भारती एयरटेल ने शेयर बाजार में बड़ा बदलाव करते हुए एचडीएफसी बैंक को पीछे छोड़कर भारत की दूसरी सबसे वैल्युएबल लिस्टेड कंपनी का स्थान अपने नाम कर लिया है. एयरटेल के शेयर BSE पर 2% से ज्यादा बढ़कर ₹1,943 तक पहुंच गए, जिससे इसका मार्केट कैप लगभग rs 11.8 लाख करोड़ हो गया. वहीं, दूसरी तरफ एचडीएफसी बैंक के शेयर इसी दौरान 2% से अधिक गिर गए, जिससे इसका मार्केट कैप करीब rs 11.7 लाख करोड़ रह गया है. इस समय भारत की सबसे वैल्युएबल कंपनी अभी भी रिलायंस इंडस्ट्रीज है, जिसका मार्केट कैप लगभग ₹18 लाख करोड़ के आसपास है. लेकिन ये सिर्फ एक दिन में हासिल नहीं हुआ है.

एयरटेल और HDFC बैंक का रिटर्न

पिछले 5 सालों में एयरटेल के शेयरों में लगभग 270% की तेजी आई है, जबकि एचडीएफसी बैंक ने इसी अवधि में करीब 49% का रिटर्न दिया है. यह अंतर दिखाता है कि भारतीय टेलीकॉम सेक्टर का वैल्यूएशन तेजी से बदला है, जबकि बैंकिंग दिग्गज एचडीएफसी बैंक अपने मर्जर, पब्लिक सेक्टर के बैंकों से बढ़ते कॉम्टिशन और हाल ही में चेयरमैन के इस्तीफे से जुड़ी चर्चाओं के कारण पहले जैसी मजबूत स्थिति हासिल नहीं कर पाया है. मार्केट कैप के हिसाब से टॉप 10 कंपनियों में इसके अलावा आईसीआईसीआई बैंक, एसबीआई, टीसीएस, बजाज फाइनेंस, एलएंडटी, एचयूएल और एलआईसी शामिल हैं.

एयरटेल पर बुलिश हैं ब्रोकर्स

दलाल स्ट्रीट में एयरटेल को लेकर निवेशकों का रुझान बुलिश बना हुआ है. BofA Securities ने इसका टारगेट प्राइस rs 2,320 रखा है और कहा है कि रिस्क-रिवॉर्ड रेश्यो फिलहाल एयरटेल के पक्ष में है. बैंक के अनुसार, एयरटेल को मार्केट शेयर में अच्छी बढ़त मिल रही है, नॉन-सेलुलर बिजनेस सेगमेंट में मजबूत ग्रोथ दिख रही है और डेटा सेंटर बिजनेस से भी आगे अच्छी कमाई की संभावना है.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एयरटेल की फ्री कैश फ्लो (FCF) धीरे-धीरे बढ़ने की उम्मीद है, क्योंकि टेलीकॉम सेक्टर में कॉम्टिशन स्थिर या घटती दिख रही है और आगे बड़े कैपेक्स में किसी बड़े इजाफे की संभावना नहीं है. इसी वजह से निवेशक एयरटेल को एक मजबूत ग्रोथ स्टॉक के रूप में देख रहे हैं.

JP Morgan ने बताया टारगेट

JP Morgan ने एयरटेल के लिए मार्च 2027 का टारगेट rs 2,250 रखा है और कहा है कि 5G के अलावा भी कई ऐसे कारण हैं जो शेयर को आगे बढ़ा सकते हैं. इनमें नए जुड़े हुए बिजनेस (adjacencies) की ग्रोथ, कर्ज में कमी (deleveraging) और बढ़ते डिविडेंड मुख्य वजहें हो सकती हैं.

Goldman Sachs ने भी एयरटेल पर ‘Buy’ रेटिंग बनाए रखी है, लेकिन 12 महीने का टारगेट थोड़ा घटाकर rs 2,210 कर दिया है (पहले rs 2,250 था). इसका कारण टावर और DTH सेगमेंट में कमजोरी बताया गया है. हालांकि, Q4 नतीजों के बाद कंपनी के FY27–FY30 रेवेन्यू अनुमान 1–2% बढ़ाए गए हैं, जबकि EBITDA अनुमान में 2% तक की मामूली कटौती की गई है.

एयरटेल का अफ्रीका बिजनेस सबसे मजबूत

हालिया Q4FY26 नतीजे मिले-जुले रहे, लेकिन कुल मिलाकर उम्मीदों के आसपास या उससे बेहतर रहे. एयरटेल का अफ्रीका बिजनेस सबसे मजबूत रहा, जहां रेवेन्यू साल-दर-साल 41% बढ़ा, जबकि भारत का होम ब्रॉडबैंड बिजनेस 9.5% तिमाही दर तिमाही बढ़ा है. हालांकि भारत के मोबाइल रेवेन्यू में वृद्धि धीमी रही और UBS के अनुमान से थोड़ी कम मानी गई.

कंपनी ने FY26 के लिए ₹24 प्रति शेयर डिविडेंड घोषित किया है, जो पिछले साल के ₹16 से ज्यादा है और बाजार की उम्मीदों (₹20) से भी बेहतर है. इसके अलावा एयरटेल ने एक शेयर स्वैप डील की घोषणा की है, जिसके तहत वह Airtel Africa में ICIL की 16.31% हिस्सेदारी लेगा और इसके बदले लगभग 146.7 मिलियन नए शेयर जारी करेगा, जिससे कंपनी में करीब 2.4% का डाइल्यूशन होगा.

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