंसी का असर भी दिखा, जिसे नजर अंदाज करना मुश्किल है। 2021 को अपवाद मान लें तो केरल एक बार फिर अपने पुराने पैटर्न यानी सरकार में बदलाव वाली परंपरा में जा सकता है। एसआईआर के बाद यहां 2 प्रतिशत वोटर कम हो गए थे।

पुडुचेरी में औसतन 85 फीसदी वोटिंग होने की परंपरा रही

10 लाख वोटर वाले पुडुचेरी में औसतन 85 फीसदी वोटिंग होने की परंपरा रही है, मगर इस बार सात फीसदी ज्यादा 91.23 प्रतिशत ज्यादा मतदान हुआ है। यहां मुकाबला ऑल इंडिया एन आर कांग्रेस के नेतृत्व वाले एनडीए और डीएमके-कांग्रेस गठबंधन के बीच है। पुडुचेरी की राजनीति तमिलनाडु से प्रभावित होती है। अगर तमिलनाडु में ज्यादा मतदान हुआ तो यह बदलाव का संकेत माना जा सकता है।

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