आस्था और अंधविश्वास की आड़ में किए गए एक बेहद शर्मनाक अपराध में दिल्ली हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी मौलवी को जमानत देने से इनकार कर दिया. कोर्ट ने कहा कि पहली नजर में यह मामला एक मासूम लड़की की कमजोर शारीरिक और मानसिक स्थिति के अलावा उसके परिवार के अंधविश्वास का फायदा उठाकर किए गए शोषण का है.

जस्टिस स्वर्णकान्ता शर्मा की बेंच ने कहा कि आरोपी ने परिवार के भरोसे और लड़की की नाजुक हालत का गलत इस्तेमाल किया. ऐसे गंभीर आरोपों में राहत देना उचित नहीं है. खासकर जब ट्रायल अंतिम चरण में पहुंच चुका हो.

इलाज के नाम पर कैसे रचा गया पूरा जाल 

दिल्ली हाई कोर्ट में दाखिल याचिका के मुताबिक, पीड़िता लंबे समय से बीमार थी. परिवार को शक था कि उस पर जिन्न या किसी बुरी आत्मा का साया है. इसी विश्वास में वे झाड़-फूंक करने वालों के संपर्क में आए. अक्टूबर 2019 में एक परिचित के जरिए आरोपी मौलवी तक पहुंच बनाई गई. जिसने खुद को इलाज करने वाला बताया. आरोप है कि तथाकथित इलाज के दौरान आरोपी ने लड़की से आपत्तिजनक सवाल पूछे और फिर घर जाकर उसे अकेले में ठीक करने की बात कही. यहीं से शोषण का सिलसिला शुरू हुआ. आरोपी ने कथित तौर पर कहा कि जिन्न को भगाने के लिए अश्लील हरकतें करनी होंगी और इसी बहाने उसने कई बार दुष्कर्म किया.

बचाव पक्ष ने दी कोर्ट में अहम दलील

जांच के दौरान पीड़िता का बयान मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज हुआ. जिसमें उसने बार-बार यौन शोषण की बात कही. दिल्ली पुलिस ने दलील दी कि आरोपी ने इलाज के नाम पर विश्वास का घोर दुरुपयोग किया. वहीं बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि आरोपी पिछले छह साल से जेल में है जांच पूरी हो चुकी है और मुख्य गवाहों के बयान भी दर्ज हो चुके हैं. साथ ही गवाही में विरोधाभास की बात भी कही गई, लेकिन कोर्ट ने साफ किया कि जमानत के स्तर पर सबूतों की गहराई से जांच नहीं की जाती. अदालत ने कहा कि ऐसे गंभीर मामलों में, जब ट्रायल चल रहा हो और गवाहों के बयान हो चुके हों. तो जमानत देने में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए.

दिल्ली हाई कोर्ट ने मामले में दिया अहम आदेश

दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि रेप जैसे गंभीर अपराधों में एक बार ट्रायल शुरू होने के बाद आमतौर पर जमानत देने से बचना चाहिए. कोर्ट ने माना कि आरोपों की गंभीरता और उपलब्ध सामग्री को देखते हुए आरोपी को राहत देने का कोई आधार नहीं बनता. हालांकि कोर्ट ने यह भी ध्यान रखा कि आरोपी लंबे समय से जेल में है. इसलिए ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया गया है कि मामले की सुनवाई तेज की जाए और जल्द से जल्द फैसला सुनाया जाए.

Share.

Comments are closed.

chhattisgarhrajya.com

ADDRESS : GAYTRI NAGAR, NEAR ASHIRWAD HOSPITAL, DANGANIYA, RAIPUR (CG)
 
MOBILE : +91-9826237000
EMAIL : info@chhattisgarhrajya.com
May 2026
M T W T F S S
 123
45678910
11121314151617
18192021222324
25262728293031
Exit mobile version