नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर के बीच उपराष्ट्रपति जेडी वेंस शांति वार्ता के लिए पाकिस्तान के इस्लामाबाद पहुंच गए हैं। जब युद्ध शुरू हुआ था तो जेडी वेंस नहीं चाहते थे कि अमेरिका और ईरान के बीच ये लड़ाई हो।
छह हफ्तों बाद वह खुद को इस्लामाबाद में हैं। वह ईरान के शीर्ष नेताओं के साथ बातचीत करने के लिए तैयार हैं, ताकि उस युद्ध को खत्म किया जा सके जिसने वैश्विक बाजारों में हलचल मचा दी है।
बातचीत के लिए जेडी वेंस को क्यों चुना गया?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेहरान की एक इच्छा पूरी करने के लिए बातचीत की अगुवाई करने के लिए वेंस को खास तौर पर चुना गया था। ईरान के नेतृत्व के एक तबके के लिए वेंस बातचीत के लिए एक स्वीकार्य चेहरा थे। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने बताया कि उनमें से कई लोगों ने दबे शब्दों में उन्हें बातचीत का हिस्सा बनाने की मांग की थी।
सूत्रों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में बताया गया है कि ईरान में वेंस को राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के करीबी लोगों में से एक ऐसे चेहरे के तौर पर देखा जाता है जो युद्ध के सबसे ज्यादा खिलाफ हैं। इसी वजह से तेहरान का मानना है कि ट्रंप के प्रतिनिधियों में से बातचीत के लिए वेंस ही सबसे ज्यादा संभावित व्यक्ति हैं।
‘ज्यादा समझदार व्यक्ति हैं जेडी वेंस’
उनका इस दल में शामिल होना ईरान में शांति स्थापित करने वाले एक संभावित मध्यस्थ के रूप में उनकी छवि के कारण और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। वेंस को युद्ध की रणनीति में कम और उसे समाप्त करने में ज्यादा दिलचस्पी रखने वाला माना जाता है।
ईरानी वार्ताकारों का मानना है कि वह बातचीत करने वाले ज्यादा समझदार व्यक्ति हैं। सैन्य टकराव को लेकर उनके पहले के संशय से यह धारणा बनी है कि वह किसी न किसी निष्कर्ष पर पहुंचने की कोशिश करेंगे।
जानकारों का मानना है कि अगर यह बातचीत सफल होती है तो इससे उपराष्ट्रपति वैंस की लोकप्रियता और बढ़ सकती है। वह 2028 के रिपब्लिकन राष्ट्रपति पद के नामांकन के लिए शुरुआती दौर में ही सबसे आगे चल रहे हैं।

