रांची: झारखंड ट्रेजरी घोटाले के बाद सरकारी कर्मचारियों के वेतन पर ब्रेक लग गया है। अप्रैल का महीने बीतने को है, मगर करीब 3 लाख कर्मचारियों सैलरी कब आएगी किसी को नहीं पता। हद तो तब है, जब इसके बारे में कोई भी कुछ बोलने को तैयार नहीं है। दरअसल, झारखंड में करोड़ों के ट्रेजरी घोटाले के खुलासे के बाद राज्य की वित्तीय व्यवस्था में हड़कंप मचा है। पुलिस और पशुपालन विभाग में पेरोल सिस्टम में सेंधमारी कर ‘फर्जी’ कर्मचारियों के नाम पर सरकारी धन की निकासी की गई। इस धोखाधड़ी के सामने आने के बाद सरकार ने उच्चस्तरीय जांच और पोर्टल में तकनीकी सुधार के सख्त निर्देश दिए हैं।

ट्रेजरी घोटाले ने फंसाई सैलरी

झारखड में ट्रेजरी स्कैम के बाद प्रशासनिक सख्ती का सीधा असर राज्य के करीब 3 लाख लोक सेवकों (सरकारी अधिकारी-कर्मचारी) पर पड़ा है। 22 अप्रैल तक अधिकारियों, कर्मचारियों और मानदेय कर्मियों (संविदा) को वेतन नहीं मिल सका है। विभागीय चुप्पी के बीच सूत्रों का कहना है कि सुरक्षा ऑडिट और सिस्टम अपग्रेडेशन के कारण भुगतान रुका है। घोटाले की जांच और वेतन में देरी ने सरकारी गलियारों में बेचैनी बढ़ा दी है।

झारखंड के सभी 33 ट्रेजरी में जांच

पूरे मामले में राज्य सरकार ने झारखंड के सभी 24 जिलों के 33 कोषागारों से हुई निकासी की जांच के आदेश दिए हैं। जांच की रडार में राज्य के आठ जिले हैं, लेकिन सरकार ने सभी 24 जिलों के 33 कोषागारों से हुई निकासी की जांच के आदेश दिए हैं। सबसे पहले फर्जी निकासी का मामला बोकारो में सामने आया था। उसके बाद हजारीबाग में भी कुबेर पोर्टल में फर्जीवाड़ा कर अवैध निकासी का खुलासा हुआ। उसके कुछ दिन बाद रांची और रामगढ़ में अवैध निकासी का खुलासा हुआ।

एक-एक निकासी पर पैनी नजर

वित्त विभाग हर ट्रेजरी से वेतन के नाम पर की गई निकासी पर पैनी नजर रख रहा है। वित्त विभाग ने दुमका, गोड्डा और पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्तों को पत्र लिख कर ट्रेजरी निकासी की जांच रिपोर्ट मांगी है। अवैध निकासी की आंच बोकारो, हजारीबाग, रांची, रामगढ़ में पहुंच चुकी है। संदेह के घेरे में पलामू, दुमका, पूर्वी सिंहभूम और गोड्डा जिले हैं। अब तक की जांच के बाद सरकार ने कुबेर पोर्टल से वेतन बिल में छेड़छाड़ कर अवैध रूप से राशि निकालने के मामले को ट्रेजरी घोटाला की बजाय वेतन घोटाला बताया है। वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने कहा कि विभागों से अवैध रूप से पैसे निकाले गए हैं। ऐसे में उत्तरदायित्व संबंधित विभाग का है।

दो दिनों तक सुपर बॉस की मीटिंग

कोषागार (ट्रेजरी) से वेतन के नाम पर हुई फर्जी निकासी मामले की जांच अब तेज हो गई है। मामले के लिए गठित उच्च स्तरीय जांच समिति गुरुवार और शुक्रवार (23 और 24 अप्रैल) को बोकारो और हजारीबाग जिलों के उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक (एसपी) सहित ट्रेजरी से जुड़े अधिकारियों संग बैठक करेगी। यह बैठक वीडियो क्रांफ्रेसिंग के जरिए होगी। यह निर्णय समिति की मंगलवार को हुई बैठक में लिया गया। बैठक में वित्त विभाग अंतर्गत लेखा नियंत्रक, अंकेक्षण निदेशालय से निकासी से जुड़े दस्तावेज मांगे गए हैं। समिति में शामिल लेखा नियंत्रक नरेश झा को आवश्यक दस्तावेज जल्द पेश करने का निर्देश दिया गया है।

झारखंड का ट्रेजरी घोटाला क्या है?

  • झारखंड का हालिया ट्रेजरी घोटाला सरकारी खजाने में सेंधमारी का एक गंभीर मामला है।
  • पेरोल सिस्टम में हेरफेर कर ‘फर्जी’ कर्मचारियों के नाम दर्ज किए गए ताकि उनके नाम पर अवैध वेतन निकाला जा सके।
  • धोखाधड़ी के लिए रिटायर हो चुके कर्मियों के डेटा को सिस्टम में दोबारा ‘एक्टिव’ कर फंड हड़पा गया।
  • झारखंड का ट्रेजरी घोटाला मुख्य रूप से पुलिस और पशुपालन विभाग में सामने आया है।
  • गड़बड़ी मिलने के बाद पोर्टल में सुधार और जांच के कारण करीब 3 लाख कर्मियों का वेतन रुक गया है।
  • झारखंड सरकार ने मामले की गहन जांच और सुरक्षा ऑडिट के आदेश दिए हैं।
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