छूरा। कोरोना महामारी ने पूरे विश्व जगत में अपने भयंकर प्रभाव से मानव जीवन पर व्यापक असर दिखाया है। आई.एस.बी.एम. विश्वविद्यालय ने शिक्षा एवं समय-समय पर इस महामारी से बचाव के लिए जागरूकता लाने का प्रयास किया है। इसी उद्देश्य से गुरुवार 24 दिसंबर 2020 को फार्मेसी विभाग के अंतर्गत फार्मेसिस्ट क्लब के तत्वावधान में एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय ई-संगोष्ठी का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस संगोष्ठी का विषय कोरोना टीकाकरण: आगे की चुनौतियां थी। उक्त कार्यक्रम में देश-विदेश से लगभग 200 विद्वान शामिल हुए। उक्त कार्यक्रम की शुरुआत विश्वविद्यालय के वर्चुअल भ्रमण से हुई। फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के उपाध्यक्ष प्रो. शैलेंद्र सराफ ने कार्यक्रम का शुभारम्भ करते हुए कहा कि टीकाकरण निश्चय ही आज के समय का महत्वपूर्ण कार्य है। इसके आगामी चरण सभी के लिए महत्वपूर्ण होगा, इस प्रकार के कार्यक्रमों से लोगों को जागरूक करना आई.एस.बी.एम. विश्वविद्यालय का एक सराहनीय पहल है।
विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. विनय अग्रवाल ने उक्त संगोष्ठी की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कोरोना संक्रमण काल मे विश्वविद्यालय ने सभी शैक्षणिक गतिविधियां ऑनलाइन माध्यम से संपन्न किया जा रहा है। हमारा प्रयास है कि ऐसे कार्यक्रमों से विद्यार्थियों को कोरोनावायरस के प्रति जागरूक किया जाए तथा उनमें सतर्कता लायी जाए। संगोष्ठी के संयोजक डॉ एन.के. स्वामी ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला तथा फार्मेसी विषय के लाभों को विस्तार से समझाया। डॉ. आनंद महलवार प्रति कुलपति ने अपने उद्बोधन में कहा की कोरोनावायरस से बचाव के लिए भारत सहित विभिन्न देशों में टीके का आविष्कार हो रहा है और यह जल्द ही हमें प्राप्त हो जाएगी परंतु भविष्य में हमें ऐसी महामारियों के लिए पहले से तैयार रहना होगा। डॉ. बीपी भोल कुलसचिव ने कहा कि पहले की अपेक्षा इस संक्रमण में कमी आई है परंतु हमें स्वास्थ्य के प्रति गंभीर होने की आवश्यकता है। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रो. शैलेंद्र कौशिक थे, जो उत्पाद विकास प्रबंधक मार्टिनडेल फार्मेसी लंदन में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कोरोनावायरस से रोकथाम के लिए अभी तक कोई टीका या विषाणु रोधी उपलब्ध नहीं हो पाया है और सभी उपचार के लिए अपने प्रतिरक्षा प्रणाली पर निर्भर है। परंतु कुछ देशों ने हाल ही में वैक्सीन बनाने में सफलता प्राप्त की है। विशेष अतिथि प्रो. डवी मार्लीना मालाहती विश्वविद्यालय इंडोनेशिया ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि चीन के वुहान शहर से उत्पन्न होने वाला वायरस तेजी से उभर कर अपना प्रकोप फैलाता जा रहा है इसके रोकथाम के लिए सभी गैर आवश्यक कार्य रोक दिए गए थे और लोगों को अपने घरों में रहने के निर्देश दिए गए थे अब सभी देशों में इसके प्रभाव में कमी दिखाई दे रही है। हाल ही में ब्रिटेन में इस वायरस के नए वेरिएंट देखे जा रहे हैं तथा इससे बचने के लिए शासन ने प्रतिबद्धता दिखाई है। अंत में कार्यक्रम के सहसंयोजक प्रो युगल किशोर फार्मेसी विभाग विभागाध्यक्ष फार्मेसी ने कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए आगे भी इस प्रकार के आयोजन करने हेतु छात्र छात्राओं को आश्वस्त किया। उक्त संगोष्ठी को सफल बनाने में विश्वविद्यालय के प्रो. राजेन्द्र साहू, अश्वनी साहू, अलका वर्मा, प्रवीण यादव, चंद्रशेखर कुर्रे, डायमंड साहू और नीति पांडेय का विशेष सहयोग रहा। उक्त जानकारी विश्वविद्यालय के उप-कुलसचिव शशि कुमार खुंटिया ने दी।
