मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 2 फीसदी तक की गिरावट आई है। दरअसल, ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ऐलान किया है कि उन्होंने ईरान पर होने वाले सैन्य हमले को फिलहाल रोक दिया है। सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों की अपील के बाद ट्रंप ने यह कदम उठाया है, ताकि बातचीत के जरिए मिडिल ईस्ट के विवाद को सुलझाया जा सके।
गिर गए कच्चे तेल के भाव
राष्ट्रपति ट्रंप के इस बयान के बाद ब्रेंट क्रूड फ्यूचर 2.7 फीसदी गिरकर 109.09 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड भी 1.3 फीसदी की गिरावट के साथ 107.28 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। इस गिरावट का असर भारतीय बाजार पर भी दिखा, जहां मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर कच्चे तेल की कीमतें करीब 0.9 फीसदी घटकर 9,916 रुपए प्रति बैरल पर आ गई। ट्रंप ने साफ शब्दों में चेतावनी भी दी है कि अगर बातचीत से कोई ठोस नतीजा या संतोषजनक समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका हमला करने के लिए पूरी तरह तैयार है। हालांकि, उन्होंने इसके लिए कोई समय सीमा नहीं बताई है। इसी बीच अमेरिका ने एक बार फिर रूसी कच्चे तेल को खरीदने की अनुमति दे दी है। यह अनुमति 30 दिन के लिए समुद्र में फंसे जहाजों पर लदे तेल के लिए जारी की गई है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने सोमवार को इस फैसले की जानकारी दी।
खरीद सकेंगे रूसी तेल
यह जनरल लाइसेंस उन रूसी तेल टैंकरों को राहत देगा, जो फिलहाल समुद्र में फंसे हुए हैं। अमेरिका का कहना है कि इस फैसले से दुनिया के सबसे गरीब और ऊर्जा संकट से जूझ रहे देशों को बड़ी राहत मिलेगी। यह दूसरी बार है जब अमेरिका ने इस अस्थाई छूट को आगे बढ़ाया है, क्योंकि इससे पहले वाली मोहलत 16 मई को खत्म हो चुकी थी।
50 फीसदी से ज्यादा महंगा हुआ क्रूड ऑयल
ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से दुनिया भर में तेल की कीमतें 50 प्रतिशत से भी अधिक बढ़ चुकी हैं। इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है। पेट्रोल-डीजल से लेकर रोजमर्रा की चीजें तक महंगी हो गई हैं। चार दिनों में ही भारत में पेट्रोल-डीजल के दामों में दो बार बढ़ोतरी की जा चुकी है।
अमेरिका की छूट पर भारत का जवाब
एक तरफ जहां अमेरिका दुनिया को राहत देने का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ भारत ने साफ कर दिया है कि उसे अपने देश के हितों के लिए किसी अमेरिकी अनुमति की जरूरत नहीं है। पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि भारत अपनी जरूरतों के हिसाब से तेल खरीदता है, न कि अमेरिकी छूट के भरोसे। इसके साथ ही शर्मा ने कहा कि भारत पहले से रूस से तेल खरीदता आया है और आगे भी खरीदना जारी रखेगा। उन्होंने देशवासियों को भरोसा दिलाते हुए आगे कहा कि भारत में कच्चे तेल की कोई कमी नहीं है।


