रायपुर। छत्तीसगढ़ संयुक्त किसान मोर्चा के प्रदेश नेता राज्य आंदोलनकारी अनिल दुबे, जी.पी.चंद्राकर, दीनदयाल वर्मा,जागेश्वर प्रसाद, लालाराम वर्मा, चेतन देवांगन,अशोक ताम्रकर, महेंद्र कौशिक, ईश्वर साहू, गोवर्धन वर्मा, चंद्रप्रकाश साहू,गिरधारी ठाकुर, परसराम ध्रुव, केशरी जैन ने संयुक्त रूप से कहा है कि देश की संसद ने किसानों के अहित का कानून बना लिया और किसानों के द्वारा वापस लेने के लिए जारी संघर्ष को अंग्रेजों के रास्ते पर मोदी सरकार ने आंदोलन को बदनाम करने हेतु पाकिस्तानी, खालिस्तानी, कनाडा, नक्सलवादी जैसा आरोप लगाकर आंदोलन को आम जनता की नजर में गिरना चाहा। पर ईमानदार किसानों भूमि पुत्रों ने अपनी आंदोलन की भूमि नहीं छोड़ी। यह किसानों की नैतिक जीत है। किसान कानून के बारे में अनभिज्ञ हैं। जो किसान इस कानून को चर्चा कर समझ गए हैं, वह श्री नरेंद्र मोदी सरकार की कब्र खोदकर हमेशा के लिए किसान और परिवार की बर्बादी करने वाले सरकार को नेस्तनाबूद कर देगा। छत्तीसगढ़ संयुक्त किसान मोर्चा ने आज किसानों के लिए 2 प्रस्ताव पास किये हैं-(1)गांव-गांव के किसानों को किसान मोर्चा के नेता, पदाधिकारी काला कानून वापस लेने के लिए क्यों आंदोलन जारी है, काला कानून क्या कहता है और काला कानून से किसानी और परिवार की आने वाले समय में क्या स्थिति होगी। ज्ञात रहे राज्य आंदोलनकारीयों ने 2001 से ही किसानों के सभी फसलों की समर्थन मूल्य में खरीदी और बाजार की व्यवस्था की मांग करते चला आया है, और यही मुद्दा भारत के किसानों ने उठाया है। प्रस्ताव क्र.(2)छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार किसानों के समर्थन मूल्य को व्यापारियों द्वारा शोषण कर किसी भी कीमत में लेने के लिए बनाए गए सौदा पत्रक कानून को समाप्त कराने एवं सभी मंडियों को प्रारंभ कराने के लिए जारी आंदोलन संघर्ष को बढ़ाने का निर्णय लिया है। ज्ञात रहे मुख्यमंत्री के क्षेत्र पाटन मंडी बंद है और वहां शराब बिक्री का कार्य होता है। वहीं कृषि मंत्री के क्षेत्र थान खम्हरिया के मंडी आज दिनांक तक चालू होने के बाद भी खरीदी बिक्री चालू नहीं हो पाया है। जन-जागरण एवं सरकार को घेरने के लिए कार्यक्रम तैयार किया गया है। जल्द ही आंदोलन धरना प्रदर्शन की तिथि घोषित की जाएगी।
