Sita Navami 2026: सीता नवमी को जानकी नवमी के नाम से भी जाना जाता है. हर साल यह पर्व वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि के दिन मनाया जाता है. इस दिन भक्त व्रत रखते हैं और माता सीता की पूजा-अर्चना करते हैं. मान्यता है कि ऐसा करने से घर-परिवार में खुशहाली बनी रहती है. कहते हैं कि इस शुभ दिन पर कुछ विशेष चीजें घर लाई जाएं, तो न केवल नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है, बल्कि माता लक्ष्मी की कृपा भी घर पर बनी रहती है.

माता लक्ष्मी के चरण चिह्न

सीता नवमी के दिन चांदी या अष्टधातु से बने लक्ष्मी चरण घर लाकर मंदिर में स्थापित करना बहुत शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इन्हें घर के मुख्य द्वार पर अंदर की ओर आते हुए लगाने से धन के आगमन के द्वार खुलते हैं.

शृंगार सामग्री

विवाहित महिलाओं के लिए यह दिन वरदान समान माना जाता है. इस दिन शृंगार की वस्तुएं जैसे सिंदूर, चूड़ियां और कुमकुम खरीदना और उन्हें माता सीता को अर्पित करना सौभाग्य बढ़ाता है. पूजा के बाद इस सामग्री का कुछ हिस्सा स्वयं प्रयोग करें और बाकी दान कर दें. इससे वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है.

तुलसी का पौधा

तुलसी को माता लक्ष्मी का ही रूप माना जाता है. यदि आपके घर में तुलसी का पौधा नहीं है या वह सूख गया है, तो सीता नवमी के दिन नया पौधा लाना और उसे उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में लगाना बेहद शुभ रहेगा. कहते हैं कि यह वास्तु दोषों को समाप्त करता है.

पीला वस्त्र और दक्षिणावर्ती शंख

भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की संयुक्त कृपा पाने के लिए इस दिन पीला वस्त्र और दक्षिणावर्ती शंख घर लाना चाहिए. शंख की ध्वनि से घर की नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है.

अस्वीकरण : इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यहां दी गई ज्योतिष, वास्तु या धार्मिक जानकारी मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। हम इसकी पूर्ण सटीकता या सफलता की गारंटी नहीं देते हैं। किसी भी उपाय, सलाह या विधि को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के प्रमाणित विशेषज्ञ या विद्वान से परामर्श अवश्य लें

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