जिस चीन से भारत पहले भर-भरकर इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट (पुर्जे) आयात कर रहा था, उस ड्रैगन को भारत ने 2025-26 में 3.5 अरब डॉलर के इलेक्ट्रॉनिक्स पार्ट्स निर्यात किए। जनवरी तक भारत 2.8 अरब डॉलर का आंकड़ा पार कर चुका था, जो पिछले साल के 0.92 अरब डॉलर के मुकाबले 4 गुना ज्यादा है। यह अपने आप में उपलब्धि है। पीएलआई स्कीम से मेक इन इंडिया को मिले बढ़ावे और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्टरिंग कंपोनेंट स्कीम (ईसीएमएस) के कारण एपल के भारतीय वेंडर्स ने वित्त वर्ष 2025-26 में जनवरी तक चीन को रेकॉर्ड 2.5 अरब डॉलर के कंपोनेंट्स व सब- असेंबली पार्ट्स का निर्यात किया।
आइफोन की बादशाहत
इस बदलाव के पीछे फॉक्सकॉन, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और पेगाट्रॉन जैसे दिग्गज एप्पल वेंडर्स हैं। पिछले वित्त वर्ष के दौरान भारत में कुल 70 अरब डॉलर मूल्य के आइफोन का उत्पादन हुआ, जिसमें से 73% हिस्सा यानी लगभग 51 अरब डॉलर विदेशी बाजारों को निर्यात किया गया। इस शानदार प्रदर्शन की बदौलत आइफोन देश की सबसे बड़ी निर्यात होने वाली वस्तु बनकर उभरा है। इस साल चीन को भारत से होने वाला कुल निर्यात 18 अरब डॉलर से अधिक रहने की उम्मीद है।
ये पार्ट्स किये निर्यात
चीन को निर्यात बढ़ाने में एपल के प्रमुख सप्लायर्स में फॉक्सकॉन, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, पेगाट्रोन, मदरसन ग्रुप, टाटा रियल्टी और युझान टेक्नोलॉजी शामिल हैं। ये वेंडर्स ड्रैगन को प्रिंटेड सर्किट बोर्ड असेंबली (पीसीबीए), मैकेनिकल पार्ट्स, हाउसिंग, फ्लेक्स पीसीबीए और कंडक्टिव ग्रेफाइट बटन जैसे कंपोनेंट निर्यात कर रहे हैं।
अकल्पनीय ऐतिहासिक उपलब्धि
नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत ने कहा कि एपल इकोसिस्टम ने अब चीन को कंपोनेंट्स और सब असेंबली का निर्यात शुरू कर दिया है। जब स्मार्टफोन पीएलआइ योजना की पहली बार परिकल्पना की गई थी, तब यह बात अकल्पनीय थी।
व्यापार घाटा कम करने में मदद
भारत अभी भी चीन से भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक्स आयात करता है। वित्त वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा 40 अरब डॉलर रहा। भारत अब खुद पीसीबीए, मैकेनिक्स जैसे कंपोनेंट्स बनाकर चीन को भेज रहा है। इससे चीन के साथ बढ़ते व्यापार घाटे को कम करने में मदद मिलेगी। जानकारों का मानना है कि जल्द ही भारतीय कंपनियां ग्लोबल मोबाइल उत्पादन में 30-35% की हिस्सेदारी रख सकती हैं।

