रायपुर। जल संसाधन विभाग के अनुकंपा नियुक्ति के एक प्रकरण के सीधे और सरल प्रक्रिया को मंत्रालय में मध्यप्रदेश से आये बुद्धिजीवी अधिकारी कर्मचारियों ने कृत्रिम जटिलता एवं कठिनाईयुक्त बनाते हुए इसे रोक दिया गया है। आपकों बता दें कि इस प्रकरण को लेकर राज्यपाल द्वारा दो दफा मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पत्र लिखा जा चुका है, लेकिन इसके बाद भी उन पर कोई असर नहीं हुआ है। विदित हो कि आवेदिका सरिता ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, विभागीय मंत्री रविन्द्र चौबे को आवेदन दे चुकी है, इसके बाद उन्होंने उम्मीद की आस लगाये राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके को भी आवेदन दिया। राज्यपाल ने आवेदिका सरिता के अनुकंपा नियुक्ति संबंधी आवेदन पर गंभीरतापूर्वक मनन करते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को दिनांक 23 दिसंबर वर्ष 2019 और 11 नवंबर 2019 को स्व. श्री रामखिलावन वर्मा तत्कालीन अमीन पटवारी जलसंसाधन विभाग, बिलासपुर की पुत्री श्रीमती सरिता वर्मा की अनुकंपा नियुक्ति के संबंध में पत्र लिखा। इसके अलावा मुख्य सचिव को भी इसी प्रकरण से संबंधित पत्र राजभवन से दिनांक 30 अक्टूबर 2019 को प्रेषित हुआ है, जिसमें आवेदिका द्वारा प्रकरण में केबिनेट की मंजूरी दिलाकर अनुकंपा नियुक्ति दिये जाने का अनुरोध किया गया है। राज्यपाल द्वारा मुख्यमंत्री को लिखे गये पत्र में उन्होंने आवेदिका सरिता वर्मा के अनुकंपा नियुक्ति के संबंध में अवलोकन करने का कष्ट करने का आग्रह किया गया। राज्यपाल ने पत्र में आगे कहा कि मेरे द्वारा श्रीमती सरिता वर्मा, गायत्री नगर डंगनिया, रायपुर छग के अनुकंपा नियुक्ति प्रकरण को विशेष मानवीय आधार पर अनुकंपा नियुक्ति प्रदान करने हेतु लिखा गया है। उल्लेखनीय है कि आवेदिका यह प्रकरण अविभाजित मध्यप्रदेश के समय का होने, प्रकरण तीन वर्ष से अधिक समय तक लंबित होने की वजह से पात्रता समाप्त होने एवं अनुकंपा नियुक्ति के वर्तमान नियमों का उल्लेख करते हुए समाप्त कर दिया गया है। जबकि जल संसाधन विभाग द्वारा अपनी टीम में विलंब के लिये आवेदिका को जिम्मेदार नहीं माना गया है। विदित हो कि तत्कालीन समय में प्रशासकीय शिथिलता की वजह से प्रकरण लंबित रहा है और इसी बीच प्रदेश का विभाजन हो गया और छत्तीसगढ़ में अनुकंपा नियुक्ति के नियम बदल गये जिसकी वजह से यह स्थिति उत्पन्न हुई है। ज्ञातव्य हो कि मेरे संदर्भित पत्र का प्रति उत्तर प्राप्त नहीं हुआ है। अस्तु आपसे अनुरोध है कि इस पत्र पर व्यक्तिगत तौर पर ध्यान देकर प्रकरण को विशेष प्रकरण मानकर मानवीय आधार पर आवश्यक कार्यवाही करने का कष्ट करें। पत्र में राज्यपाल सुश्री उइके ने यह भी कहा कि आपके द्वारा की गई कार्यवाही मुझे भी अवगत कराने का कष्ट करें। लेकिन विडंबना यह है कि राज्यपाल द्वारा लिखे गये इन पत्रों का भी मुख्यमंत्री पर कोई असर नहीं हुआ है। और इसी के चलते अब तक यह प्रकरण का निपटारा नहीं हो पाया है।
