पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरलम, असम और पुडुचेरी के मतदाताओं ने जो जनादेश दर्ज कराया था, वह सार्वजनिक हो गया और कई मायनों में वह अप्रत्याशित, अभूतपूर्व और आश्चर्यजनक रहा। बंगाल में 1977 में कांग्रेस का दुर्ग ढहा था। वाममोर्चे की पहली सरकार बनी थी। 2011 में 34 साल लंबी सत्ता को, ‘लाल किले’ को, ममता बनर्जी ने ध्वस्त किया और एक नए राजनीतिक दौर की शुरुआत हुई। ममता की 15 साल पुरानी सत्ता इस बार ढह गई और भाजपा ‘परिवर्तन की प्रतीक’ बनकर उभरी है। मौजूदा कालखंड में यह जनादेश चौंकाता भी है। भाजपा ऐसे राज्य में सत्तारूढ़ हो रही है, जहां वह श्यामा प्रसाद मुखर्जी के ‘जनसंघ’ के दिनों से प्रयास कर रही थी, लेकिन बंगालियों ने उसे स्वीकार नहीं किया था। इस बार वह ‘राजनीतिक शून्य’ भी भर दिया गया। अंतत: बंगाल और बंगालियों ने प्रधानमंत्री मोदी की गारंटियों, गृहमंत्री अमित शाह की चुनावी नीतियों तथा सूक्ष्म,माइक्रो स्तर पर काडर की रणनीति को जनादेश दे ही दिया। यह संपादकीय लिखने तक कई चरणों की मतगणना हो चुकी थी और बंगाल में भाजपा तृणमूल कांग्रेस से बहुत आगे चल रही थी। भाजपा को लगभग दो-तिहाई बहुमत मिलने के आसार थे। मतगणना के अंतिम आंकड़े स्पष्ट कर देंगे कि जनादेश कितना ऐतिहासिक और प्रचंड है। बंगाल के अलावा, असम में भी भाजपा की सत्ता बरकरार रही है, क्योंकि लगातार दूसरी बार उसे जनादेश हासिल हो रहा है। तमिलनाडु ने चौंकाया है। वहां सत्तारूढ़ रही द्रमुक के खिलाफ जनादेश दिया गया है और सुपरस्टार विजय की नवजात पार्टी टीवीके सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी है। दूसरे स्थान पर अन्नाद्रमुक-भाजपा गठबंधन रहा। मुख्यमंत्री स्टालिन की द्रमुक तीसरे स्थान पर लुढक़ गई है। केरलम में वाममोर्चे की लगातार 10 साल की सत्ता के बाद इस बार जनता ने उसे भी बदल दिया है और कांग्रेस नेतृत्व के यूडीएफ को जनादेश दिया है। कांग्रेस के लिए यह अत्यंत सुखद राजनीतिक खबर है, क्योंकि एक और राज्य में उसकी सरकार बन रही है।

इसका श्रेय ईसाई और मुस्लिम मतदाताओं को दिया जाना चाहिए। अलबत्ता बंगाल और तमिलनाडु में कांग्रेस के ‘हाथ’ लगभग खाली रहे हैं। पुडुचेरी संघशासित क्षेत्र है और वहां 30 सदस्यों की विधानसभा है। वहां का जनादेश भी भाजपा-एनडीए के पक्ष में रहा है। इस तरह इन चुनावों को ‘परिवर्तन के जनादेश’ माना जा सकता है। विपक्ष अब ध्रुवीकरण, हिंदू-मुसलमान, धन-बल, बाहुबल, एसआईआर आदि का रोना रो रहा है। ये उनकी स्वाभाविक कुंठाएं हैं। भाजपा पूरी शिद्दत, ताकत, संगठन के साथ चुनाव लड़ती है, इस पर सवाल नहीं किए जा सकते। बंगाल, तमिलनाडु, केरलम की सत्ताओं को वहां की जनता ने ही खारिज किया है। तमिलनाडु और केरलम में आज भी भाजपा बौनी-सी राजनीतिक ताकत है। बंगाल में भी 2021 से पहले भाजपा हाशिए पर थी, लेकिन इस बार उसे 45 फीसदी से अधिक वोट मिले हैं और उसने 121 सीटें पहली बार जीती हैं। कोलकाता की लगभग सभी सीटें भाजपा के पक्ष में गई हैं। उसके अलावा, बर्धमान, मालदा, जलपाईगुड़ी, मेदिनीपुर, प्रेसीडेंसी, बांकुरा, झारग्राम, खडग़पुर सरीखे इलाकों में भी भाजपा ने परचम लहराया है। क्या यह महज धु्रवीकरण का ही जनादेश है? बेशक मुस्लिम बहुल सीटों पर भी तृणमूल की सीटें घटी हैं, मुस्लिम वोट विभाजित हुए हैं, लेकिन हिंदुओं की लामबंदी का फायदा भाजपा को ही मिला है। यह भी चुनावी रणनीति का हिस्सा है। बंगाल के बड़े भाजपा नेता सुवेन्दु अधिकारी ने बातचीत में स्वीकार किया है कि हिंदुओं और खासकर हिंदू महिलाओं ने भाजपा को बंपर वोट दिए, नतीजतन भाजपा की ऐतिहासिक जीत तय हुई। बहरहाल तमिलनाडु में फिल्म अभिनेताओं के प्रति घोर आकर्षण रहा है, लिहाजा एमजी रामचंद्रन और जयललिता ने बड़े चुनाव जीते और मुख्यमंत्री बने। इस बार भी यह आकर्षण बरकरार रहा है, क्योंकि सुपरस्टार विजय ने पहली बार चुनाव लड़ा है और उनकी पार्टी टीवीके सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी है। उनके नेतृत्व में सरकार बनना लगभग तय है, क्योंकि अन्नाद्रमुक उसे समर्थन दे सकते हैं। एक बार फिर भ्रष्टाचार के मुद्दे पर इतना व्यापक जनादेश दिया गया है। भाजपा के पक्ष में अब भी ‘चुनावी लहर’ है, ये चुनाव साबित करते हैं, लेकिन घुसपैठ, सुरक्षा, कानून-व्यवस्था सरीखे मुद्दों पर कई चुनौतियां हैं।

Share.

chhattisgarhrajya.com

ADDRESS : GAYTRI NAGAR, NEAR ASHIRWAD HOSPITAL, DANGANIYA, RAIPUR (CG)
 
MOBILE : +91-9826237000
EMAIL : info@chhattisgarhrajya.com
October 2026
M T W T F S S
 1234
567891011
12131415161718
19202122232425
262728293031  
Exit mobile version