डेस्क:  निमोनिया फेफड़ों से जुड़ा एक गंभीर बीमारी है, जो बैक्टीरिया, वायरस या फंगस के कारण होता है। इस बीमारी में फेफड़ों की वायु थैलियों में तरल या पस भर जाता है, जिससे सांस लेना तक मुश्किल हो जाता है। भारत में यह एक आम लेकिन गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, जिसके प्रति जागरूकता अभी भी पर्याप्त नहीं है। अगर समय रहते इसका इलाज न किया जाए  तो यह जानलेवा भी साबित हो सकता है। ऐसे में एक सवाल अक्सर लोगों के मन में उठता है क्या इंसान सिर्फ एक फेफड़े के सहारे भी जिंदा रह सकता है? क्योंकि हम जानते हैं कि फेफड़े शरीर के सबसे जरूरी अंगों में से एक हैं और इनके बिना जीवन की कल्पना करना भी कठिन लगता है। खासतौर पर जब निमोनिया जैसी गंभीर स्थिति में कभी-कभी एक फेफड़ा निकालने की नौबत आ जाती है, तब यह सवाल और भी अहम हो जाता है। आइए, इस कन्फ्यूजन को दूर करते हैं और समझते हैं कि क्या वाकई एक फेफड़े के साथ जीवन संभव है और भयंकर निमोनिया की स्थिति में डॉक्टर किस तरह मरीज की जान बचाते हैं।

किन लोगों को ज्यादा खतरा होता है?

निमोनिया किसी को भी हो सकता है, लेकिन कुछ लोग इसके ज्यादा शिकार होते हैं। छोटे बच्चे, बुजुर्ग, धूम्रपान करने वाले, कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोग और पहले से किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों में इसका खतरा अधिक रहता है। इसलिए इन लोगों को खास सावधानी बरतने की जरूरत होती है।

लक्षणों को पहचानना जरूरी

निमोनिया के लक्षण शुरुआत में सामान्य फ्लू जैसे लग सकते हैं, लेकिन धीरे-धीरे ये गंभीर हो जाते हैं। तेज बुखार, ठंड लगना, सीने में दर्द, खांसी (कभी-कभी कफ के साथ), सांस फूलना और अत्यधिक कमजोरी इसके प्रमुख संकेत हैं। अगर समय रहते इन लक्षणों पर ध्यान न दिया जाए, तो स्थिति बिगड़ सकती है।

निमोनिया का इलाज कैसे किया जाता है

डॉक्टर मरीज की स्थिति को देखकर इलाज तय करते हैं। इसके लिए छाती का एक्स-रे, ब्लड टेस्ट या अन्य जांच कराई जाती हैं। अगर संक्रमण बैक्टीरिया से है तो एंटीबायोटिक्स दी जाती हैं, जबकि वायरल मामलों में अलग तरह की दवाएं दी जाती हैं। गंभीर स्थिति में मरीज को अस्पताल में भर्ती करना पड़ सकता है और ऑक्सीजन सपोर्ट भी देना पड़ता है।

जब फेफड़ा निकालना पड़ जाए

कुछ मामलों में संक्रमण इतना बढ़ जाता है कि फेफड़े का एक हिस्सा या पूरा फेफड़ा खराब हो जाता है। ऐसी स्थिति में ‘न्यूमोनेक्टॉमी’ नाम की सर्जरी करनी पड़ती है, जिसमें एक फेफड़ा निकाल दिया जाता है। यह कदम आमतौर पर तब उठाया जाता है जब संक्रमण, टीबी, फंगल इंफेक्शन या कैंसर जैसी बीमारी फेफड़े को पूरी तरह नुकसान पहुंचा चुकी हो।

क्या एक फेफड़े के साथ जीवन संभव है

यह सवाल बहुत लोगों के मन में आता है कि क्या एक फेफड़े के सहारे जिया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, मानव शरीर में खुद को परिस्थितियों के अनुसार ढालने की अद्भुत क्षमता होती है। जब एक फेफड़ा निकाल दिया जाता है, तो दूसरा फेफड़ा धीरे-धीरे ज्यादा काम करने लगता है और शरीर की जरूरतों को पूरा करने लगता है। हालांकि, ऐसे लोगों को पहले जैसी शारीरिक क्षमता हासिल करने में समय लग सकता है। भारी काम करने या ज्यादा दौड़ने-भागने में सांस जल्दी फूल सकती है, लेकिन सही इलाज, नियमित जांच और संतुलित जीवनशैली अपनाकर वे सामान्य जीवन जी सकते हैं।

निमोनिया से बचाव के लिए जरूरी है कि समय-समय पर वैक्सीनेशन कराया जाए, साफ-सफाई का ध्यान रखा जाए, धूम्रपान से दूर रहें और इम्यूनिटी मजबूत रखें। हल्के लक्षण दिखने पर भी डॉक्टर से सलाह लेने में देरी न करें।

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