आजकल जब भी हम टीवी खोलते हैं या सोशल मीडिया देखते हैं, तो बस युद्ध और तनाव की खबरें ही नजर आती हैं. खासकर वेस्ट एशिया (Middle East) में जो हालात बने हुए हैं, उन्हें देखकर हर आम आदमी के मन में एक ही डर था- क्या पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस महंगी हो जाएगी? क्या रसोई गैस पहले की तरह आसानी से मिलेगी? लेकिन आपके लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी है. भारत सरकार ने साफ कर दिया है कि दुनिया में चाहे कितनी भी उथल-पुथल मची हो, आपके घर की रसोई का बजट और गैस की सप्लाई पर कोई आंच नहीं आने वाली है. सरकार ने गैस सिलेंडर पर एक ऐसी राहत दी है, जिससे लगने लगा है कि जल्द ही पुराने दिन लौट आएंगे.
दिल्ली में हुई एक हाई-लेवल मीटिंग में पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्रालय की सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने देशवासियों को एक बड़ा भरोसा दिया है. उन्होंने बताया कि सरकार ने डोमेस्टिक एलपीजी (LPG) के प्रोडक्शन को काफी ज्यादा बढ़ा दिया है, ताकि बाहरी देशों के संकट का असर हमारे देश के आम आदमी की जेब पर न पड़े. सबसे अच्छी बात यह है कि गैस बुकिंग की डेडलाइन को भी बढ़ा दिया गया है, चाहे आप शहर में रहते हों या गांव में, अब आपको बुकिंग के लिए भाग-दौड़ करने की जरूरत नहीं है. सरकार का कहना है कि देश के किसी भी कोने में, किसी भी गैस एजेंसी के पास स्टॉक की कोई कमी नहीं है और सप्लाई बिल्कुल स्टेबल है.
गैस की कालाबाजारी और गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए सरकार अब डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (DAC) सिस्टम को बहुत सख्ती से लागू कर रही है. सुजाता शर्मा ने जानकारी दी कि सरकार ने इस सिस्टम के इस्तेमाल को 90 प्रतिशत तक ले जाने का टारगेट रखा था, लेकिन खुशी की बात यह है कि हम पहले ही 92 प्रतिशत के आंकड़े पर पहुंच चुके हैं. इसका सीधा मतलब यह है कि अब गैस सिलेंडर सीधे असली हकदार के पास ही पहुंचेगा और बीच में कोई गड़बड़ी नहीं हो पाएगी. इसके अलावा, कमर्शियल गैस की सप्लाई को भी 70 परसेंट तक फिर से पटरी पर ला दिया गया है, जो बिजनेस करने वालों के लिए एक बड़ी राहत है.
छोटे सिलेंडरों की मांग में भी जबरदस्त उछाल देखा जा रहा है. अगर पिछले कुछ दिनों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो 5 किलो वाले छोटे सिलेंडरों की बिक्री काफी बढ़ गई है. सरकार ने इस बारे में जागरूकता फैलाने के लिए देश भर में करीब 7,000 कैंप लगाए हैं, जिसका नतीजा यह रहा कि 3 अप्रैल से अब तक एक लाख से ज्यादा 5 किलो वाले सिलेंडर बेचे जा चुके हैं. यह उन लोगों के लिए बहुत मददगार साबित हो रहा है जो एक साथ बड़ा सिलेंडर नहीं खरीद सकते या जिन्हें कम गैस की जरूरत होती है.
समुद्री रास्तों से आने वाले तेल और गैस की सुरक्षा को लेकर भी सरकार पूरी तरह मुस्तैद है. शिपिंग मंत्रालय के डायरेक्टर मनदीप सिंह रंधावा ने एक बड़ा अपडेट देते हुए बताया कि भारत का जहाज ‘देशगरिमा’, जो 97,000 मीट्रिक टन कच्चा तेल लेकर आ रहा है, बिल्कुल सुरक्षित है. यह जहाज हाल ही में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से बिना किसी रुकावट के गुजर चुका है. हालांकि, पिछले 48 घंटों में उस इलाके में गोलीबारी की कुछ घटनाएं हुई थीं, जिसमें भारत के दो जहाज ‘सनमार हेराल्ड’ और ‘जग अर्णव’ भी आसपास थे, लेकिन अच्छी बात यह है कि किसी भी क्रू मेंबर को कोई चोट नहीं आई और सब सुरक्षित हैं.
विदेश मंत्रालय भी इस पूरी स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए है. एडिशनल सेक्रेटरी असीम आर. महाजन ने बताया कि खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा सरकार की पहली प्राथमिकता है. इसके लिए एक स्पेशल कंट्रोल रूम बनाया गया है, जो चौबीसों घंटे काम कर रहा है. सरकार हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश के संपर्क में है ताकि किसी भी इमरजेंसी की स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाई जा सके. इसी सिलसिले में नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (NSA) अजीत डोभाल ने भी सऊदी अरब का दौरा किया और वहां के बड़े मंत्रियों से क्षेत्र के हालातों और भारत के रिश्तों पर लंबी चर्चा की.
ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए भी सरकार ने एक बहुत जरूरी बात कही है. रूरल डेवलपमेंट डिपार्टमेंट के जॉइंट सेक्रेटरी अमित शुक्ला ने भरोसा दिलाया है कि दुनिया में चाहे जो भी अनिश्चितता हो, गांवों के विकास के लिए फंड की कोई कमी नहीं होगी. उन्होंने साफ किया कि जब तक नया कानून VB-G RAM G Act, 2025 लागू नहीं हो जाता, तब तक मनरेगा (MGNREGA) स्कीम पहले की तरह ही चलती रहेगी. यानी ग्रामीणों को रोजगार और घर बनाने के लिए मिलने वाले पैसों पर कोई खतरा नहीं है.
कुल मिलाकर देखें तो सरकार ने हर मोर्चे पर तैयारी पुख्ता कर ली है. चाहे वह गैस की सप्लाई हो, समुद्री रास्तों की सुरक्षा हो या फिर गांवों का विकास, आम आदमी को घबराने की कोई जरूरत नहीं है. सरकार की इन कोशिशों से यह तो साफ है कि आने वाले समय में भी हमें गैस की किल्लत या महंगाई का वो डर नहीं सताएगा जिसकी आशंका जताई जा रही थी. यह कदम वाकई में करोड़ों भारतीयों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है.

