रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन प्रदेश में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए मत्स्य पालकों को सभी जरूरी सहायता उपलब्ध करा रही है। मत्स्य पालकों को मत्स्य पालन की उच्च तकनीकी प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन, मत्स्य बीज उपलब्ध कराने के साथ मत्स्य पालन के लिए उपकरण एवं सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। दंतेवाड़ा जिले के कुआकोण्डा विकासखण्ड के ग्राम टिकनपाल के श्री पोदियाराम ताती ने राज्य शासन के मछली पालन विभाग की सहायता से मत्स्य पालन का कार्य शुरू किया है। वे इससे अच्छा फायदा कमा रहे हैं। पोदियाराम खेती के साथ-साथ अपनी आजीविका चलाने के लिये गांव में मजदूरी का काम भी करते थे। उनकी रूचि मछली पालन में थी। मछली पालन विभाग ने उनकी रूचि को देखते हुए कृषक पोदियाराम को दस दिवसीय विभागीय मछुआ प्रशिक्षण के लिए राज्य के बाहर अपनायी जाने वाली उत्कृष्ट तकनीक का प्रत्यक्ष अनुभव के लिए अध्ययन भ्रमण पर भेजा। अध्ययन भ्रमण पश्चात मछली पालन विभाग की सहायता से उन्होंने अपनी स्वयं की भूमि में मछलीपालन के लिए एक हेक्टेयर पर तालाब निर्माण कराकर मछलीपालन का कार्य प्रारंभ किया। कृषकों को विभागीय योजना से मत्स्य बीज, परिपूरक आहार, जाल, आईस बाक्स, झींगा बीज, सीफेक्स आदि सहायता का लाभ प्रदाय कर उन्नत तकनीक एवं विभागीय मार्गदर्शन में मछलीपालन करने का सलाह दी जा रही है। जिससे वर्तमान में कृषक पोदियाराम के द्वारा मछलियों का उत्पादन के साथ ही झींगा, देशी मांगूर का पालन कर उससे 2 लाख से 2.5 लाख रूपये की आमदनी वर्ष में प्राप्त कर रहा है। प्राप्त आय से तालाब के पास एक मकान बनवाया है। इस तरह मत्स्य पालन व्यवसाय को अपनाने से कृषक के परिवार को रोजगार का साधन प्राप्त हुआ एवं उसकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ।कृषक पोदियाराम सतत् रूप से जिले के मत्स्य पालन विभाग के सम्पर्क में रह कर नयी-नयी तकनीकों से मछली पालन का कार्य कर रहे हैं । वे दूसरे कृषकों के लिए मत्स्य पालन के लिए प्रेरणा स्त्रोत बने हुए हैं।

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