अहमदाबाद: गुजरात के अहमदाबाद में एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 (बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर) के क्रैश को अगले महीने एक साल पूरा हो जाएगा। इस हादसे में विमान में सवार और जमीन पर मौजूद लोगों को मिलाकर लगभग 260 से 274 लोगों की मौत हुई थी, जिससे यह हाल के दशकों का सबसे भीषण हादसा बन गया था। अभी तक इस हादसे की वजह का खुलासा नहीं हो पाया है। एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (एएआईबी) ने शुरुआती रिपोर्ट में दावा किया था कि विमान के दोनों इंजन के अचानक बंद होने से हादसा हुआ। अब अब, गोपनीय पोस्टमॉर्टम दस्तावेज, अहमदाबाद के BJ मेडिकल कॉलेज मुर्दाघर के अंदर से प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही, और आधिकारिक फोरेंसिक रिकॉर्ड के आधार पर यह दावा किय गया है कि फ्लाइट 171 के कैप्टन के दोनों हाथ स्टीयरिंग हैंडल पर थे। उन्होंने विमान को हादसे से बचाने के लिए अंतिम वक्त पर संघर्ष किया था।

किस स्थिति में थी कैप्टन की बॉडी?

फ्री प्रेस जर्नल ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि गोपनीय पोस्टमॉर्टम दस्तावेज, अहमदाबाद के बीजे मेडिकल कॉलेज मुर्दाघर के अंदर से प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही, और आधिकारिक फोरेंसिक रिकॉर्ड में जो अस्पष्ट चूकें दिखाई देती हैं, वे एक बिल्कुल अलग संभावना की ओर इशारा करती हैं। वे एक बिल्कुल अलग संभावना की ओर इशारा करती हैं। वह यह कि कैप्टन विमान को बचाने के लिए शारीरिक रूप से संघर्ष करते हुए शहीद हो गए। कई प्रत्यक्षदर्शियों ने स्वतंत्र रूप से दावा किया है कि कैप्टन सभरवाल का शव बैठी हुई स्थिति में आया था, और उनके हाथ अभी भी उस चीज पर जमे हुए थे जिसे उन्होंने विमान का ‘स्टीयरिंग हैंडल’ (कंट्रोल योक) बताया। अगर यह सच है, तो वरिष्ठ पायलटों का कहना है कि यह इस बात का पक्का संकेत होगा कि कैप्टन आपातकाल के अंतिम सेकंड के दौरान सक्रिय रूप से विमान उड़ा रहे थे। वे एक बड़ी सिस्टम विफलता के बाद बोइंग 787 को बचाने की कोशिश कर रहे थे, न कि जान-बूझकर उसे क्रैश कर रहे थे।

प्रत्यक्षदर्शियों ने क्या कुछ बताया?

प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही उन सुझावों का खंडन करती प्रतीत होती है कि कैप्टन ने 2025 में अहमदाबाद में जान-बूझकर विमान क्रैश किया था। मुख्य प्रत्यक्षदर्शियों में से एक एक मेडिकल पेशेवर हैं जो क्रैश के बाद बीजे मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मौजूद थे, और जिन्होंने क्रैश पीड़ितों से जुड़े लगभग पांच फोरेंसिक पहचान दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए थे।

1. रोमिन वोहरा जो AI 171 क्रैश पीड़ितों के परिवार के सदस्य हैं। उन्होंने बताया कि क्रैश में अपने भाई, अपनी तीन साल की भतीजी और अपनी चाची को खो दिया। वोहरा कहते हैं कि उन्होंने कैप्टन सभरवाल का शव देखा था। जब वे उसे अंदर लाए, तो मैं उनसे बस कुछ ही फीट दूर था। मैं अपनी भतीजी के शव की तलाश कर रहा था, तभी कैप्टन सुमीत का शव व्हीलचेयर पर रखकर अंदर लाया गया। उनका शव बैठने की मुद्रा में था। उसके हाथ हैंडल पर थे, ठीक वैसे ही जैसे कार का स्टीयरिंग व्हील होता है। उसके दोनों हाथ हैंडल पर थे।

2. बीजे मेडिकल कॉलेज के एक डॉक्टर ने बताया कि कैप्टन सभरवाल की सिर्फ पीठ और बगलें जली हुई थीं। उसके शव को भी मुर्दाघर में दूसरे पीड़ितों के शवों से अलग, एक अलग कमरे में रखा गया था। कैप्टन की बॉडी बैठने की मुद्रा में थी, घुटने मुड़े हुए और पैर हवा में, जूते दिखाई दे रहे थे और उसके हाथ अभी भी उस चीज पर थे जिसे उसने विमान का स्टीयरिंग हैंडल बताया। उनका चेहरा साफ पहचाना जा सकता था।

सिर्फ विश्वास कुमार रमेश बचे थे

एयर इंडिया की लंदन गैटविक फ्लाइट अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से टेक-ऑफ के महज कुछ ही सेकंड बाद यह विमान मेघाणी नगर स्थित बी. जे मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल परिसर पर क्रैश हो गया था। यह दर्दनाक हादसा 12 जून 2025 को दोपहर 1:38 बजे हुआ था। हादसे में एकमात्र जीवित यात्री के तौर पर सिर्फ विश्वास कुमार रमेश बचे थे। इस हादसे में गुजरात के पूर्व सीएम विजय रूपाणी की भी मौत हो गई थी।

अभी तक नहीं आई है फाइनल रिपोर्ट

एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक उड़ान भरते ही विमान के दोनों फ्यूल कंट्रोल स्विच ‘कट-ऑफ’ पोजीशन में आ गए थे, जिससे दोनों इंजन बंद हो गए। बाद में कॉकपिट की बातचीत का ब्योरा सामने आा था कि कैप्टन ने को-पायलट से पूछा था, तुमने इंजन कट-ऑफ क्यों किया? जिसपर को-पायलट ने जवाब दिया कि मैंने ऐसा नहीं किया। पायलट संगठनों (फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट) और अमेरिकी सुरक्षा संस्थाओं की रिपोर्ट में दावा किया गया कि विमान के लिथियम बैटरी या इलेक्ट्रिकल सिस्टम में शॉर्ट सर्किट के कारण ईंधन स्विच अपने आप बंद हो गए थे। इसमें पायलटों की कोई गलती नहीं थी।

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