प्रधानमंत्री मोदी ने जिस तरह देश से अपील की है और कुछ हिदायतें भी दी हैं, उनसे स्पष्ट है कि संकट गहरा रहा है। हालात सामान्य की परिधि से बाहर निकल चुके हैं। ईरान युद्ध का बेहद गंभीर असर भारत पर भी महसूस होने लगा है। प्रधानमंत्री ने कोरोना वैश्विक महामारी के दौरान जैसी अपील कई बार की थी, उसी तरह वह अब कह रहे हैं कि कारपूलिंग करें, सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करें, जहां मेट्रो उपलब्ध है, वहां उसी से सफर करें और अधिक से अधिक विद्युत वाहनों का उपयोग करें। प्रधानमंत्री को यहां तक हिदायत देनी पड़ी है कि ‘वर्क फ्रॉम होम’ करें, ऑनलाइन बैठकें करें। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग आज फिर ‘जरूरत’ बन गई है। गैर-जरूरी यात्राएं न करें और कमोबेश 1 साल के लिए विदेश में छुट्टी मनाने, घुमक्कड़ी करने और शादियां करने को स्थगित कर दें। यह देशहित में होगा। चाहे कोई भी त्योहार या घरेलू समारोह हो अथवा निवेश के मद्देनजर सोने की खरीद भी न करें। इससे विदेशी मुद्रा बचेगी, लिहाजा यह भी देशहित मेें होगा। बेशक प्रधानमंत्री मोदी की चिंताएं समझ में आ रही हैं। ईरान युद्ध समाप्त नहीं हो पा रहा है। युद्धविराम के ढोंग में जो हमले किए जा रहे हैं, वे युद्ध ही हैं। अमरीका और ईरान की अपनी-अपनी नाकेबंदी के वैश्विक प्रभाव सामने आ रहे हैं। अमरीका में ही पेट्रोल के दाम 7.5 फीसदी बढ़ गए हैं, जबकि अमरीका में तेल संकट नहीं है। ब्रिटेन में डीजल के दाम 33 फीसदी बढ़ाने पड़े हैं और घर को गरम रखने के लिए एलपीजी का उपयोग बंद कर दिया गया है। दक्षिण कोरिया में नहाने में शॉर्ट शॉवर, सप्ताहांत में ही वाशिंग मशीन चलाने और सरकारी दफ्तरों में लिफ्ट बंद करने जैसी कुछ व्यवस्थाएं देश पर लागू की गई हैं। चीन, फ्रांस, स्पेन, इटली जैसे देशों को भी पेट्रोल-डीजल और गैस के दाम बढ़ाने पड़े हैं। प्रधानमंत्री मोदी भी आम उपभोक्ता के लिए पेट्रोल, डीजल, गैस के दाम बढ़ाने की भूमिका तैयार कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि भारत में कच्चे तेल के बड़े-बड़े कुएं नहीं हैं। हमें तेल आयात करना ही पड़ेगा। युद्ध के कारण और कच्चा तेल लगातार महंगा होने के कारण भारत की तेल कंपनियों को 30,000 करोड़ रुपए माहवार का घाटा झेलना पड़ रहा है। हररोज का औसतन घाटा 1600 करोड़ रुपए का है। सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर जो टैक्स घटाया था, उससे ही सरकार को हर माह 14,000 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है। भारत को तेल, गैस आदि विदेशों से आयात करने पड़ते हैं। अभी देश 93 लाख करोड़ रुपए का आयात कर रहा है। हमारा व्यापार घाटा भी करीब 11.3 लाख करोड़ रुपए सालाना है। आर्थिक और कारोबारी हालात, ईरान युद्ध के कारण, बदतर होते जा रहे हैं, लिहाजा प्रधानमंत्री को कोरोना महामारी जैसी अपील करनी पड़ी है। प्रधानमंत्री ने एक बार फिर यह हिदायत दोहराई है कि हर घर में तेल की मात्रा कम करें। ऐसा करने से स्वस्थ रहेंगे और देश पर भी खाद्य तेल आयात करने का बोझ नहीं बढ़ेगा। प्रसंगवश याद दिला दें कि हमारे दर्जन भर जहाज, टैंकर अब भी होर्मुज के समंदर पर फंसे हैं। हमारे कुछ नाविक मारे गए हैं और घायल भी हुए हैं। ईरान और अमरीका धमकियां दे रहे हैं और होर्मुज जलमार्ग का नाजायज फायदा उठा रहे हैं। भारत ऐसा देश है, जहां 2025-26 में 6.40 लाख करोड़ रुपए का सोना आयात किया गया। हम विदेश यात्राओं पर ही 3.65 लाख करोड़ रुपए खर्च कर देते हैं। यदि इन पर कुछ रोक लगाएंगे, तो विदेशी मुद्रा बचेगी। 2025-26 में हमने कच्चे तेल के आयात पर 10.35 लाख करोड़ रुपए खर्च किए। चूंकि ईरान युद्ध के कारण कच्चा तेल 50 फीसदी महंगा हो गया है, लिहाजा अब हमें तेल के आयात पर करीब 17 लाख करोड़ रुपए खर्च करने पड़ेंगे। बोझ देश की अर्थव्यवस्था पर ही पड़ेगा। विश्व बैंक का आकलन है कि युद्ध के कारण 2026 में ऊर्जा की कीमतों में 24 फीसदी तक बढ़ोतरी होगी और वस्तुओं के दामों में 16 फीसदी तक की वृद्धि हो सकती है। विश्व मंदी के कगार पर है, क्योंकि लगभग सभी देशों की आर्थिक गति धीमी हो गई है। प्रधानमंत्री साफ करें कि भविष्य में क्या होने वाला है। आम आदमी को भविष्य की चिंता सता रही है।

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